कब तक हम घुट घुट के जियेंगे …..सुप्रीमकोर्ट जल्द दे तीन तलाक पर फैसला …आफरीन रहमान

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साल 2014 में आफ़रीन रहमान की शादी जयपुर के एक पांच-सितारा होटल में बहुत धूमधाम से हुई थी.उस व़क्त आफ़रीन एमबीए की पढ़ाई पूरी करने के बाद नौकरी कर रही थीं. लेकिन अपने व़कील पति के साथ ज़िंदगी की एक नई शुरुआत के लिए उन्होंने वो सब छोड़ दिया.
आफ़रीन कहती हैं, “शादी वैसी नहीं निकली जैसी सोची थी, दहेज़ की मांगें कभी ख़त्म ही नहीं हुईं और मना करने पर मारपीट होने लगी, मुझे डिप्रेशन (अवसाद) हो गया.”उनका आरोप है कि शादी के एक ही साल में उनके पति ने उन्हें वापस मायके भेज दिया. कुछ महीने बाद एक भयानक सड़क दुर्घटना में आफ़रीन गंभीर रूप से घायल हो गईं और उनकी मां की मौत हो गई.

supreme-court

आफ़रीन के पिता की मौत कुछ साल पहले ही हो गई थी. अब आफ़रीन ख़ुद को बहुत अकेला पा रहीं थीं.अभी वो अपनी चोटों से उबर ही रही थीं कि उनके पति ने हाथ से लिखी चिट्ठी उनकी बहन और कुछ और रिश्तेदारों के पास भेजी.जब आई तलाक़ वाली चिट्ठी उस पर लिखा था, ‘तलाक़ तलाक़ तलाक़’.आफ़रीन बताती हैं, “मैं सदमे में चली गई, वो बहुत बुरा व़क्त था और मुझे कुछ समझ नहीं आ रहा था कि क्या करूं.”

तब आफ़रीन की ममेरी बहन ने उनकी मदद की, हिम्मत बंधाई और तलाक़ को ग़लत ठहराने के लिए सुप्रीम कोर्ट जाने का रास्ता सुझाया.उन्होंने ही आफ़रीन के पति के ख़िलाफ़ घरेलू हिंसा और दहेज़ के लिए परेशान करने के केस दायर करवाए.आफ़रीन के पति और सास को गिरफ़्तार भी किया गया और चार दिन बाद ज़मानत पर रिहा कर दिया.

आफ़रीन कहती हैं, “हमारे बच्चे नहीं हुए, इसलिए मेरे पास ज़िंदगी को नए तरीके से शुरू करने का मौका है.”

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