२०१९ लोकसभा चुनाव से पहले कश्मीरी पंडितो के वापसी की कवायद ..!

बीजेपी अपने सभी पांसे एक के बाद एक फेंक रही है , चूंकि २०१९ लोकसभा उसके लिए अत्यधिक महत्त्वपूर्ण हो गया है. अतः सरकार कोई न कोई ऐसा मुददा चाहती है जिससे उसकी लहर फिर बन जाये l अभी तक कश्मीर के मुद्दे में सरकार ने देश की जनता को निराश ही किया है , उसके हर वादे जनता के नज़र में या तो झूठ साबित हुए है या फिर जुमला बनाया गया है l अब चुनावी वर्ष में सरकार कश्मीर के बारे में कुछ कड़ा कदम उठा के जनता को संतुष्ट करना चाहती है, हालांकि वो इतना आसान नही होगा , फिर भी सरकार का ये प्रयास रहेगा की हमने कश्मीर पर अपने कदम बढ़ा दिए है l

वर्तमान सरकार ये अच्छे से जानती है की कश्मीर की समस्या का समाधान वहा पर कश्मीरी पंडितो के पुनः बसावट के बाद ही की जा सकती है l सरकार इस नीति के जरिये वहा पर रोज़गार भी उपलब्ध करा सकती है , और वह पर पढ़ने वाले युवको को रोज़गार उपलब्ध कराया जा सकता है l

 

पीपुल्स डेमोक्रेटिक पार्टी (पीडीपी) की नेता और जम्मू कश्मीर की पहली महिला मुख्यमंत्री रहीं महबूबा मुफ़्ती ने गठबंधन तोड़ने के लिए बीजेपी की ये कहते हुए आलोचना की है कि राज्य में सख़्ती की नीति नहीं चल सकती.

उन्होंने श्रीनगर में संवाददाता सम्मेलन में कहा, ”ये सोचकर बीजेपी के साथ गठबंधन किया था कि बीजेपी एक बड़ी पार्टी है, केंद्र में सरकार है. हम इसके ज़रिए जम्मू कश्मीर के लोगों के साथ संवाद और पाकिस्तान के साथ अच्छे संबंध चाहते थे, उस समय अनुच्छेद 370 को लेकर घाटी के लोगों के मन में संदेह थे लेकिन फिर भी हमने गठबंधन किया था ताकि संवाद और मेलजोल जारी रहे.”

‘अवसरवादी गठबंधन’

जम्मू कश्मीर में पीडीपी के साथ गठबंधन सरकार से बीजेपी के अलग होने के फ़ैसले पर कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी ने दोनों पार्टियों को आड़े हाथों लेते हुए उनके गठबंधन को अवसरवादी बताया है.

कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी ने अपने एक ट्वीट में लिखा है, ”बीजेपी-पीडीपी के अवसरवादी गठबंधन ने जम्मू कश्मीर को आग में झोंक दिया, कई निर्दोष लोग मारे गए जिनमें हमारे बहादुर सैनिक भी शामिल हैं.”

”भारत को इसकी सामरिक क़ीमत चुकानी पड़ी है और इसकी वजह से यूपीए की कई वर्षों की कड़ी मेहनत बर्बाद हो गई. राष्ट्रपति शासन के दौरान भी क्षति जारी रहेगी. अक्षमता, घमंड और नफ़रत हमेशा विफल होती है.”

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