क्या लोकसभा २०१९ में बेरोजगारी मुद्दा रहेगा ….!!!

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जब बीजेपी सरकार ने साल 2014 में सत्ता संभाली थी तो भारत में रोज़गार पैदा करना सरकार की योजनाओं का मुख्य हिस्सा था.

इस संबंध में आधिकारिक रूप से प्रकाशित आंकड़े बहुत सीमित हैं, लेकिन लीक हुए बेरोज़गारी के आंकड़ों ने भारत में रोज़गार की स्थिति को लेकर एक ज़बरदस्त बहस छेड़ दी है.

​विपक्षी दल कांग्रेस की महासचिव प्रियंका गांधी ने सरकार पर नौकरी से जुड़े अपने वादे पूरे न करने का आरोप लगाया है.

तो क्या बेरोज़गारी बढ़ी है?

11 अप्रैल को होने वाले लोकसभा चुनाव के लिए, बीबीसी रियलिटी चेक प्रमुख राजनीतिक दलों द्वारा किए गए दावों और वादों की पड़ताल कर रहा है.

ये विवाद तब शुरू हुआ जब एक स्थानीय मीडिया ने राष्ट्रीय नमूना सर्वेक्षण कार्यालय (एनएसएसओ) के लीक हुए एक अध्ययन के हवाले से बताया कि भारत में बेरोज़गारी दर अपने चार दशकों के सबसे उच्च स्तर 6.1% पर पहुंच गई है.

एनएसएसओ बेरोज़गारी का आकलन करने सहित देश में कई बड़े सर्वेक्षण करता है.

राष्ट्रीय सांख्यिकी आयोग (एनएससी) के कार्यकारी अध्यक्ष ने ​विरोध करते हुए इस्तीफ़ा दे दिया और इन आंकड़ों की पुष्टि भी की.

लेकिन, सरकार की ओर से कहा गया कि ये अध्ययन सिर्फ़ एक मसौदा है. रोज़गार संकट को लेकर दिए गए सुझावों को भी ख़ारिज कर दिया गया. साथ ही आर्थिक विकास बढ़ने के संकेत दिए.

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