जाने आडवाणी के आँख में आंसू क्यों आये ..?

साल 2000 के शुरुआती दिनों में अशरफ़ जहाँगीर काज़ी भारत में पाकिस्तान के उच्चायुक्त बनाए गए.

वो उस समय भारत के उप-प्रधानमंत्री लाल कृष्ण आडवाणी के साथ अपने रिश्ते मज़बूत करना चाहते थे.

करन थापर ने बताया, “मुझे ये ज़िम्मेदारी दी गई कि मैं अशरफ़ को अपनी कार में बैठाकर आडवाणी के पंडारा पार्क वाले घर पर ले जाऊँ. मैं रात के 10 बजे उन्हें लेकर वहाँ गया. ये गुप्त मुलाक़ात क़रीब डेढ़ घंटे तक चली. इसके बाद अगले 18 महीनों में आडवाणी और अशरफ़ क़रीब बीस या तीस बार इस तरह मिले.”

मई 2001 में भारत ने घोषणा की कि उसने जनरल मुशर्ऱफ़ को अपने यहाँ आमंत्रित किया है.

वो कहते हैं, “एक दिन सुबह साढ़े 6 बजे मेरा फ़ोन बजा. आडवाणी लाइन पर थे. उन्होंने कहा आपने मुशर्ऱफ़ वाली ख़बर तो सुन ली होगी. आप हम दोनों के दोस्त को बताइए कि इसका बहुत कुछ श्रेय हम दोनों की मुलाक़ातों को जाता है.”

दिलचस्प बात ये है कि जब मई 2002 में जम्मू के पास कालूचक हत्याकांड हुआ तो भारत सरकार ने इन्हीं काज़ी अशरफ़ जहाँगीर को वापस पाकिस्तान भेजने का फ़ैसला किया.

करन बताते हैं, “अशरफ़ के पाकिस्तान वापस जाने से एक दिन पहले आडवाणी की पत्नी कमला का मेरे पास फ़ोन आया कि क्या आप अशरफ़ साहब और उनकी पत्नी आबिदा को मेरे यहाँ चाय पीने ला सकते हैं? मेरी समझ में नहीं आया कि एक तरफ़ भारत सरकार इस शख़्स को अपने देश से निकाल रही है और दूसरी तरफ़ उसका उप-प्रधानमंत्री उसी शख़्स को अपने यहाँ चाय पर बुला रहा है.”

“बहरहाल मैं उनको लेकर आडवाणी के यहाँ पहुंच गया. हम लोगों ने आडवाणी की स्टडी में चाय पी. विदा लेते समय जब अशरफ़ आडवाणी की तरफ़ हाथ मिलाने बढ़े, तभी कमला ने कहा, गले लगो. दोनों व्यक्ति ये सुनकर आश्चर्यचकित रह गए. उन्होंने एक साथ उनकी तरफ़ देखा. कमला आडवाणी ने फिर कहा, गले लगो. आडवाणी और अशरफ़ ने एक दूसरे को गले लगाया. मैं आडवाणी के पीछे खड़ा था. मैंने देखा कि आडवाणी की आँखें आंसुओं से भरी हुई थीं.”

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