शहर में ही थिएटर ग्रुप तैयार करने की कोशिश

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इंदौर. इंदौर शहर शुरू से ही बहुभाषी रहा है। शहर में बड़ी संख्या में मराठीभाषी और गुजरातीभाषी लोग सदियों से रह रहे हैं। 1947 में देश विभाजन के बाद बड़ी तादाद में सिंधी भाषी भी यहां आकर बसे। हिंदी के अलावा मराठी रंगमंच करने वाले तो शहर में कई ग्रुप हैं। मराठीभाषियों के करीब 10 थिएटर ग्रुप हैं। पिछले दो दशकों से सानंद के जरिए बाहर के प्रोफेशनल थिएटर ग्रुप भी यहां नाटक करते हैं। इधर सिंधी और गुजराती नाटकों के मंचन भी शहर में होने लगे हैं। हालांकि अभी बाहर के ग्रुप ही यहां आकर नाटकों का मंचन कर रहे हैं पर स्थानीय समूह रंग समूह बनाने की तैयारियां भी हो रही हैं।
हिंदी रंगमंच पर सक्रिय जितेन्द्र खिलनानी ने बताया कि सिंधी ड्रामा परिषद के अनुरोध पर वे सिंधी कलाकारों का एक समूह बनाकर जल्द ही रिहर्सल शुरू करना चाहते हैं। खिलनानी ने कहा कि भाषा और संस्कृति के संरक्षण के लिए नाटक बेहतरीन माध्यम है। वे स्थानीय युवाओं को सिंधी नाटक के लिए अवेयर कर रहे हैं और प्रतिभाओं को तलाश भी कर रहे हैं।
सिंधी रंगकर्मी कमल आहूजा ने स्थानीय टैलेंट हंट के जरिये कुछ कलाकार खोजे हैं और कुछ छोटे- छोटे नाटक तैयार भी किए हैं। आहूजा का कहना है कि बाहर के नाटक देख कर युवाओं में नाटक के प्रति रुचि पैदा हुई है। अभी छोटे नाटक ही हो पाए हैं लेकिन वे भविष्य में बड़े नाटक करना चाहते हैं।
शहर में साल भर में पांच से आठ सिंधी नाटक मंचित हो रहे हैं। ये नाटक मुंबई, उल्हासनगर और भोपाल के कलाकार यहां आकर करते हैं। इन नाटकों में सामान्य कॉमेडी नाटकों से लेकर गंभीर नाटक तक शामिल हैं। स्थानीय स्तर पर अब तक कोई बड़ा ग्रुप नहीं है। सिंधु परिषद के चुन्नीलाल वाधवानी ने बताया कि हाल ही में सिंधी ड्रामा परिषद का गठन किया गया है। इस परिषद के पास कुछ स्क्रिप्ट हैं। ये परिषद शहर के बिखरे हुए कलाकारों को एक मंच पर लाकर नाटक करने की कोशिश में है। इसके लिए कवायद शुरू कर दी गई है। जल्द ही परिणाम भी दिखने लगेंगे।

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