जाने सरकार क्यों नही घटा रही है पेट्रोल -डीजल के दाम..?

सरकार कोई भी हो लेकिन पेट्रोल डीजल की कीमतों में से इनका कंट्रोल ख़त्म हो गया है , ये राजनीतिक फायेदे के लिए भले ही थोड़े समय के लिए हेरा फेरी कर सकते है, लेकिन अंततः इसकी भरपाई जनता के जेब से होगा l सरकार को इस दुविधा से बचने के लिए कोई दूसरा सोर्स खोजना होगा अन्यथा ये मुददा हर सरकार को परेशां करेंगा l

निश्चित ही कच्चे तेल की कीमतों में पिछले कुछ दिनों में इजाफा हुआ है और पिछले केवल दस दिनों में 2.54 रुपये के इजाफ़े के साथ पेट्रोल पिछले चार साल के अपने सबसे महंगे स्तर पर जा पहुंचा है.

सरकार पर पेट्रोल और डीज़ल की क़ीमतें घटाने का दबाव है, क़ीमतें बढ़ने की दो वजहें बताई जा रही हैं–कच्चे तेल की बढ़ती क़ीमत और डॉलर के मुक़ाबले कमज़ोर होता रुपया, लेकिन ऊँची क़ीमत की सबसे बड़ी वजह इस पर लगाया जाने वाला सरकारी टैक्स ही है.

दिल्ली में बुधवार को एक लीटर पेट्रोल की कीमत 77.17 रुपये है जिसमें टैक्स का हिस्सा 35.89 रुपये का है. यानी ग्राहकों तक पहुंचते-पहुंचते पेट्रोल की क़ीमत में 95 फ़ीसदी टैक्स (मूल क़ीमत का) जुड़ जाता है.

कैसे तय होती है कच्चे तेल की क़ीमत?

बुधवार को कच्चे तेल की कीमत 86.29 डॉलर प्रति बैरल पर पहुंच गई. यानी रुपये (67.45) के संदर्भ में एक बैरल कच्चे तेल की कीमत 5,820 रुपये हुई. अब एक बैरल में 159 लीटर होता है. तो प्रति लीटर कच्चे तेल की कीमत 36.60 रुपये हुई.

अब तेल की ख़रीद के बाद भारत लाने में ढुलाई देना होता है, फिर भारतीय तटों से इसे (आईओसी, बीपीसीएल जैसी कंपनियों की) रिफाइनरी में पहुंचाने में खर्च होता है. इसके बाद कंपनी इसे प्रोसेस करने के बाद पेट्रोल, डीजल की शक्ल में डीलर्स (पेट्रोल पंप) तक पहुंचाती है. जहां इन पर केंद्र सरकार एक्साइज ड्यूटी और डीलर अपना कमीशन जोड़ते हैं जबकि राज्य सरकारें वैट लगाती हैं.

फिलहाल डीलर के पास पहुंचने पर पेट्रोल की कीमत करीब 37.65 रुपये प्रति लीटर होती है जिसपर केंद्र सरकार 19.48 रुपये एक्साइज़ ड्यूटी लगाती है और डीलर अपना कमीशन (दिल्ली में 3.63 रुपये) जोड़ते हैं, फिर राज्य सरकारें वैट (महाराष्ट्र में वैट 46.52%, केरल में यह 34% और गोवा में 17%) लगाती हैं.

दिल्ली में पेट्रोल की कीमत पर 23 मई को 16.41 रुपये वैट लगाया गया. इस प्रकार जिस कीमत पर ग्राहक पेट्रोल ख़रीदते हैं उस पर उन्हें करीब 95 फ़ीसदी टैक्स देना पड़ रहा है.

जून 2010 में पेट्रोल और अक्तूबर 2014 में डीजल के डीरेग्यूलेट होने के बाद महीने में दो बार कीमतें बदला करती थीं, लेकिन 16 जून 2017 से देश में पेट्रोल और डीज़ल की कीमतें रोज़ाना बदलती हैं. लेकिन कर्नाटक विधानसभा चुनाव से पहले पहली बार 20 दिनों के लिए इसके रोजाना बदले जाने पर रोक लगा दी गई और 20 दिनों (25 अप्रैल से 13 मई) तक इसमें कोई बदलाव नहीं आया और जब इसे हटाया गया तो ईंधन की कीमतें अपने रिकॉर्ड स्तर पर पहुंच गईं.

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