ई-टेंडर घोटाले मे आई.ए.एस.अधिकारी की बेटी की संदिग्ध भूमिका..!

भोपाल. मध्यप्रदेश के ई-टेंडर घोटाले में आला अधिकारियों की भूमिका सामने आने लगी हैं जांच में सामने आयो एक तथ्य के अनुसार जिस मेंटाना कंपनी को सर्वाधिक आर्डर दिये गये वह सिर्फ इसलिए क्योंकि मप्र कॉडर के एक आईएएस अधिकारी की बेटी दिल्ली में उस कंपनी में सलाहकार के पद पर कार्यरत थी जिससे कंपनी रहने के लिये बंगला दिया हैं। जानकारी के अनुसार मेंटाना कंपनी की गतिविधियों को बारीकी से पड़़ताल चल रही है इस कंपनी को बेजा लाभ पहुंचाने के प्रयासों में उक्त अधिकारी और उनके विभाग की क्या भूमिका रही है इसका पूरा खुलासा कुछ दिन में हो जाएगा। जांच अधिकारी कंपनी के कर्ताधर्ताओं को सघन पूछताछ के दायरे में लेने जा रहे है।
पूरा खेल बड़े अधिकारियों की ही जानकारी में किया
ऐसा बताया जाता है कि पूरा खेल बड़े अधिकारियों की ही जानकारी में किया जा रहा था लेकिन जब पोल खुलीं तो कुछ अधिकारी स्वयं को ही व्हिसलब्लोअर बताने की कोशिश करने लगे। इसी तरह वर्ष 2007 में भी विप्रो और नेक्स्ट टेंडर के संबंध में एक शिकायत शासन को प्राप्त हुई थी तब मुख्यमंत्री के तत्कालीन प्रमुख सचिव इकबाल सिंह बैंस ने इसे मैप आईटी को भेजा था इसकी पड़ताल तत्कालीन एमडी अनुराग श्रीवास्तव ने की तथा दोनों कंपनी को क्लीन चिट दे डाली इसके बाद वर्ष 2014 में एंट्रेस और ओस्मो की शिकायत आई तो भी तत्कालीन एमडी मनीष रस्तोगी ने इसे क्लीन चिट दे दी। जानकारी के अनुसार जांच एजेंसी इस तरह के खुलासों से भौंचके है अब हर अधिकारी पूछताछ में यह साबित करने की कोशिश में है कि पूरा भांडाफोड़ उसी ने किया है जबकि इसके पीछे यह तथ्य सामने आ रहा है कि अधिकारियों ने कंपनी के जरिये अपनों को उपकृत करने के अलावा माल काटने के भी पूरे जतन किये है। इसमें ग्वालियर के अधिकारी भी शामिल हैं।

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