मध्यप्रदेश चुनाव में मतदाता चुप है , न उनका ख़म निकलता है, न हमारा दम निकलता है..

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सबके के अपने-अपने दावे है, अपना-अपना अंदाज़ l बीजेपी वाले जंहा विकास की गंगा में पवित्रता की डूब लगाने की बात करते है, वही कांग्रेसी झूठी लुटिया में भ्रष्टाचार का पानी उड़ेलने की बात कहते हैl

मतदाता की अपनी पीड़ा है, जिसे वो किसी को नहीं बताना चाहता हैl सब उलझे हुए है, कोई ख़म ठोकता है, कोई दम भरता है, हा पर हार-जीत के आकड़ो से सब दूर है,ये जनता है सब जानती है l

कुछ क्षेत्रो में विकास का मुददा गम सा हो गया है, वह पर मतदाताओ ने व्यक्तिगत व्यवहार पर मुददा बना लिया है की वर्तमान विधायक ने उस बूढी अम्मा को ये कह दिया था l

आने वाले दिनों में उत किस करवट बैठेगा कहना मुश्किल है l

 

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