फिल्‍म रिव्‍यू: ‘फैन’

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यशराज फिल्‍म्‍स की ‘फैन’ के निर्देशक मनीष शर्मा हैं। मनीष शर्मा और हबीब फजल की जोड़ी ने यशराज फिल्‍म्‍स की फिल्मों को नया आयाम दिया है। ‘फैन’ से पहले मनीष शर्मा ने अपेक्षाकृत नए चेहरों को लेकर फिल्में बनाईं। इस बार उन्हें शाहरुख खान मिले हैं। शाहरुख खान के स्तर के पॉपुलर स्टार हों तो फिल्म की कहानी उनके किरदार के आसपास ही घूमती है। मनीष शर्मा और हबीब फैजल ने उसका तोड़ निकालने के लिए नायक आर्यन खन्ना के साथ एक और किरदार गढ़ा है। ‘फैन’ इन्हीं दोनों किरदारों की रोचक और रोमांचक कहानी है।
मनीष शर्मा की ‘फैन’ गौरव चांदना की कहानी है। दिल्ली के मध्यमवर्गीय मोहल्ले का यह लड़का आर्यन खन्ना का जबरा फैन है। उसकी जिंदगी आर्यन खन्ना की धुरी पर नाचती है। वह उनकी नकल से अपने मोहल्ले की प्रतियोगिता में विजयी होता है। उसकी ख्वाहिश है कि एक बार आर्यन खन्ना से पांच मिनट की मुलाकात हो जाए तो उसकी जिंदगी सार्थक हो जाए। अपनी इसी ख्वाहिश के साथ वह विदाउट टिकट राजधानी से मुंबई जाता है। मुंबई पहुंचने पर वह डिलाइट होटल के कमरा नंबर 205 में ही ठहरता है। आर्यन खन्ना के जन्‍मदिन के मौके पर वह आर्यन खन्ना से मिलने की कोशिश करता है। उसकी भेंट तो हो जाती है, लेकिन पांच मिनट की मुलाकात नहीं हो पाती।
आर्यन खन्ना उसे पांच सेंकेंड भी देने के लिए तैयार नहीं है। गौरव चांदना को आर्यन खन्ना का यह रवैया अखर जाता है। वह अब बदले पर उतर आता है। यहां से फिल्म की कहानी किसी दूसरी फिल्म की तरह ही नायक-खलनायक या चूहे-बिल्ली के पकड़ा-पकड़ी में तब्दील हो जाती है। चूंकि किरदार थोड़े अलग हैं और उनके बीच का झगड़ा एक ना पर टिका है, इसलिए फिल्म रोचक और रोमांचक लगती है।

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