Category Archives: Health

अस्पताल के लूट से कैसे बचे..!!

कानून जाने

अस्पताल में आपका परिजन भर्ती हो तो कुछ ऐसे क़ानून है जिनकी जानकारी आपको होनी चाहिए वरना आपको अस्पताल में परेशानी का सामना करना पड़ सकताl

उपभोक्ता संरक्षण अधिनियम

स्वास्थ्य सेवा के उपभोक्ता होने के नाते हम देश के उपभोक्ता संरक्षण अधिनियम (1986) क़ानून के तहत अपने अधिकार की लड़ाई लड़ सकते हैं. हालांकि हमारे देश में पेशेंट राइट नाम का कोई कानून नहीं है. लेकिन उपभोक्ता संरक्षण अधिनियम भी हमारे अधिकारों की सुरक्षा करने के लिए काफी है.

सूचना का अधिकार

मरीज़ के परिजन के पास दूसरा सबसे बड़ा हथियार होता है सूचना का अधिकार. इस कानून के तहत सबसे पहले हमे डॉक्टर और अस्पताल से ये जानने का अधिकार होता है कि मरीज़ पर किस तरह का उपचार चल रहा है, अस्पताल की जांच में क्या निकल कर सामने आया है, हर टेस्ट की क्या कीमत है, मरीज़ को जो दवाइयां दी जा रही है उनका असर कब और कितना हो रहा है.

अगर मरीज़ ये सब पूछने की स्थिति में नहीं है, तो अस्पताल में साथ रह रहे परिजन इसकी जानकारी अस्पताल प्रशासन से मांग सकते है, और इस जानकारी को हासिल करना हम सबका अधिकार है.

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आजमाए कैसे अजवाइन में है फायेदे ही फायेदे ….!

1. पेट की बीमारियों से छुटकारा 
अजवाइन पेट की कई बीमारियों का रामबाण इलाज है. इसका सेवन करने से पेट दर्द, गैस, उल्‍टी, खट्टी डकार और एसिडिटी में आराम मिलता है. अजवाइन, काला नमक और सूखे अदरक को पीसकर चूरन तैयार कर लें. खाना खाने के बाद इस चूरन का सेवन करने से खट्टी डकार और गैस की समस्‍या दूर हो जाती है. पेट खराब होने पर अजवाइन चबाएं. यही नहीं अगर डाइजेशन सही करना हो तो अजवाइन से बेहतर कुछ नहीं.

2. वजन घटाने में मददगार

अजवाइन वजन घटाने में भी काफी मददगार है. अजवाइन का पानी पीने से शरीर का मेटाबॉलिज्‍म बढ़ता है, जिससे चर्बी घटने लगती है. एक गिलास पानी में रात भर अजवाइन भ‍िगोकर रख दें. इसमें शहद मिलाकर खाली पेट पीने से जल्‍दी फायदा होता है. आप चाहें तो पानी में अजवाइन उबालकर भी पी सकते हैं.

3. सर्दी-जुकाम और खांसी में राहत 
अगर आपकी खांसी ठीक नहीं हो रही है तो अजवाइन का पानी बहुत फायदा करेगा. इसके लिए अजवाइन को पानी में मिलाकर उबाल नें. इसमें काला नमक मिलाकर पीने से आराम म‍िलेगा.  


4. गठिया 
अजवाइन से गठिया के रोग में भी आराम मिलता है. अजवाइन के चूरन की पोटली बनाकर घुटनों में सेंकने से फायदा होता है.आधा कप अजवाइन के रस में सौंठ मिलाकर पीने से भी गठिया का रोग ठीक हो जाता है.
5. दूर करे मसूड़ों की सूजन 
अगर मसूड़ों में सूजन हो तो गुनगुने पानी में अजवाइन के तेल की कुछ बूंदे डालकर कुल्‍ला करने से आराम मिलेगा.  इसके अलावा अजवाइन को भूनकर उसे पीसकर पाउडर बना लें. इससे ब्रश करने से मसूड़ों के दर्द और सूजन में राहत मिलती है. 

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स्मॉग में पहने मास्क और प्यूरीफायर लेकिन रखें जेब का भी ख़याल.!

स्मॉग शुरू होते ही कई ऑनलाइन शॉपिंग साइट्स पर एंटी पॉल्यूशन मास्क का प्रचार शुरू होने लगा है.

