ज़िंदगी में जो पसंद नहीं आया वो कभी नहीं किया -पीयूष मिश्रा

0
175

यह कहना फ़िज़ूल है कि अब acting आसान हो गई है अच्छी acting के लिए ऑब्जर्वेशन ज़रूरी है l

actor के लिए acting ज़रूरी है talent hunt और भी reality show आपको acting नहीं सिखा सकते हैं वो सिर्फ़ अंदर से आती है मोटी fees भरने के बाद भी इसे सिखा नहीं जा सकताl

मैं ये भी नहीं मानता कि कोई किरदार गहरी छाप छोड़ देता है हर किरदार film ख़त्म होने के बाद actor की ज़िंदगी से ख़त्म हो जाता है हाँ लोग publicity के लिए ज़रूर अपने किरदार से जुड़े क़िस्से साझा करते रहते हैंl

उन्होंने कहा dead and talk में आपके pass सीमित समय होता हैबीस minute का समय हर स्पीकर को मिलता है मैं आज अपनी ताज़ी कविता तुम मेरी जान हो रज़िया बी…..सु सुनाऊँगा ये कविता एक वेश्या के साथ मेरी बातचीत है

    'No new videos.'