गुलअफ़्शा को मिला न्याय…. तीन तलाक़ असंवैधानिक ..!

मुस्लिम महिलाओं की स्थिति  बयां

उत्तर प्रदेश के रामपुर की रहने वाली गुलअफ़्शा का नाम संसद में भी गूंजा. क़ानून मंत्री ने उनके मामले का हवाला देते हुए मुस्लिम महिलाओं की स्थिति को बयां करने की कोशिश की.

गुलअफ़्शां रामपुर ज़िले की तहसील सदर के नगलिया आकिल गांव में रहती हैं.

गुलअफ्शां और कासिम का घर एक-दूसरे से चंद क़दमों की दूरी पर है. दोनों एक-दूसरे को सालों से जानते थे. जान-पहचान प्यार में बदली और सात महीने पहले दोनों ने शादी कर ली.

गुलअफ्शां के पति कासिम ड्राइवर

गुलअफ्शां ने हमें बताया, “रविवार की रात को मेरे पति कासिम ने मेरे साथ बहुत मारपीट की थी. मारपीट के चलते मेरी तबियत बिगड़ गई थी और अगली सुबह इसी वजह से मैं थोड़ा देर से उठी.”

केंद्र सरकार ने लोकसभा में एक बार में तीन तलाक़ बिल पेश किया और गुरुवार को दिनभर चली बहस के बाद आख़िरकार ये लोकसभा में पास हो गया.

बिल के ख़िलाफ़ विपक्षी सांसद कई संशोधन लेकर आए, लेकिन संख्याबल के आगे ये सभी संशोधन ख़ारिज हो गए. लोकसभा के बाद अब ये बिल राज्यसभा में मंज़ूरी के लिए जाएगा.

22 अगस्त 2017 को सुप्रीम कोर्ट ने एक बार में तीन तलाक़ को असंवैधानिक बताया था.

बिल पेश करने के दौरान क़ानून मंत्री रविशंकर प्रसाद ने कहा कि यह मामला महिलाओं की गरिमा से जुड़ा हुआ है.

मसौदा पेश करने के दौरान रविशंकर प्रसाद ने एक मामले का ज़िक्र भी किया.

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