कोरियन ड्रामा की दुनिया में बढ़ती लत :स्क्विड गेम

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स्क्विड गेम का मशहूर होना, पश्चिमी देशों में हाल के सालों में आई ‘कोरियन सभ्यता की सूनामी’ का एक हिस्सा है. के-पॉप के आर्टिस्ट बीटीएस और ब्लैकपिन्क म्यूज़िक जगत में बड़ा नाम बन गए हैं. फ़िल्मों की बात करें तो पैरासाइट और मिनारी को हॉलीवुड की फ़िल्मों जैसी पहचान के साथ ऑस्कर सम्मान भी मिले. स्क्विड गेम इसी ट्रेंड की अगली कड़ी है.

ऐसा लगता है कि इस के-ड्रामा को रातों-रात सफलता मिल गई है, लेकिन ऐसा नहीं है. दुनियाभर के दर्शकों पर इनका जादू अभी चला है, लेकिन के-ड्रामा एशिया में दशकों के प्रचलित रहे हैं.

90 के दशक में बाज़ार के खुलने के साथ ही इंटरटेनमेंट इंडस्ट्री में बहुत पैसे आने शुरू हुए. जापान गिरती अर्थव्यवस्था से लड़ने लगा तो चीन की अर्थव्यवस्था बढ़ने लगी. दक्षिण कोरिया की सभ्यता को भी पहचान मिलनी शुरू हुई. अमेरिकी प्रोग्राम की तुलना में दर्शक के-ड्रामा से अधिक जुड़ा हुआ महसूस करने लगे, ये चीनी संस्कृति और सभ्यता के भी अधिक क़रीब थे.

अगले एक दशक में इन्होंने जापानी वर्चस्व को भी चुनौती दी. साल 2003 में कोरियन ड्रामा विंटर सोनाटा को जापान के 20 प्रतिशत दर्शकों ने देखा. कोरियन कल्चर एंड इंफ़ॉरमेशन सर्विस की 2011 की एक रिपोर्ट के मुताबिक, “कई एशियाई देशों में कोरियन ड्रामा वहां के रहन-सहन और ख़रीदारी पर प्रभाव डाल रहा है जो कि सभ्यता की अपील के बारे में बताता है.”

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