जिन अंग्रेजों ने इन्हीं जेलों में यातनाएं देकर लाखों भारतीयों को मार डाला, आज वो ही हमारी जेलों की जांच कर रहे हैं। भगोडे़ विजय माल्या के मामले में भारत सरकार ब्रिटेन के समक्ष विरोध जताए।*

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1 अगस्त के सभी समाचार पत्रों में छपा है कि ब्रिटेन की वेस्टमिंस्टर मजिस्ट्रेट कोर्ट के जज एम्मा अर्बुथनाॅट ने मुम्बई स्थित आॅर्थर रोड जेल के बैरक नम्बर 12 का वीडियो मांगा है ताकि बैंक घोटाले के भगौड़े विजय माल्या की सुविधाओं को देखा जा सके। ब्रिटेन की कोर्ट का यह निर्णय बेहद ही अफसोसनाक है, क्योंकि जज अर्बुथनाॅट के पूर्वजों ने ही इन्हीं जेलों में लाखों भारतीयों को यातनाएं देकर मार डाला। ब्रिटेन के जज को यह समझना चाहिए कि उन्हीं के पूर्वजों ने भारत पर 200 वर्षों तक राज किया। तब अंग्रेजों ने बड़ी बड़ी जेलों का निर्माण इसलिए किया ताकि आजादी मांगने वाले भारतीयों को रखा जा सके। इतिहास गवाह है कि अंग्रेजों ने किन परिस्थितियों में भारतीयों को जेलों में रखा। अंडमान निकोबार में काला पानी तो कई जेलों में भारतीयों को कोल्हू के बैल की तरह बांधा गया। लाखों भारतीयों ने अपने देश की खातिर जेलों में ही दमतोड़ दिया। ऐसे अंग्रेजों के वंशज जज अर्बुथनाॅट को हमारी जेलों की जांच करने का कोई अधिकार नहीं हैं। जहां तक जेलों में लोगों के मानवाधिकारों का सवाल है तो भारत में मानावाधिकार ब्रिटेन से अच्छे हैं। जो देश हमारे लाखों लोगों का हत्यारा हो वह हमें मानवाधिकार का पाठ नहीं पढ़ाए।

मुम्बई की जेल में भगोड़ा विजय माल्या कैसे रहेगा, इसकी जिम्मेदारी भारत सरकार की है। जब ब्रिटेन की अदालत में विजय माल्या को आर्थिक अपराधी मान लिया तो उसे माल्या को तुरंत भारत की जांच एजेंसियों के सुपुर्द कर देना चाहिए। आज ब्रिटेन की अदालत बेईमान विजय माल्या के लिए आरामदायक जेल तलाश रही है, वहीं इसी विजय माल्या की वजह से भारत की बैंकों के दस हजार करोड़ रुपए डूब गए है। क्या इस राशि को माल्या की सम्पत्तियों से वसूलने का अधिकार हमारा नहीं है? जज अर्बुथनाॅट जेल तो जेल ही होती है। आप अपने पूर्वजों का इतिहास पढ़ ले तो आपको भारतीय जेलों के बारे में पता चल जाएगा।
शर्म आनी चाहिए विजय माल्या कोः
इस मुद्दे पर विजय माल्या को भी शर्म आनी चाहिए। ब्रिटेन से वापस ऐसे आना चाहता है, जैसे अपने ससुराल आ रहा हो। जेल का बैरक भी अपने मन मुताबिक चाहिए। माल्या जब हिन्दुस्तान में अर्द्धनग्न लड़कियों के कलेंडर बनवा रहा था, तब जेल का ख्याल नहीं आया। गरीब लोगों के बैंकों में जमा पैसे से ऐशोआराम करने वाला विजय माल्या अब जेल में भी आराम की जिंदगी चाहता है। इस मुद्दे पर भारत सरकार को ब्रिटेन के समक्ष राजनयिक स्तर पर विरोध प्रकट करना चाहिए।
(एस.पी.मित्तल)

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