क्या सच में डर के आगे जीत है आओ जाने..!!!

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हर दिन को ऐसे ही जिएं और जीत तक पहुंचने के लिए डर का दुर्ग जीतने की जरूरत नहीं रहेगी.

क्या आप भी किसी गाने को सुनकर या कोई एड देखकर जोश से भर जाते हैं? क्या डर के आगे जीत…जैसी बातें आपके खून की रफ्तार बढ़ा देती हैं? क्या आपको भी लगता है कि आप भी एक से दूसरे घर की ऊंची छत पर वैसे ही स्टंट कर सकते हैं या जो चाहें वो हासिल कर सकते हैं? बिल्कुल. आप ये सब बिल्कुल कर सकते हैं लेकिन किसी गाने, किसी टैग लाइन या सॉफ्ट ड्रिंक के बूते नहीं.

अगर शब्द आपके खून की रफ्तार बढ़ाने का काम करते हैं तो शब्दों के जाते ही जोश भी ठंडा पड़ सकता है. अगर ठंडा पीने से आपके इरादों को गर्मी मिलती है तो ठंडे की बोतल खत्म होते ही वो भी खत्म हो सकती है. इसलिए किसी इंस्टैट जोश को नहीं, बल्कि लॉन्ग टर्म हिम्मत को जगाना जरूरी है. डर का विकेट एकाएक नहीं गिरता. इसके लिए लंबी मेहनत, लगन और दृढ़ता चाहिए.

 

ये डर ही तो है, जो हमें हिम्मत का मौका देता है
साहस तो तभी है, जब आपके भीतर किसी चीज का डर हो. कई बार ये डर इस हद तक हावी हो जाता है कि हमें या तो दुस्साहस के लिए उकसाने लगता है या फिर हम डर को ही सच मानकर बैठ जाते हैं. डर से निजात पाने का सबसे अच्छा तरीका यही है कि हम उसे पहचानें.

अपने डर को पहचानें. उसे नाम दें. उसे एक तीसरे व्यक्ति की तरह संबोधित करें और आप पाएंगे कि वो आपके भीतर सिर्फ एक किराएदार की हैसियत से रह रहा था. आपने नोटिस दिया और उसने कमरा खाली किया.

इस घोड़े की लगाम आपके हाथ में है
कल्पना यूं तो बड़ी खूबसूरत शै है, लेकिन डर के मामले में यही हमारी सबसे बड़ी दुश्मन बन जाती है. हम जितनी ज्यादा कल्पना करेंगे, हमारा डर उतना ही बड़ा होकर हमें डराएगा. लंबी-गहरी सांस लें और अपने डर को 1 से 10 तक नंबर दें. देखें कि आपका डर किस पायदान पर है.

आप जैसे ही ये करते हैं, दिल पर दिमाग हावी हो जाता है और डर अपने-आप कम होने लगता है. वे सारे काम करें, जिनसे डर लगता है, गणित से लेकर घोड़ा भगाने तक. भाषण देने से लेकर प्यार करने तक. उस काम से शुरुआत करें जो सबसे ज्यादा डराए. उस तक पहुंचने के लिए खुद को छोटे-छोटे लक्ष्य दें और फिर उसे जीतें.

डर को दें उल्टी दिशा
कल्पना करें कि आप कुछ ही देर में मरने वाले हैं. आपके आसपास लोग जमा हैं, रो रहे हैं, प्यार कर रहे हैं. याद करें कि आप कौन सा काम करना चाहते थे और नहीं कर सके. क्या आपने उसके लिए पूरी कोशिश की? अधूरी कोशिश आपको चैन से मरने भी नहीं देगी.

तो अब आप मौत से पहले के उस कुछ देर का इस्तेमाल अपने डर को जीतने के लिए करें. इसके लिए किसी सॉफ्ट ड्रिंक या झकझोरने वाले संगीत की जरूरत नहीं. ड्रिंक की झाग बैठते-न बैठते आपका जोश बैठ सकता है, गाने के बोलों का आखिरी लाइन आपके हिम्मत का आखिरी पड़ाव हो सकती है. लेकिन मौत से पहले की आपकी हिम्मत को किसी ड्रिंक या गाने की दरकार नहीं.

 

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