द्रविण राजनीति के बदलते स्वरुप में रजनीकांत का प्रवेश …!

दक्षिण की राजनीति में हमेशा से ही फिल्मी व्यक्तित्व का बोलबाला रहा है , फिर चाहे रामचंद्रन हो ,या जयललिता l लेकिन जयललिता के जाने के बाद दक्षित भारत के तमिलनाडू में रानीतिक खालीपन सा आ गया था, जिसका फायेदा उठा कर बीजेपी ने रजनीकांत को मैदान सौप दिया l

वैसे भी बीजेपी अपने अगले चुनाव को ध्यान में रखते हुए साउथ को अपना लक्ष्य बनायेगी , चूकि उसे पता है की नार्थ में अब उसे पूर्ण बहुमत लाना मुश्किल होगा , लेकिन इसकी भरपाई साउथ के सीटो से की जा सकती है l

प्रदेश की शक्तिशाली नेता जयललिता के निधन के बाद से राज्य की राजनीति में खालीपन है.

जया एक ताक़तवर नेता थीं और वो अपनी शर्तों पर केंद्र सरकार को भी नचाती रही हैं.

जयललिता और रजनीकांत में जो एकमात्र समानता है वो यह है कि दोनों की पृष्ठभूमि सिनेमा है.

राजनीतिक विश्लेषक बीआरपी भास्कर का कहना है, “द्रविड़ राजनीति से आने वाली जयललिता के नहीं होने की भारपाई रजनीकांत करे देंगे ऐसा सोचने के लिए कोई ख़ास वजह नहीं है. जयललिता की मौत के बाद से प्रदेश की द्रविड़ राजनीति में भारी उथल-पुथल है. हम कह सकते हैं कि यह बदलाव का पहला चरण है और अभी लंबी दूरी तय करनी है.”

 

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