जल्द आएंगे मेड इन इंडिया आईफोन

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आगे चलकर भारत में बने आईफोन और आईपैड बाजार में आ सकते हैं। एेपल कथित तौर पर केंद्र सरकार के साथ भारत में इन्हें बनाने की संभावनाओं पर बातचीत कर रही है। वॉल स्ट्रीट जर्नल की एक रिपोर्ट में ऐसा कहा गया है।
रिपोर्ट में दो वरिष्ठ सरकारी अधिकारियों के हवाले से कहा गया है कि भारत में आईफोन और आईपैड तैयार करने की योजना जल्द आकार ले सकती है। यदि ऐसा हुआ तो यह बड़ी बात होगी। इस मायने में कि एेपल के सीईओ टिम कुक एक बार कह चुके हैं कि भारत में प्लांट लगाने की कोई योजना नहीं है, लेकिन सरकार का कहना था कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के साथ बातचीत चल रही है।
हाल ही में हुई बैठक पीटीआई के मुताबिक एेपल के अधिकारियों और औद्योगिक नीति एवं संवर्धन विभाग (डीआईपीपी) के सचिव रमेश अभिषेक के बीच हाल ही में एक बैठक हुई थी। तब विदेशी निवेश के मसले पर चर्चा की गई थी।
बहरहाल वॉल स्ट्रीट जर्नल ने सूत्रों के हवाले से बताया है कि एेपल की तरफ से भारत सरकार को एक चिट्ठी भेजी गई और उसके बाद व्यापार मंत्रालय के वरिष्ठ अधिकारियों ने कंपनी के अधिकारियों के साथ एक बैठक की।

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प्रोत्साहन चाहती है कंपनी रिपोर्ट में एक सरकारी अधिकारी को यह कहते बताया गया है कि भारत में प्रोडक्ट्स मैन्युफैक्चर करने के लिए एपल सरकार की तरफ से वित्तीय प्रोत्साहन चाहती है। लेकिन, एेपल ने इस मसले पर कुछ भी कहने से इनकार कर दिया। संभावना जताई जा रही है कि कंपनी भारत में उत्पादन शुरू करने के बाद यहां अपने स्टोर खोलेगी।
एपल की मजबूरी आईडीसी की एक रिपोर्ट के मुताबिक 2017 में भारत चीन के बाद दुनिया का दूसरा सबसे बड़ा स्मार्टफोन बाजार बन जाएगा। अमेरिका इस मामले में तीसरे पायदान पर खिसक जाएगा। ऐसी स्थिति में एपल को अपने प्रोडक्ट बेचने के लिए बड़ा बाजार हाथ लगेगा।
खास तौर पर आईफोन के लिए, जिसकी बिक्री अब भी भारत में ज्यादा नहीं होती। शर्तें मानना मुश्किल इससे पहले जनवरी में एेपल ने कथित तौर पर भारत में स्टोर खोलने के लिए सरकार से अनुमति मांगी थी। जून में भारत सरकार ने कई औद्योगिक क्षेत्रों में विदेशी निवेश के नियमों में ढील दी थी।
वाल स्ट्रीट जर्नल के मुताबिक एेपल जैसे सिंगल ब्रांड रिटेलरों को स्टोर खोलने की अनुमति तो है, लेकिन तीन साल बाद उन्हें 30 फीसदी मैन्युफैक्चरिंग सामग्री स्थानीय वेंडरों से खरीदनी होगी। एेपल के लिए ऐसा करना मुश्किल हो सकता है क्योंकि भारत में बहुत ज्यादा मैन्युफैक्चरिंग कंपनियां नहीं हैं।

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