ऑनलाइन स्ट्रीमिंग का वो जिन्न जो आंखों के रास्ते आपको जकड़ लेगा

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‘तू पाब्लो एस्कोबार को जानता है? क्या यार! नेटफ्लिक्स पर ‘नारकोस’ देख न. एक बार देखने बैठेगा न तो पूरा देखकर ही उठेगा.’

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ऐसी बातें शायद आपने कहीं न कहीं सुनी होंगी. ‘पूरा देखकर ही उठेंगे लत अब तेजी से उन लोगों में फ़ैल रही है जो धीरे-धीरे वर्चुअल दुनिया के क़रीब और इंसानों और मनोरंजन के पुराने तरीकों से दूर होते जा रहे हैं.

वर्चुअल यानी आभासी दुनिया जो आपको एक ऐसी जगह ले जाती है जिसका हक़ीक़त से नाता नहीं होता. मगर आपको वहां असल दुनिया से ज़्यादा सुख मिलता है. मोबाइल, लैपटॉप से लेकर टीवी की स्क्रीन को देखते रहने की लत भी इसी पेड़ की ऐसी शाखा है जिसमें आज की पीढ़ी झूला डालकर झूल रही है और खुश हो रही है.

बंगलुरु में 23 साल का एक लड़का ऑनलाइन स्ट्रीमिंग वेबसाइट की लत का ऐसा शिकार हुआ कि अब उसका वक़्त नेटफ्लिक्स, अमेजॉन, यू-ट्यूब सिरीज़ या वीडियो गेम में नहीं इलाज करवाने में बीत रहा है.

इस लड़के का इलाज नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ मेंटल हेल्थ एंड न्यूरोसाइंसेस (NIMHANS) में बीते दो हफ़्तों से चल रहा है. ये लड़का दिन-रात नेटफ्लिक्स में कुछ न कुछ देखता रहता था. वजह- असल ज़िंदगी की परेशानियों से दूर रहना और वर्चुअल सुख को सच मानना.

ऑनलाइन स्ट्रीमिंग वेबसाइट्स की एक बड़ी लत असल ज़िंदगी की परेशानियों से ध्यान हटाना भी होती है. असल ज़िंदगी की परेशानियां जैसे….

  • अच्छी नौकरी
  • पढ़ाई में अच्छा न कर पाना
  • किसी और वजह से मानसिक तनाव

ऐसे में इन परेशानियों से ध्यान हटाने के लिए भी लोग अब ऑनलाइन स्ट्रीमिंग वेबसाइट्स की तरफ बढ़ रहे हैं.

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