अमिताभ से रेखा पर क्या पूछ लिया करन ने…?

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भारत वापस आने के बाद अमिताभ बच्चन के साथ किए गए इंटरव्यू से करन थापर का बहुत नाम हुआ.

करन बताते हैं, “हमने तय किया कि अमिताभ की 50वीं सालगिरह पर हम उनके साथ एक लंबा इंटरव्यू करेंगे. इंटरव्यू के दौरान जब एक छोटा सा ब्रेक हुआ तो अमिताभ ने मुझसे कहा कि एक बार वॉरेन बेट्टी के साथ एक इंटरव्यू किया गया था जिसमें उनकी लव लाइफ़ के बारे में कई बेबाक सवाल पूछे गए थे.”

उन्होंने कहा, “मुझे लगा कि शायद अमिताभ चाहते हैं कि मैं भी उनसे इस तरह के सवाल पूछूँ. मैं भी चूका नहीं. मैंने उनसे पूछा कि शादी के बाद आपका किसी महिला से इश्क़ हुआ है. अमिताभ ने बिना पलक झपकाए जवाब दिया, ‘नहीं, कभी नहीं.’ मैंने फिर पूछा, रेखा से भी नहीं? अमिताभ ने जवाब दिया, नहीं उनसे भी नहीं.”

इस पर करन ने अमिताभ के बगल में बैठी उनकी पत्नी जया भादुड़ी से भी पूछ लिया कि क्या अमिताभ जो कह रहे हैं, उसपर आपको विश्वास है?

जया ने जवाब दिया, “मैं अपने पति पर हमेशा विश्वास करती हूँ.”

करन बताते हैं, “बात यहीं पर ख़त्म नहीं हुई. अमिताभ बच्चन ने इसरार किया कि इंटरव्यू के बाद हम खाने के लिए रुकें. जब हम डाइनिंग रूम में खाने के लिए पहुँचे तो अमिताभ बच्चन का अब तक रुका हुआ गुस्सा ज्वालामुखी की तरह फटा. और इसकी शुरुआत तब हुई जब जया ने उनसे पूछा कि क्या आप चावल लेना पसंद करेंगे.”

करन ने बताया, “जया का ये पूछना था कि अमिताभ ने तमक कर जवाब दिया, तुम्हें पता है कि मैं चावल नहीं खाता. जया ने कहा, ‘मैं चावल खाने के लिए इसलिए कह रही हूँ क्योंकि रोटी आने में अभी थोड़ी देर है.’ तब तक अमिताभ का गुस्सा सातवें आसमान पर था. वो चिल्लाए, तुम्हें पता है, मैं कभी भी चावल नहीं खाता.”

करन कहते हैं, “अब हमारी समझ में आने लगा था कि मेरे सवालों से उपजे गुस्से को अमिताभ ने जिस तरह रोक कर रखा था, वो अब बाहर आ रहा था. हमारे लिए ये थोड़ी और परेशानी की बात थी क्योंकि हम उनकी ही खाने की मेज़ पर बैठकर उनका दिया खाना खा रहे थे. हम पंद्रह मिनट तक वहाँ रहे. इस बीच खाने की मेज़ पर किसी ने एक शब्द भी नहीं कहा.”

इस वाकये के अगले दिन जब करन दिल्ली पहुँचें तो उनसे उनकी मालकिन शोभना भारतिया ने कहा कि वो अपने इंटरव्यू से अमिताभ के इश्क़ वाला सवाल हटा दें.

करन कहते हैं, “मैंने वो हिस्सा हटा भी दिया. लेकिन अंदर ही अंदर मुझे ये चीज़ पसंद नही आई. मैंने अपने एक पत्रकार मित्र आनंद सहाय से संपर्क किया जो उस समय पायनियर अख़बार में काम करते थे. उन्होंने ये ख़बर पूरे आठ कॉलम में अपने अख़बार में छापी. उन्होंने इस ख़बर में मेरा नाम नहीं लिया, लेकिन इसका स्रोत मैं ही था. शोभना को इसका आभास हो गया. वो मुझसे थोड़ी नाराज़ भी हुईं, लेकिन ये नाराज़गी बहुत दिनों तक जारी नहीं रही.”

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