कनाडा की डोना स्ट्रिकलैंड नोबल अवॉर्ड जीतने वाली तीसरी महिला..!!

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डॉक्टर अश्किन ने ऑप्टिकल ट्वीज़र्स नाम की ऐसी लेज़र तकनीकी विकसित की है जो जीव विज्ञान से जुड़ी प्रणालियों के अध्ययन में इस्तेमाल की जा रही है. भौतिकी में 55 साल बाद किसी महिला वैज्ञानिक को नोबेल पुरस्कार मिला है.

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डॉक्टर मरू और स्ट्रिकलैंड ने बेहद छोटी मगर तेज़ लेज़र पल्स बनाने में योगदान दिया है.

उन्होंने चर्प्ड पल्स एंप्लिफ़िकेशन (सीपीए) नाम की तकनीक विकसित की है. अब इस तकनीक का इस्तेमाल कैंसर के इलाज और आंखों की सर्जरी में होता है.

कनाडा की वॉटरलू यूनिवर्सिटी की डॉक्टर स्ट्रिकलैंड ने पुरस्कार मिलने के बाद कहा, “पहले तो मुझे यक़ीन ही नहीं हुआ. जहां तक जेरार्ड से इसे साझा करने की बात है, वह मेरे सुपरवाइज़र थे और उन्होंने सीपीए को नई ऊंचाई दी है. वह इस अवॉर्ड के हक़दार हैं. मैं ख़ुश हूं कि अश्किन को भी यह अवॉर्ड मिला.

“डॉक्टर स्ट्रिकलैंड ने कहा कि यह जानना उनके लिए हैरानी भरा था कि इतने समय से किसी महिला को नोबेल पुरस्कार नहीं मिला था. हालांकि उन्होंने कहा कि ‘हमेशा उनके साथ बराबरी का व्यवहार किया गया है’ और ‘उनके साथ यह अवॉर्ड जीतने वाले पुरुष भी इसके बराबर के हक़दार हैं.’

कनाडा की डोना स्ट्रिकलैंड यह अवॉर्ड जीतने वाली तीसरी महिला हैं. उनसे पहले मैरी क्यूरी को 1903 और मारिया गोपर्ट-मेयर ने 1963 में भौतिकी का नोबेल जीता था.

इस साल डॉक्टर स्ट्रिकलैंड इस पुरस्कार को अमरीका के अर्थर अश्किन और फ़्रांस के जेरार्ड मरू के साथ साझा कर रही हैं.

यह पुरस्कार उन्हें लेज़र फ़िज़िक्स के क्षेत्र में खोज के लिए मिला है.

विजेताओं को नब्बे लाख स्वीडिश क्रोनोर यानी लगभग सात करोड़ 32 लाख रुपये मिलते हैं.

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