कलेक्टर मनीष सिंह ने डॉक्टर गाडरिया के अच्छे कार्य के लिए सार्वजनिक रूप से की थी प्रशंसा…

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बात आज से 5 माह पहले दिसंबर 2020 की है जब पूर्व सीएमएचओ प्रवीण जड़िया के अस्वस्थ होने पर कलेक्टर मनीष सिंह ने सीएमएचओ की जिम्मेदारी इन्ही डॉ पूर्णिमा गाडरिया को दी थी। काम संभालते हुए उन्हें 20 से 25 दिन ही हुए थे की कलेक्टर मनीष सिंह ने सार्वजनिक तौर पर डॉक्टर गाडरिया के काम की तारीफ करते हुए मीडिया के साथियों को भी कहा था कि मैडम बहुत अच्छा काम कर रही हैं उन्होंने स्वास्थ्य विभाग की जिम्मेदारी गंभीरता से संभाल ली है इनके काम से मैं इतना निश्चिंत हूं कि मुझे स्वास्थ्य विभाग की अब जरा भी चिंता नहीं ।आप लोग मैडम के काम के बारे में भी खबरें लिखा करें।
जब अच्छे काम के लिए कलेक्टर मनीष सिंह ने मैडम की तारीफ़ की और उनका सम्मान बढ़ाया तो फिर ग्रामीण क्षेत्र के फीवर क्लीनिक पर किट वितरण नहीं होने की चूक को लेकर कलेक्टर सिंह को नाराजगी जताने के भी अधिकार भी नहीं है क्या। इस बात पर आंदोलन खड़ा करना क्या न्याय संगत है ? वह भी ऐसे समय में जब इंदौर शहर कोरोना संक्रमण पर जीत हासिल करने की ओर लगातार बढ़ रहा है।

इस समय कलेक्टर सिंह की डांट को अपमान बताकर चिकित्सकों को अपने धर्म से क्यों विरक्त किया जा रहा है। क्या यह इंदौरवासियों को कोरोना के भीषण संकट में डालने का अपराध नहीं है ? इसके पीछे मोहरा डॉक्टर गाडरिया को बनाया जा रहा है। लेकिन कलेक्टर मनीष सिंह की कार्यशैली से स्वास्थ्य विभाग के ऐसे अफसर, चिकित्सक और कई हॉस्पिटल संचालक जो काम में अब तक लापरवाही करते आए हैं उनके मंसूबे पूरे नहीं हो पा रहे हैं इसीलिए डॉ गड़रिया को मोहरा बनाया जा रहा है जिनकी प्रशंसा कलेक्टर हमेशा करते रहें है। इस तरह के लोग संकट की इस घड़ी का फायदा अपने लाभ के लिए लेना चाहते हैं। लेकिन इतना जरूर है कि अगर किसी विभाग अथवा जिले का मुखिया आपके काम की तारीफ करता है तो वह लापरवाही करने पर फटकार लगाने का अधिकार भी रखता है। जिसकी सीख की शुरुआत व्यक्ति को उसके परिवार से मिलती है, और कार्यस्थल पर इसका पालन किया जाता है।

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