अब आर्टिफीसियल इंटेलीजेंस से बीमारीयों का पता लगाया जायेगा …

बीमारियों की रोकथाम के लिए कई बार बदलाव बहुत ज़रूरी हो जाते हैं. जैसे कि डेंगू की बीमारी. हम तमाम कोशिशों के बावजूद इससे होने वाली मौतों को पूरी तरह रोक नहीं पाए हैं.

रोकथाम के लिए ज़रूरी है कि हमें पहले से पता हो जाए कि डेंगू कहां अपने पंजे मारने वाला है.डेंगू एक ऐसी ख़तरनाक बीमारी है, जो मच्छरों की वजह से फ़ैलती है. इस बीमारी के वायरस मच्छर के काटने की वजह से इंसान के शरीर में घुस जाते हैं और क़हर बरपाते हैं.

नासा के कार्यक्रम से लौटने के बाद रेनियर ने एक आर्टिफ़िशियल इंटेलिजेंस का एल्गोरिद्म तैयार किया. ये मशीनी आंकड़ा लोगों की सेहत, उनकी रिहाइश और आस-पास के माहौल की जानकारी का है. इस एल्गोरिद्म में लोगों की सामाजिक-आर्थिक स्थिति का ब्यौरा भी शामिल है.

इसकी मदद से किसी बीमारी के फैलाव का अनुमान लगाया जाता है. इसकी मदद से रेनियर और उनकी टीम ने अब तक 100 बार बिमारियों की भविष्यवाणियां की हैं. इनमें से 88 सही साबित हुईं.

इस कामयाब तजुर्बे के बाद रेनियर की संस्था को काफ़ी मदद मिली. इसके बाद एआईएमई की टीम को ब्राज़ील जाने का मौक़ा मिला. जहां के आंकड़ों की मदद से उन्होंने बीमारियों के फैलाव की 85 फ़ीसद भविष्यवाणी करने में कामयाबी मिली.

रेनियर कहते हैं कि उनके तैयार किए हुए एल्गोरिद्म ने बीमारियों की सटीक भविष्यवाणी से जता दिया है कि ये बहुत कारगर है. हम बीमारियों के विस्तार को रोकने के लिए इसका इस्तेमाल कर सकते हैं. इसके लिए हमें आंकड़े जुटाने होंगे.

    'No new videos.'

Leave a Reply

Your email address will not be published.