कठिन डगर है १०% का आरंक्षण सवर्णों के लिए, बीजेपी का चुनावी स्टंट मुश्किल भरा हो सकता है ..

0
156

पूर्व प्रधानमंत्री विश्वनाथ प्रताप सिंह ने जब साल 1990 में अन्य पिछड़ा वर्ग (ओबीसी) के लिए आरक्षण की नीति लागू की थी जिसे हम सभी मंडल आयोग के तौर पर जानते हैं तब उनके इस क़दम को मास्टरस्ट्रोक कहा गया था. क्योंकि कोई भी राजनीतिक दल उनके इस क़दम का खुलकर विरोध नहीं कर पाया था.

acting-course-Advertisement-final.jpg

मौजूदा दौर में जब बीजेपी ने जनरल कैटगरी में आर्थिक रूप से कमज़ोर तबक़े के लिए 10 प्रतिशत आरक्षण लागू करने की बात कही है तो इसे भी 2019 के लोक सभा चुनाव से पहले मोदी सरकार का एक बड़ा मास्टर स्ट्रोक बताया जा रहा है.

वीपी सिंह के नेतृत्व वाली सरकार हालांकि अपने इस महत्वपूर्ण क़दम के बाद महज़ एक साल ही सरकार में टिक पाई थी, उन्हें इस क़दम का कोई बहुत अधिक लाभ नहीं मिल पाया था, लेकिन मंडल आयोग लागू करने का असर उत्तर भारत सहित पूरे देश की राजनीति पर पड़ा.

बीजेपी के इस क़दम को भी मास्टर स्ट्रोक इसीलिए कहा जा रहा है क्योंकि कोई भी दल इसका विरोध करने की हिम्मत नहीं जुटा पा रहा.

जैसे कि मंडल आयोग को उसकी घोषणा होने के कुछ सालों बाद ही लागू किया जा सका था. उसी तरह आरक्षण से जुड़े इस नए बिल को लागू करने में भी कुछ वक़्त तो ज़रूर लगेगा.

संविधान संशोधन के पीछे चाल
मोदी सरकार को उम्मीद है कि सुप्रीम कोर्ट इस पर रोक नहीं लगाएगी. सरकार ने न्यायिक हस्तक्षेप की संभावना के मद्देनज़र ही संविधान संशोधन करने का फैसला किया है. सरकार को उम्मीद है कि संविधान में प्रावधान होने की वजह से अदालत इस पर रोक नहीं लगाएगी.

तीन दिन पहले बना नोट
आर्थिक आधार पर आरक्षण का कैबिनेट नोट तीन दिन पहले तैयार किया गया था. कैबिनेट नोट की खबर लीक न हो, इसके लिए सरकार ने इसे कैबिनेट के एजेंडे में सबसे आखिर में जोड़ा था. सोमवार को इस फैसले के लिए खास तौर पर कैबिनेट की बैठक बुलाई गई. नोट तैयार करते हुए यूपीए के वक्त बनी सिन्हो कमेटी की रिपोर्ट को ध्यान में रखा गया. मोदी सरकार ने आर्थिक आधार पर आरक्षण के बारे में पिछले साल जुलाई महीने में सोचा था. 

    'No new videos.'