जब श्री अटल बिहारी वाजपेयी ने सर संघचालक देवरसजी मांग रखी कि संघ हिंदू की जगह भारतीय शब्द का प्रयोग करेकहा

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अटल बिहारी वाजपेयी ने तत्कालीन सर संघचालक बाला साहब देवरस के सामने एक और मांग रखी. उनकी मांग थी कि संघ हिंदू की जगह भारतीय शब्द का प्रयोग करे. उनकी मांग पर देवरस ने कहा कि भारतीय शब्द है तो बहुत अच्छा, लेकिन हिंदू बोलने में हीनता का बोध क्यों?

जनसंघ से बरास्ते जनता पार्टी बनी भाजपा ने पहली बार कायिक (आर्गेनिक) विकास के साथ अजैव (इनआर्गेनिक) विकास का रास्ता स्वीकार किया. नतीजा यह हुआ कि एमसी छागला, शांति भूषण, राम जेठमलानी, सिकंदर बख्त, सुषमा स्वराज और जसवंत सिंह जैसे बहुत से नेता पार्टी में शरीक़ हुए जिनकी पृष्ठभूमि राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ की नहीं थी.

अंधेरा छंटेगा, सूरज निकलेगा, कमल खिलेगा’- आज से सैंतीस साल पहले भारतीय जनता पार्टी के स्थापना दिवस अधिवेशन को संबोधित करते हुए अटल बिहारी वाजपेयी का यह आखिरी उद्घोष था.

कमल तो खिला पर उसे खिलाने वालों का राजनीतिक जीवन अस्ताचल की ओर है. एक नया नेतृत्व पार्टी को एक के बाद एक चुनावी जीत दिला रहा है.

शारीरिक रूप से अशक्त और 2005 से सक्रिय राजनीति से दूर होने के बावजूद अटल बिहारी वाजपेयी दोनों पीढ़ियों के बीच सेतु बन हुए हैं. अशक्त वाजपेयी भी पुरानी पीढ़ी के सबसे सशक्त व्यक्तित्व हैं.

जनता पार्टी से अलग होकर भारतीय जनता पार्टी का गठन करते हुए वाजपेयी ने पार्टी की वैचारिक दिशा बदलने के लिए राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ को राज़ी कर लिया था. इसलिए नवगठित भाजपा ने गांधीवादी समाजवाद को अपनी विचारधारा के रूप में स्वीकार किया.

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