फ़िरोज़ गाँधी का अंतिम संस्कार हिंदू रीतिरिवाजों से किया गया,राजीव गांधी ने चिता को आग लगाई

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16 साल के राजीव गांधी ने फ़िरोज़ की चिता को आग लगाई. उनका अंतिम संस्कार हिंदू रीतिरिवाजों से किया गया.
जब फ़िरोज़ को पहली बार दिल का दौरा पड़ा था तभी उन्होंने अपने दोस्तों से कह दिया था कि वो हिंदू तरीकों से अपनी अंतयेष्टि करवाना पसंद करेंगे, क्योंकि उन्हें अंतिम संस्कार का पारसी तरीका पसंद नहीं था जिसमें शव को चीलों के लिए खाने के लिए छोड़ दिया जाता है.
फ़िरोज़ गांधी के अस्थि कलश को एक ट्रेन से इलाहाबाद ले जाया गया था, जहाँ उसका एक भाग संगम में प्रवाहित कर दिया गया और बचे हुए भाग को इलाहाबाद की पारसी क़ब्रगाह में दफ़ना दिया गया.
 
फ़िरोज़ के अंतिम संस्कार में इंदिरा ने सफ़ेद साड़ी पहनी थी, जैसा कि आमतौर से हिंदू विधवाएं पहनती हैं. भारत में सफ़ेद रंग को शोक का रंग माना जाता है. लेकिन फ़िरोज़ के देहावसान के कई सालों बाद तक इंदिरा सफ़ेद रंग के कपड़े पहनती रहीं. इसलिए नहीं कि ऐसा विधवा महिलाएं करती हैं, बल्कि इसलिए कि उनके शब्दों में, ‘जब फ़िरोज़ ऊपर गए, तो मेरी ज़िंदगी में सारे रंग भी मेरा साथ छोड़ गए.’

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