डेली कॉलेज के संविधान का व बोर्ड मीटिंग के नियमों का उलंघन है-राज्यवर्धन सिंह

डेली कॉलेज के ODA व न्यू डोनर श्रेणीयों के चुनाव संपन्न होने के बाद कल शाम 5 बजे संपूर्ण बोर्ड की पहली मीटिंग होनी तय हुई थी। मैं व अन्य सभी मेम्बर समय से वहाँ पहुँच गए थे। मीटिंग शुरू होने से पूर्व ही श्री धीरज लुल्ला मेरे पास आए और बोले कि तय हो चुका है कि श्री नरेन्द्र झाबुआ को अध्यक्ष, श्री विक्रम पंवार को उपाध्यक्ष और पालक श्रेणी से श्री जय झाबुआ व श्री सुमित चंडोक को मनोनित किया जाएगा। मैंने कहा कि अभी तो मीटिंग शुरू भी नहीं हुई है तो बगैर सभी मेम्बरान के मत और आपत्तियां सुने आप ऐसा निश्चित करने वाले कौन होते हैं। ये डेली कॉलेज के संविधान का व बोर्ड मीटिंग के नियमों का उलंघन है। श्री धीरज लुल्ला ने जवाब दिया कि वे स्वयं, श्री हरपाल (मोनू) भाटिया, श्री विक्रम पंवार, व श्री नरेन्द्र झाबुआ ये आपस में निर्धारित कर चुके हैं और इस तरह उनका बाकी तीन मेम्बरों पर चार का बहुमत है। मैंने आपत्ति ली कि बहुमत और अल्पमत का फैसला मीटिंग में सबके मत और आपत्तियां सुन कर लिया जाता है, न कि मीटिंग शुरू होने से पहले। इस पर श्री धीरज लुल्ला व श्री नरेन्द्र झाबुआ ज़ोर ज़ोर से चिल्लाने लगे कि यही तय हो चुका है और इसके अतिरिक्त कोई चर्चा नहीं होगी। इसके पश्चात मैंने मीटिंग का बहिष्कार किया व मैं प्रिंसिपल के ऑफिस में चला गया। अन्य मेम्बर मुझे बुलाने भी आए पर मैंने स्पष्ट कर दिया कि जब तक मुझे इस बात के लिए आश्वस्त नहीं किया जाता है कि समस्त मुद्दों पर वार्तालाप होगा व समस्त मेम्बरों को विश्वास में ले कर ही कोई भी फैसला लिया जाएगा, मैं मीटिंग में शरीक नहीं होऊंगा। इस पर फ़िर मुझे यही कहा गया कि होगा तो यही आप चाहे आओ या न आओ। इसी अलोकतांत्रिक व दादागिरी भरे रवैये के विरोध में मैंने बोर्ड मीटिंग का बहिष्कार किया, और बोर्ड द्वारा मीडिया को ऐसा बताना कि मैं मीटिंग में अनुपस्थित था असत्य व भ्रामक दुष्प्रचार है। कल डेली कॉलेज के इतिहास का वो काला दिन था जब लोकतंत्र की हत्या की गई।

    'No new videos.'

Leave a Reply

Your email address will not be published.