जाने बांधवगढ़ सफ़ेद शेर की मात्रभूमि को …..

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Bandhav garh

शहडोल जिले में विंध्य पर्वत माला की दूरस्थ पहाड़ियों में 448 वर्ग कि.मी. क्षेत्र में फैला छोटा किन्तु सघन राष्ट्रीय उद्यान है। सफेद शेर की मातृभूमि बांधवगढ़ में बाघों की सघनता पूरे भारत की तुलना में सबसे अधिक है। इस भू-भाग की घाटियों ओर ढालानों में साल-वन फैले हुए हैं जो पहाड़ियों तथा उद्यान के दक्षिण और पश्चिम में शुष्क क्षेत्र होने के कारण पतझरीय वनों के रूप में बदलते जाते हैं। यहां बांस सब जगह पाया जाता हैं।
बांधवगढ़ नेशनल पार्क में स्तनपाई की 22 प्रजाति सहित पक्षियों की 250 प्रजातियां पाई जाती हैं। इस अभ्यारण्य में घूमने पर आप बाघ, एशियाई सियार, धारीदार लकड़बग्घा, बंगाली लोमड़ी, राटेल, भालू, जंगली बिल्ली, भूरा नेवला और तेंदुआ सहित कई तरह के जानवर देख सकते हैं। इसके अलावा कुछ स्तनपाई जैसे गिलहरी, धोले, छोटा चूहा और छोटा भारतीय कस्तूरी भी यहां कभी-कभार देखने मिल जाएंगे

दर्शनीय स्थल

वन्य जीवन:- यहां 22 से अधिक स्तनपायी प्राणी और 250 से अधिक जातियों के पक्षी पाए जाते हैं। यहां मांस भक्षी प्राणियों में एशियायी सियार, बंगाल लोमड़ी, भाल्, बिज्जू, सफेद नेवला, धारीदार लकड़बग्घा, जंगली बिल्ली, तेन्दुआ और बाघ शामिल हैं। शाकाहारी प्राणियों में मात्र मोर ही है। नालों की तटवर्ती भूमि और दलदली जमीन में पायी जाने वाली वनस्पति पक्षियों के आकर्षण का कारण है ओर उनके लिए उपयोग हैं।

कैसे पहुंचे

वायु सेवा:- खजुराहो तक विमान से पहुंचने के बाद 237 कि.मी. की दूरी सड़क द्वारा तय करनी पड़ती है।

रेल सेवा:- बांधवगढ़ के निकटवर्ती रेलवे स्टेशनों में मध्य रेलवे के जबलपुर (169 कि.मी.), कटनी (72 कि.मी.), सतना (120 कि.मी.) और दक्षिण पूर्वी रेलवे के उमरिया (35 कि.मी.) शामिल है।

सड़क मार्ग:- राज्य/निजी परिवहन की बसें कटनी और उमरिया के बीच सतना और रीवा से ताला (बांधवगढ़)के बीच चलती हैं। सतना, जबलपुर, कटनी, उमरिया,बिलासपुर (300 कि.मी.) और खजुराहो से टैक्सियां भी मिलती हैं।

ठहरने के लिए:- मध्यप्रदेश पर्यटन विकास निगम का लॉज तथा वन विभाग एवं लोक निर्माण विभाग के रेस्ट हाऊस यहां हैं।

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