भावनाओ को शब्दों के मोतियों से पिरोते है, पत्रकार,कवि श्री पंकज दीक्षित

अनुष्का के द्वारा

तकरीबन बीस वर्षो से पत्रकारिता के क्षेत्र से जुड़े रहे पंकज दीक्षित इन दिनों सोशल मीडिया में कवि के रूप में जाने पहचाने शख्स बन गए है l सोशल मीडिया में “क्या पापा कहलाऊँगा ” पर लिखी कविता काफी पसंद की जा रही है l यदि हिंदी के समकालीन कवियों के बारे में बात करे तो कवि पंकज ने रिश्तो  और भावनाओ को बड़े ही मार्मिक ढंग से अपनी कविताओ में पिरोया है l

कवि पंकज कहते है वर्तमान के दौर में युवा अपनी संस्कृति और रिश्तो की महत्वता को भूलता जा रहा है, मै अपनी कविताओ के माध्यम से उनमे ये भावना जाग्रत करना चाहता हूँ l मेरी ये कोशिश है कि मेरी कविताओ के द्वारा हमारे देश के यूवाओ में रिश्तो की संवेदना जागे, ताकि वो

मानसिक अवसाद से बाहर निकल सके, चूकि आजकल युवा अपनी भावनाओ को किसी से अभिव्यक्त नहीं करते इसलिए मन ही मन वो विचलित होते रहते है और अकेलेपन के शिकार हो जाते है , इस का कारण सिर्फ रिश्तो की महत्वता से अनिभिज्ञ होना है l

इसके अलवा भी कवि पंकज दीक्षित ने कई कविताये लिखी है l हाल ही में इनकी एक किताब आने वाली है जिसमे बहुत सी मार्मिक कवितावों को पंक्तिबद्ध किया गया है l उम्मीद है पाठको को ये किताब पसंद आये l

 

 

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