कई बड़े शहरों की रौनक आज स्मॉग में कहीं छिप सी गई है. जहां एक तरफ हवा में जहर फैला हुआ है, वहीं इससे निपटने के लिए के लिए नए-नए और अनोखे तरीके बताए जा रहे हैं. लेकिन बचने के तरीकों से कहीं ज्यादा लोगों को डराया भी जा रहा है. स्मॉग की आड़ में बिजनेस करने वालों की तादात लागातार बढ़ती ही जा रही है. इसके लिए महंगे एयर प्यूरीफायर से लेकर कई तरह के मास्क मार्केट में आ चुके हैं. आपके लिए इस खतरनाक स्मॉग से बचने के लिए यह जरूरी भी है, लेकिन आपके डर का फायदा उठाकर आपकों मंहगी चीज लेने के लिए कहा जाता है. जबकि जरूरी नहीं है कि आपको इतने मंहगे मास्क या फिर एयर प्यूरीफायर की जरूरत हो.

एंटी पल्यूशन मास्क
स्मॉग शुरू होते ही कई ऑनलाइन शॉपिंग साइट्स पर एंटी पॉल्यूशन मास्क का प्रचार शुरू होने लगा है. इसके लिए कई साइट्स की तरफ से भारी डिस्काउंट के साथ ऑफर भी दिए जा रहे हैं. इन मास्क की कीमत 100 रुपये से लेकर 5 हजार रुपये तक है. इसके बाद बताया जा रहा है कि सस्ते मास्क आपकी सेहत के लिए हानिकारक हैं. लेकिन ऐसा बिल्कुल भी नहीं है, किसी साधारण मास्क से भी आप डस्ट पार्टिकल से बच सकते हैं. लेकिन मास्क ऐसा लें जो काफी ढीला न हो.
एयर प्यूरिफायर कितना जरूरी
एयर प्यूरीफायर्स के नाम पर भी काफी ज्यादा लोगों की जेब खाली की जा रही है. 5 हजार से लेकर 25 से 30 हजार तक इन्हें बेचा जा रहा है. अपने परिवार की सुरक्षा के लिए लोग इसे खरीद रहे हैं. लेकिन क्या सभी के लिए यह प्यूरीफायर जरूरी है. प्यूरीफायर सिर्फ उन्हीं लोगों के लिए जरूरी है जिनका घर किसी ऐसे एरिया में है जहां प्रदूषण का लेवल बहुत ज्यादा है या फिर अगर आपके परिवार में किसी को सांस लेने की समस्या है तो भी आप इसे खरीद सकते हैं. लेकिन सभी को इसे लेना बिल्कुल भी अनिवार्य नहीं है.

कब है सुरक्षा की जरूरत
वैसे तो स्मॉग हमेशा ही खतरनाक होता है, जिससे कई तरह की बीमारियों का खतरा बना होता है. लेकिन डॉक्टर कहते हैं कि अगर हवा में कुछ गंध आए या फिर सांस लेने में दिक्कत हो तो यह प्रदूषण का खतरनाक लेवल होता है. जिससे बचना सभी के लिए काफी ज्यादा जरूरी है. ऐसे में बच्चों और बुजुर्गों को मास्क की सुरक्षा मिलना बेहद जरूरी है. एक अच्छा मास्क 100 रुपये तक मिल जाता है, जिसे आप अपने परिवार के लिए खरीद सकते हैं.

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कॉफी पीने से टल सकता है किडनी रोगियों को मौत का खतरा..!!

जो लोग सबसे ज्यादा कॉफी पीते हैं, उनके मरने का खतरा 24 फीसदी कम हो जाता है, जबकि कम मात्रा में कॉफी पीनेवालों की भी मौत का खतरा 12 फीसदी तक टल जाता है.

क्या आप लंबे समय तक जीना चाहते हैं? तो अपने कॉफी के कप को भर लें. एक अध्ययन के मुताबिक कैफीन के इस्तेमाल से क्रोनिक किडनी की बीमारी (सीकेडी) के मरीजों का भी जीवनकाल बढ़ सकता है. इस अध्ययन के निष्कर्षो में बताया गया कि कैफीन और मृत्यों के कारणों के बीच एक संबंध है. जो लोग सबसे ज्यादा कॉफी पीते हैं, उनके मरने का खतरा 24 फीसदी कम हो जाता है, जबकि कम मात्रा में कॉफी पीनेवालों की भी मौत का खतरा 12 फीसदी तक टल जाता है.

