फिल्‍म रिव्‍यू: ‘अकीरा’

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02_09_2016-akira_review

अकीरा का संस्कृत में अर्थ होता है वह शक्ति जिसमें शालीनता हो। गजनी, हॉलीडे जैसे हिट फिल्म दे चुके ए आर मुर्गोदास की यह तीसरी हिंदी फिल्म है। उनकी फिल्में हीरो प्रधान होती हैं। उनमें एक्शन की भरपूर डोज होती है। अकीरा में भी एक्शन की भरभार है। हालांकि यह एक्शन हवा-हवाई नहीं है। इन्हें रियल फाइट की तरह रखा गया है। साथ ही यह न्याय प्रणाली की सुस्त चाल की ओर ध्यान इंगित करती है। न्याय में देरी इंसान की जिंदगी तबाह कर देती है और यह ताउम्र एक इंसान के लिए बदनुमा धब्बा भी बन जाती है। यह धब्बे चाहकर भी उसका पीछा नहीं छोड़ते। भले ही वह निर्दोष साबित हो।
अकीरा भ्रष्ट पुलिस सिस्टम में अनजाने में फंस जाने वाली एक लड़की के ईदगिर्द बुनी गई कहानी है। अन्याय के खिलाफ लड़ी लड़ाई उसके बचपन को निगल जाती है। मगर वह हार नहीं मानती। अपनी जिंदगी में पढक़र आगे बढ़ने का जज्बा रखती है। यह इंगित करती है लड़ी कोमल होती है लेकिन कमजोर नहीं। वह भी अन्याय के खिलाफ मुंहतोड़ जवाब देने में सक्षम है। फिल्म में लड़कियों पर होने वाले एसिड अटैक और उनके दुष्परिणाम उनके साथ होने वाली नाइंसाफी के खिलाफ झकझोरती भी है।
बहरहाल, सोनाक्षी सिन्हा की अदाकारी इस परतदार फिल्म को ऊंचाइयों पर ले जाती है। सोनाक्षी अभी तक वह चुलबुली लड़की के किरदार में दिखी है। इसमें वह शांत और संयत दिखी है। उनका एक्शन अवतार भी देखने को मिला है। उसके लिए उन्होंने भरसक मेहनत भी की है। एक्शन सीन करते हुए वह सधी हुई नजर आती हैं। हालांकि उनके भावपूर्ण दृश्य द्रवित नहीं करते हैं। भ्रष्ट एसीपी अधिकारी की भूमिका में अनुराग कश्यप हैं। वह कहीं-कहीं भावहीन नजर आते हैं। उनके खाते में एक्शन सीन नहीं हैं। संवादों के माध्यम से उन्हें कहीं-कहीं कॉमेडी का मौका मिला है। गर्भवती पुलिस अधिकारी की भूमिका में कोंकणा सेन शर्मा ने अच्छा काम किया है। कुमार और मनोज मुंतजार के लिखे गीत प्रभावित करते हैं। विशाल और शेखर का बैकग्राउंड संगीत उसे कर्णप्रिय बनाते हैं।

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