सेवानिवृत्त नौकरशाहों का देश में अल्पसंख्यकों के प्रति भेदभाव को लेकर सरकार के नाम एक खुला पत्र

माननीय,

हम, अलग-अलग सेवाओं और बैच के सेवानिवृत्त नौकरशाह देश में हो रही हिंसा की निरंतर घटनाओं, ख़ासकर जिनमें अल्पसंख्यक निशाने पर हैं, और इन हमलों को लेकर कानून लागू करवाने वाले तंत्र के ढीले रवैये को लेकर गहरी चिंता दर्ज कराना चाहते हैं.

बाबरी मस्जिद ढहाए जाने की 25वीं बरसी पर राजस्थान के राजसमंद में पश्चिम बंगाल के एक कामगार मोहम्मद अफ़राज़ुल की हत्या ने हम सभी को अंदर तक हिला कर रख दिया.

इस जघन्य कृत्य का वीडियो बनाना और फिर इंटरनेट पर इस हत्या को सही ठहराने की कोशिश उस समावेशी और बहुलता भरे समाज की जड़ों को काटने के समान है, जिसे बुद्ध, महावीर, अशोक, अकबर, सिख गुरुओं, हिंदू संतों और गांधी की शिक्षाओं से प्रेरणा मिलती है.

पिछले नौ महीनों में, हमने 3 अप्रैल को पहलू ख़ान की मौत होते हुए देखी जिस पर 1 अप्रैल को अलवर में बेहरोर के पास कथित गौर रक्षकों ने की एक भीड़ ने हमला कर दिया था.

उसने जिन हत्यारों का नाम लिया था उन्हें अभी तक गिरफ्तार नहीं किया गया है. हालांकि, अन्य सात लोगों को गिरफ्तार किया गया था और बाद में उन्हें जमानत पर छोड़ दिया गया.

दूसरी हत्या ज़फ़र ख़ान की हुई थी जिसे 16 जून को स्वच्छ भारत अभियान के नाम पर मार डाला गया.

प्रतापगढ़ में म्यूनिसिपल चेयरमैन और अन्य सफाई कर्मचारियों ने कथित तौर पर उसे मार डाला, जब वह प्रतापगढ़ को खुले में शौच मुक्त बनाने के अभियान के नाम पर लोगों को अपमानित किए जाने का विरोध कर रहा था.

इस मामले में कोई गिरफ्तारी नहीं हुई क्योंकि पुलिस दावा करती है कि ज़फ़र ख़ान की मौत हार्ट अटैक से हुई.

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