पश्चिम बंगाल में मोदी का केवल शोर है या सच

जनता की ओर से अच्छी प्रतिक्रिया मिलने पर ममता स्टेज पर एक छोर से दूसरी छोर तक हाथ में माइक पकड़े चलती हैं और कहती हैं, “मैं दो मिनट ख़ामोश रहती हूँ, आप ज़ोर से बोलो, चौकीदार…”

भीड़ में ‘चोर है’ की आवाज़ दो मिनट तक गूँजती रहती है.

पश्चिम बंगाल में लोकसभा चुनाव के आख़िरी दौर का चुनावी माहौल काफ़ी गर्म है. यहाँ तृणमूल कांग्रेस और दूसरी पार्टियों की रैलियां हर जगह हो रही हैं.

लेकिन तृणमूल कांग्रेस की नेता और मुख्यमंत्री ममता बनर्जी सबसे अधिक रैलियां और रोड शो कर रही हैं.

विशेषज्ञों के अनुसार वह जिस तरह से नरेंद्र मोदी पर प्रहार कर रही हैं उससे साफ़ ज़ाहिर है कि वह भाजपा से परेशान हैं.

हर रैली में ममता बनर्जी चौकीदार वाले नारे को दोहराती हैं.

ये आम चुनाव का आख़िरी दौर है. आख़िरी चरण में पश्चिम बंगाल की नौ सीटों के लिए ममता बनर्जी पूरा ज़ोर लगा रही हैं.

वह हर दिन तीन से चार चुनावी सभाएं और रोड शो करती हैं. मुख्यमंत्री अपने हर भाषण में रफ़ाल, नोटबंदी, बेरोज़गारी और जीएसटी जैसे मुद्दे उठाती हैं.

वो नरेंद्र मोदी और भाजपा पर समाज को बाँटने का इल्ज़ाम भी लगाती हैं. उनके समर्थकों में उत्साह है.

रैलियों में आए लोग उनकी हर बात से सहमत नज़र आते हैं और अपने नेता की आवाज़ में आवाज़ मिलाते हैं.

एक 27 वर्षीय युवा ने कहा, “ममता दीदी ने उनके स्कूल जाने वाली लड़कियों को साइकिल दी है. हमें चावल मिलता है. हमारे गाँव तक आने वाली सड़क बना दी गई. हमारा जीवन सुखी है. सीपीएम राज में हम ग़रीबी से दुखी रहते थे.”

आदमपुर से लगे एक और छोटे से गाँव के बाहर मेन रोड पर कुछ मुसलमान बैठे बातचीत कर रहे थे. वो एक आवाज़ में ममता बनर्जी के पक्ष में बोलते हैं.

मैंने पूछा कि कुछ लोग कहते हैं कि ममता पश्चिम बंगाल के 30 प्रतिशत मुसलमानों को वोट बैंक की तरह इस्तेमाल कर रही हैं तो वहाँ बैठे मोहम्मद बशीर मुल्ला, जो एक ज़माने में सीपीएम के समर्थक थे, कहते हैं दीदी ने उनके समुदाय को सुरक्षा और सम्मान दिया है.

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