एक महिला की सोच ..मेघा की क़लम से

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मेघा उपाध्याय
आई.पी.अकादमी

अपनी पत्नी अपनी बहू की हमेशा इज्जत करें उसे हमेशा उसका अधिकार दे सम्मान दे क्योंकि सिर्फ आपके लिए वह अपना घर परिवार रिश्ते नाते यहां तक कि अस्तित्व तक छोड़ कर आती है और ऐसे में अगर उसे उम्मीद के हिसाब से स्नेह और सम्मान नहीं मिल पाता तो अंदर ही टूट कर रह जाती है l

दहेज प्रताड़ना और बेटे को जन्म ना दे पाने जैसे कुछ कारणों की वजह से भारत में 80% महिलाएं प्रताड़ित की जाती है साथ में उन्हें घरेलू हिंसा का शिकार होना पड़ता है भूमि जैसी कुछ महिलाएं जोकि घरेलू हिंसा की सूली पर चढ़कर खत्म हो चुकी है …..कहीं जिंदा जलाया जा रहा है तो कहीं चाकू से गोद दिया गया क्या यही है उस देश की शान जहां पर नदी से लेकर धरती तक को मां कहा जाता है?

पर जो सच में? जीती जागती शक्ति का प्रतीक है उन्हें स्ने क्यो ह नहीं मिल पा रहा? क्यों सम्मान नही मिल रहा है? क्या कभी ऐसा सवाल किया है अपने आप से? नहीं! क्यों क्योंकि हमारी सोच वहां तक पहुंची नहीं। हमने तो हमेशा पुरुष को ही उच्च दर्जा दिया है।

उनको ही ताकतवर साबित किया है। और इसी की आड़ में में महिलाओं के प्रति इतने दुर्व्यवहार किए जा रहे हैं। अगर हम भारत के कुछ पिछड़े वर्ग जैसे अलीराजपुर और उत्तर प्रदेश के कुछ गांव में देखें तो वहां पर महिलाओं का घर से बाहर तक निकलना मना है, और तो और बेटियों के जन्म देने पर उस मां को प्रताड़ित किया जाता है ,डराया धमकाया जाता है ।

.        क्या कभी biological तरीके से सोचा है ,कि क्या महिलाएं इसका कारण है ? की बेटियों को जन्म दे रही है ?अगर सच्चाई बता दी जाए तो नहीं और बेटियों का होना क्या गुनाह है अगर हम देखें तो आजकल हर क्षेत्र में बेटियां लड़कों से कदम से कदम मिलाकर चल रही है बल्कि एक स्तर आ गई है पढ़ाई के क्षेत्र से ले ले तो मनोरंजन तक उदाहरण हमारे सामने हैं फिर भी यह सब क्यों ,क्यों इतनी नीची और रूढ़िवादी सोच क्यों नहीं सुधरना चाहते लोग, क्यों अपनी सोच को इरादों को मजबूत नहीं करते?

क्यों बदलना नहीं चाहते? क्यों नहीं चाहते की देश में मानते की भागीदार महिला भी उतनी ही है जितने पुरुष, पर नहीं कौन समझाए कि अगर इतिहास के पन्नों को भी घुमा कर देखो उसमें रानी लक्ष्मीबाई प्रभावती गुप्ता जैसी कई महिलाओं का नाम मिलेगा जिन्होंने हमें गर्व महसूस करने पर मजबूर किया है ।इसके अलावा आधुनिक भारत में कल्पना चावला जैसी महिलाएं भी शामिल है ।और क्यों ना हो !

क्या कमी है महिलाओं में जो सशक्त ना हो यह तो बस सोच बनी हुई है इस देश की इस देश के लोगों की महिलाओं को बस चूल्हा चौका और बच्चे संभालने का काम है शर्म आनी चाहिए ऐसे देश के लोगों को ऐसी सोच रखने वाले लोगों को इतना तो ठीक है अब हम आते हैं रेप के मामलों पर बलात्कार के मामलों पर वहां देखें तो हर रोज एक नया वाक्य हर रोज नया कुछ ना कुछ क्या है यह सब क्या कह सकते हैं क्यों महिला सुरक्षित नहीं है क्यों समझाया जाता है बेटियों को कि ऐसे कपड़े ना पहने ऐसे घर से बाहर मत निकलो इतनी रात को मत जाओ घर से बाहर जाना है

तो भाई को लेकर जाओ अरे बेटों को समझाओ उन्हें बताओ कि किसी पराई लड़की को खराब नियत से ना देखो इज्जत करो क्यों नहीं समझाया जाता कि जैसे तुम्हारी बहन है अपने घर में वैसे ही वह भी कोई दूसरे दूसरे की बहन है क्यों किसी लड़के को नहीं समझा जाता कि तुम्हारी पत्नी तुम्हारे लिए अपना सब कुछ त्याग कर आइ है अपना बसाया बसाया संसार छोड़ कर आइ है क्यों नहीं समझाया जाता कौन है

इसका कारण परिवार या परिवार के संस्कार नहीं समाज की रूढ़िवादी सोच जिसने शुरू से अभी तक बस यही सिखाया है की लड़कियों की तरह रो मत लड़कियों की तरह बातें मत करो लड़कियों की तरह कमजोर मत बनो अरे किसने चीज का प्रूफ दिया की लड़कियां कमजोर है रोती है जरा किसी लड़के को कहिए जनाब स्थिति में इस देश में नारी अजी रही है उस स्थिति में जी के बताएं तब मानेंगे कौन मजबूत है और कौन कमजोर बाकी तो समझदार है इसी से समझ जाएंगे इतना ही कहना है महिलाओं की इज्जत करो उन्हें भी सम्मान दो क्योंकि बचपन से लेकर अभी तक सिर्फ उन्होंने ही तुम्हें संभाला है जन्म देने वाली भी वही है पालने वाली भी वही है साथ देने वाली भी वही है और अब वह समय दूर नहीं कि बीमार होने पर हॉस्पिटल में डॉक्टर ही मिले so just respect her becoz she is legend and will be….
-by megha

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