1964 में बनी फ़िल्म ‘महारानी पद्मिनी’ में खिलजी ने पद्मिनी को अपनी बहन मानl …!!

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रानी पद्मिनी पर हिंदी में एक फ़िल्म बनी थी जिसका नाम था ‘महारानी पद्मिनी’.इस फ़िल्म का निर्देशन जसवंत झावेरी ने किया था और अनिता गुहा ने रानी पद्मिनी का क़िरदार निभाया था. ये फ़िल्म डिलाइट मूवीज़ के बैनर तले बनी थी.

इस फ़िल्म में भी महारानी पद्मिनी के क़िरदार पर नृत्य दृश्य फ़िल्माए गए थे.फ़िल्म एक गीत से शुरू होती है जिसके बोल हैं, ‘यहीं हुई है बरसों पहले एक पद्मिनी रानी, पूनम का चंदा भरता था जिसके सामने पानी, होली के दिन खेल रही थी वो सखियों से, नाच रही थी बनके राधिका बीच में एक मस्तानी.“इस फ़िल्म में भी दिल्ली के सुल्तान अलाउद्दीन खिलजी का क़िरदार रानी पद्मिनी के इश्क़ में गिरफ़्तार है.

हालांकि इस फ़िल्म में दिखाया गया है कि खिलजी के सेनापति मलिक काफ़ूर उन्हें महारानी पद्मिनी के हुस्न में उलझा लेते हैं ताकि वो दिल्ली की गद्दी पा सकें.महारानी पद्मिनी को हासिल करने के लिए खिलजी राणा रतन सिंह को क़ैद कर लेते हैं.इस फ़िल्म के आखिर में खिलजी पद्मिनी को अपनी बहन मान लेते हैं और राजपूत राजा राणा रतन सिंह खिलजी की बांहों में दम तोड़ते हैं. फ़िल्म रानी पद्मिनी के जौहर पर समाप्त होती है.फ़िल्म के एक सीन में महारानी पद्मिनी सुल्तान अलाउद्दीन खिलजी की जान भी बचाती हैं.फ़िल्म के आखिर में सुल्तान अलाउद्दीन खिलजी कहते हैं, “हमारी ये फ़तह इतिहास की सबसे बड़ी शिकस्त है.”इस फ़िल्म का भी कोई विरोध नहीं हुआ था.

इसके अलावा जसवंत झावेरी ने पद्मिनी की कहानी पर ही 1961 में ‘जय चित्तौड़’ फ़िल्म भी बनाई थी.

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