इन्फ्रा प्रॉजेक्ट्स, स्कूल, कॉलेज, जेल सब प्राइवेट सेक्टर को सौंपा जाए: नीति आयोग

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नीति आयोग के सीईओ अमिताभ कान्त का कहना है कि सरकार को इन्फ्रास्ट्रक्चर प्रॉजेक्ट्स से बाहर निकलने की जरूरत है। कांत ने यहां तक कहा कि सरकार को जेल, स्कूल और कॉलेज को भी प्राइवेट सेक्टर के हवाले करने पर भी विचार करना चाहिए, जैसा कि कनाडा, ऑस्ट्रेलिया जैसे देशों में होता है। हालांकि, उन्होंने भारत के प्राइवेट सेक्टर की कड़ी आलोचना भी की और इसे सबसे ‘असंवेदनशील’ और ‘अतार्किक’ बताया।
नीति आयोग के सीईओ अमिताभ कान्त का कहना है कि सरकार को इन्फ्रास्ट्रक्चर प्रॉजेक्ट्स से बाहर निकलने की जरूरत है और यहां तक कि जेल, स्कूल और कॉलेज को भी प्राइवेट सेक्टर के हवाले करने पर भी विचार होना चाहिए, जैसा कि कनाडा, ऑस्ट्रेलिया जैसे देशों में होता है। हालांकि, उन्होंने भारत के प्राइवेट सेक्टर की कड़ी आलोचना भी की और इसे सबसे ‘असंवेदनशील’ और ‘अतार्किक’ बताया।
कान्त ने कहा कि प्राइवेट सेक्टर ने आक्रामक बिडिंग के जरिये प्रॉजेक्ट्स की खटिया खड़ी कर दी और पब्लिक प्राइवेट पार्टनरशिप (पीपीपी) मॉडल का संकट तैयार कर दिया। उन्होंने बताया, ‘सरकार ने काफी बड़े प्रॉजेक्ट्स पर काम किया है, लेकिन सरकार ऑपरेशन और मेंटनेंस में अच्छी नहीं है। लिहाजा, सरकार को बीओटी (बिल्ड, ऑपरेट और ट्रांसफर) मॉडल की प्रक्रिया को उल्टा करने की जरूरत है। सरकार को प्रॉजेक्ट्स की बिक्री करनी चाहिए और प्राइवेट सेक्टर को इसे हैंडल करने का मौका दिया जाना चाहिए।’
हवाई अड्डों पर गंदे बाथरूम का उदाहरण देते हुए उन्होंने कहा, ‘हमें इसे प्राइवेट सेक्टर को सौंपना चाहिए। यह प्राइवेट सेक्टर को उसके पैसे को इन्फ्रास्ट्रक्चर में वापस लाने का सबसे तेज तरीका है। ये प्रॉजेक्ट्स पूरी तरह से जोखिमुक्त हैं।’ हवाई अड्डों पर बाथरूम की देखरेख की जिम्मेदारी फिलहाल

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