आधार डाटा में सेंध लगाने वाली रिपोर्ट पर UIDAI ने दर्ज कराई FIR

यूआईडीएआई के उप निदेशक बीएम पटनायक ने ‘द ट्रिब्यून’ अखबार में छपी खबर के बारे में पुलिस को सूचित किया और बताया कि अखबार ने अज्ञात विक्रेताओं से व्हाट्सऐप पर एक सेवा खरीदी थी जिससे एक अरब से अधिक लोगों की जानकारियां मिल जाती थी. पुलिस ने इसकी जानकारी दी. पुलिस ने कहा कि पटनायक ने 5 जनवरी को इसकी शिकायत की थी और इसी दिन प्राथमिकी दर्ज कर ली गई थी.

यूआईडीएआई के अधिकारियों ने बताया कि द ट्रिब्यून की संवाददाता ने खरीदार बनकर विस्तृत जानकारियां खरीदी है. पुलिस ने कहा कि प्राथमिकी में पत्रकार और सेवा मुहैया कराने वाले लोगों का भी नाम शामिल हैं. हालांकि उन्हें आरोपी नहीं बताया गया है. पुलिस ने कहा कि प्राथमिकी में शामिल लोगों से पूछताछ की जाएगी.

हालांकि ‘एडिटर्स गिल्ड ऑफ इंडिया’ ने इस मामले में रिपोर्टर रचना खैरा के खिलाफ एफआईआर दर्ज होने की निंदा की है. एडिटर्स गिल्ड ऑफ इंडिया ने अखबार और उसके रिपोर्टर पर से केस हटाने की मांग की है.

वहीं प्राथमिकी दर्ज कराने को लेकर आलोचकों के निशाने पर आने के बाद यूआईडीएआई ने कहा कि वह प्रेस की आजादी समेत अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता का सम्मान करता है. यूनिक आइंडेटिफिकेशन अथॉरिटी ऑफ़ इंडिया (UIDAI) ने कहा है कि पुलिस ने केस इसलिए दर्ज किया, क्योंकि इस मामले में अपराध हुआ है. UIDAI ने कहा कि ट्रिब्यून की जिस रिपोर्ट पर एफ़आईआर हुई है उसे मीडिया में ऐसे दिखाया जा रहा है जैसे UIDAI मीडिया को निशाना बना रहा हो. यह बिलकुल भी सही नहीं है. हम बोलने की आज़ादी और मीडिया और प्रेस की आज़ादी का सम्मान करते हैं, लेकिन पूरे ब्योरे के साथ एफ़आईआर दायर कराने की हमारी कार्रवाई मीडिया को निशान बनाने की तरह नहीं देखा जाना चाहिए.

ये ऐसा मामला है जिसमें आधार बायोमीट्रिक डेटाबेस में सेंध तो नहीं लगी है, लेकिन सिस्टम तक बिना इजाज़त पहुंच बनाने की कोशिश की गई. इसलिए केस की शुरुआत की गई.

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