फिल्म रिव्यु – कैप्टन अमेरिका

captain america

इस बार एवेंजर्स के बीच ही आइडियोलॉजी को लेकर मतभेद हैं। इसी के बूते एकाएक सिविल वॉर शुरू हो जाता है। टोनी स्टार्क जो आयरन मैन का किरदार निभाते आए हैं वो अपनी ओर से कैप्टन अमेरिका का किरदार निभा रहे स्टीव रॉजर्स पर दबाव बनाते हैं कि यूएन पैनल के द्वारा तय की जा रही व्यवस्था को लेकर वो अपनी सहमति दे दें। मगर कैप्टन इसके लिए इनकार कर देते हैं। कैप्टन का असमर्थन इस झगड़े की जड़ साबित होता है।
इस लड़ाई में कैप्टन के पुराने दोस्त जैसे ब्लैक विडो (स्कॉरलेट जोहानसन), हॉकआई (जेर्मी रेनर), स्कारलेट विच (एलिजाबेथ ओल्सन), वॉर मशीन (डॉन चेडल), फॉल्कॉन (एंथोनी मैकी) और विजन (पॉल बैटनी) भी एक-दूसरे के खिलाफ खड़े हो जाते हैं। यहां नई एंट्री आन्ट मैन (पॉल रुड), ब्लैक पैंथर (चेडविक बोसमैन), स्पाइडर मैन (टॉम होलैंड) की भी हुई है।
फिल्म में सुपरहीरो के आउटफिट कमाल के हैं। लाल और नीले रंग का बेहतरीन उपयोग किया गया है। फिल्म का एक आकर्षण यह भी है। हालांकि फिल्म में कई एवेंजर्स देखने को मिलते हैं। बावजूद इसके कहीं भी ऐसा नहीं लगता है कि कुछ ज्यादा हो रहा है।यही इस फिल्म की खूबसूरती है। यह प्रयास उससे तो बेहतर है जिसमें बेटमैन के सामने सुपरमैन को रखा गया था।

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