‘क्रिमिनल अमेंडमेंट एक्ट’ के तहत ‘स्टॉकिंग सिर्फ पुरुषो के लिए ..!

भारतीय दंड संहिता की धारा 354-D के मुताबिक़, अगर कोई महिला स्पष्ट तौर पर अपनी असहमति जता चुकी हो, इसके बावजूद कोई पुरुष उस महिला से संबंध बढ़ाने, पीछा करने की कोशिश या ऐसे घूरे जिससे महिला सहज महसूस न करे और मानसिक प्रताड़ना महसूस करे तो ऐसा करने वाले पुरुष को स्टॉकिंग का अपराधी माना जाएगा.

ये सारे काम अगर कोई पुरुष इंटरनेट, ई-मेल या फ़ोन के ज़रिए कर रहा है तो ये भी स्टॉकिंग ही मानी जाएगी. इसमें दोषी पाए जाने वाले पुरुष को पांच साल तक की सज़ा और जुर्माना दोनों का प्रावधान है.

2012 में दिल्ली में निर्भया गैंग रेप केस के बाद ‘क्रिमिनल अमेंडमेंट एक्ट’ के तहत ‘स्टॉकिंग’ यानी ग़लत इरादे से महिला का पीछा करने को दंडनीय अपराध माना गया था.

इस क़ानून पर गौर किया जाए तो ये मान लिया गया है कि स्टॉकिंग पुरुष ही कर सकता है.

शायद आपको ताज्जुब होगा कि अगर एक लड़के के साथ स्टॉकिंग की घटना

होती है या एक महिला पुरुष का रेप करती है तो इसको लेकर कोई क़ानून नहीं है.

सुप्रीम कोर्ट की वरिष्ठ वकील रेखा अग्रवाल बताती हैं, ”आईपीसी 354-डी सिर्फ़ पुरुषों पर लागू हो सकती है, ये औरतों पर नहीं लागू होगा. आईपीसी में महिलाओं की स्टॉकिंग को लेकर कोई स्पेशल क़ानून नहीं है. आज 21वीं सदी में जब हम मॉर्डन इंडिया की बात करते हैं तो जो काम लड़के कर सकते हैं, वो लड़कियां भी कर सकती हैं. इसमें स्टॉकिंग भी शामिल है. मेरा मानना है कि लड़कियों की स्टॉकिंग को लेकर कोई क़ानून नहीं है.”

राष्ट्रीय महिला आयोग की पूर्व अध्यक्ष ललिता कुमार मंगलम लड़कियों की ओर से स्टॉकिंग करने को लेकर कोई क़ानून न होने पर हैरानी जताती हैं.

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