‘स्वर झंकार’ में दिखी अनूठी जुगलबंदी

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शुक्रवार शाम रवींद्रनाट्य गृह में आयोजित संगीतमयी आयोजन ‘स्वर झंकार’ में देश के ख्यात कलाकारों ने अपने गायन-वादन से शहर के संगीत रसिकों के दिल पर छाप छोड़ी। वायलिन एकेडमी पुणे और मामा साहब मुजुमदार म्यूजिक फाउंडेशन इंदौर के कार्यक्रम का पहला सोपान ख्यात गायिका विदुषी कल्पना झोकरकर के गायन के नाम रहा, तो दूसरा भाग सितार और वायलिन की जुगलबंदी के अविस्मरणीय पलों की सौगात दे गया।
कार्यक्रम का आगाज रात 8.30 बजे हुआ। पंडित अतुल कुमार उपाध्ये और उस्ताद शाहिद परवेज का एक ही मंच को साझा करना।
शुरुआत कल्पना झोकरकर के गायन से हुई। संध्याकालीन राग पुरिया धनाश्री और राग कलावती में निबद्ध बंदिशें प्रस्तुत करने के बाद इन्होंने राग काफी में होरी ‘कौन तरह से तुम खेलत होरी रे’ सुनाया। फागुन में उड़ते रंगों की तरह ही इनका गायन श्रोताओं को अपने रंग में रंगने में कामयाब रहा। तानपुरे पर इनका साथ अनुजा झोकरकर व वैशाली ओकदे ने दिया। तबले पर श्री जाधव और हारमोनियम पर विवेक बंसोड़ ने बखूबी संगत की।

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