उर्दू के जाविदां शायर मिर्ज़ा असदुल्लाह बेग ख़ान ग़ालिब ने आज ही दुनिया को अलविदा कहा –

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उर्दू के जाविदां शायर मिर्ज़ा असदुल्लाह बेग ख़ान ग़ालिब ने आज ही दुनिया को अलविदा कहा था. उर्फ़-ए-आम में जो मिर्ज़ा ग़ालिब या चचा ग़ालिब के नाम से मशहूर हैं.

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ग़ालिब के बारे में प्रोफ़ेसर मलिकज़ादा मंज़ूर अहमद कहा करते थे कि शायरी अलग रही, ग़ालिब को तख़ल्लुस के मामले में भी तमाम शायरों पर सबकत हासिल है. ‘ग़ालिब’ ये तख़ल्लुस मिर्ज़ा की शायरों को सचमुच ज़ेब देता है, उसके मिज़ाज की तर्जुमानी करता है.

विडम्बना है कि ग़ालिब की पैदाइश उनके ननिहाल आगरा में एक दौलतमंद ख़ानदान में हुई, उनकी शादी दिल्ली के और ज़्यादा दौलतमंद ख़ानदान की लड़की से हुई मगर होशमंद होने के बाद फिक्र-ए-माश का साया ग़ालिब पर बराबर बना रहा. जिन्दगी मुश्क़िल से मुश्क़िलतर होती रही मगर ग़ालिब ने उम्मीद और काविश का दामन न छोड़ा.

अंदर और बाहर की जद्दोजहद के बीच ग़ालिब की शायरी और लतीफ़े दोनो सैर-ए-जहां करते रहे.

मजाज़ की तरह ग़ालिब की हाज़िर-जवाबी और बज़लासंजी भी मुश्क़िल से मुश्क़िल वक़्त में, यहां तक कि बिस्तर-ए-मर्ग़ पर भी क़ायम रहीl

आख़िरी दिनों में जब तबीयत बहुत बिगड़ती तो अपनी मौत की आरज़ू में मरने की मुकर्रर करते थे. उन दिनों शायरों में ये आम चलन था.

एक बार ऐसा ही कर रहे थे तो किसी ने कहा कि इंशा-अल्लाह ये तारीख़ भी ग़लत साबित होगी.

इस पर ग़ालिब ने अपने मख़सूस अंदाज़ में कहा- ”देखो औल-फौल न बको. ये तारीख़ ग़लत हुई तो मैं सर फोड़ कर मर जाऊंगा.”

आख़िरी वक़्त में दिल्ली में ज़बरदस्त महामारी फैली. उनके चहेते शागिर्द मजरूह ने अपने एक ख़त में इसकी बड़ी मार्मिक तफ़्सील लिखी तो ग़ालिब ने तंज़ भरे लहजे में जवाब लिखा- ”भई कैसी वबा? जब सत्तर बरस के बुड्ढे-बुढ़िया को न मार सकी.”

आख़िरी दिनों में ग़ालिब के जिस्म में शदीद दर्द रहता था और वो बिस्तर पर लेटे रहते थे. उठने की सकत नहीं थी. एक दिन दर्द से कराह रहे थे. मजरूह आए और देखा तो उनके पैर दबाने लगे.

ग़ालिब ने उन्हें ऐसा करने से मना किया तो मजरूह बोले, ‘आपको बुरा लग रहा है तो आप मुझे पैर दबाने की मज़दूरी दे दीजिएगा.’ इस पर ग़ालिब ने कहा, ‘ठीक है.’

पैर दबाने के बाद जब मजरूह ने अपनी मज़दूरी मांगी तो ग़ालिब दर्द के बावजूद हंसते हुए बोले- ”कैसी उजरत भाई. तुमने मेरे पांव दाबे, मैने तुम्हारे पैसे दाबे. हिसाब बराबर.”

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