पोर्टुगल के सेंट्रो हॉस्पीटलर लिस्बोआ नोर्टे के मिगुअलल बिगोट्टे विइरा ने कहा कि इस अध्ययन के निष्कर्षो से पता चलता है कि सीकेडी के मरीजों के ज्यादा कॉफी पीने से उनकी मौत का खतरा कम हो सकता है. यह एक आसान क्लिनिकली प्रमाणित और सस्ता विकल्प हो सकता है. विइरा कहते हैं कि इसकी अभी रैंडमाइज्ड क्लिनिकल ट्रायल में पुष्टि की जानी चाहिए.

शोधदल ने सीकेडी पीड़ित 2328 मरीजों का अध्ययन कर यह निष्कर्ष निकाला है. इस न्यू ऑरलैंस में चल रहे एएसएन किडनी सप्ताह में प्रदर्शित किया जाएगा.

विइरा ने जोर देकर कहा कि इसके अलावा, यह अवलोकन अध्ययन यह साबित नहीं कर सकता कि कैफीन सीकेडी के मरीजों में मृत्यु के जोखिम को कम करता है, लेकिन केवल इस तरह के सुरक्षात्मक प्रभाव की संभावना का सुझाव देता है. अमेरिकन केमिकल सोसायटी में रिपोर्ट में बताया गया है कि कॉफी पीने से मधुमेह का जोखिम कम हो सकता है.

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केवल 15 मिनट और पाएं काली गर्दन से छुटकारा..!!

बात जब खूबसूरती की होती है तो लोगों का ध्यान सिर्फ चेहरे या हाथ पैरों पर टिक जाता है। शरीर के कई ऐसे हिस्से हैं जो अक्सर नजरअंदाज कर दिए जाते हैं। इस लिस्ट में गर्दन भी शामिल है। अगर इस अनदेखी के चक्कर में आपकी भी गर्दन काली पड़ रही है तो 15 मिनट का ये उपाय आपकी परेशानी दूर कर सकता है।

गर्दन की त्‍वचा बेहद कोमल और संवदेनशील होती है। चेहरे के साथ खूबसूरती बढ़ाने में इसका भी अहम रोल होता है लेकिन धूल मिट्टी और पसीने की वजह से कई बार गर्दन का रंग काला पड़ने लगता है।

अगर आपकी गर्दन भी का रंग भी काला पड़ने लगा है तो 15 मिनट के इन टिप्स को आजमाकर देखिए।
-स्‍टीमिंग
-एक्सफोलीएटिंग
-वाइटनिंग

स्टीमिंग
पहले टिप्स का नाम है स्‍टीमिंग। इसमें आपको एक छोटा तौलिया लेकर उसे गर्म पानी में डुबोएं। इसके बाद तौलिये को निचोड़कर अपनी गर्दन पर लपेट लें। कुछ देर तक तौलिये को गर्दन पर ही लगा रहने दें। यह त्‍वचा को नमी देने के साथ-साथ बंद पोर्स भी खोल देता है। ऐसा करने से गर्दन पर जमी गंदगी और डेड स्किन त्‍वचा से बाहर आ जाती है।

एक्सफोलिएटिंग
दूसरे टिप्स का नाम है एक्सफोलिएटिंग। इसमें एक चम्‍मच नमक, एक चम्‍मच बेकिंग सोडा और तीन चम्‍मच नारियल तेल को एक बाउल में एक साथ मिलाकर अच्छी तरह मिक्‍स कर लें। इस मिक्‍स को कुछ देर तक अपनी उंगलियों से मसाज जेते हुए अपनी गर्दन के आस-पास धीरे-धीरे रगड़े। ऐसा करने से आपकी गर्दन से गंदगी और मृत कोशिकाएं हट जाएंगी।

वाइटनिंग
इस पेस्‍ट को बनाने के लिए एक चम्‍मच चंदन पाउडर, एक चम्‍मच मुलतानी मिट्टी, एक नींबू का रस और आधा कप कच्‍चे दूध को एक बाउल में मिक्‍स कर लें। नींबू का रस दूध में मिलाने से पेस्‍ट गाढ़ा हो जाता है। इस पेस्‍ट को गर्दन पर लगाकर कुछ देर के लिए छोड़ दें। इस पेस्ट को लगाकर मसाज करने की जरूरत नहीं है। यह पैक प्राकृतिक ब्‍लीच की तरह काम करता है।

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बस 2 दिन में बैली फैट छूमंतर, जाने कैसे…???

बस 2 दिन में बैली फैट की होगी छुट्टी….. बढ़ते वजन की वजह से अगर आपको भी लगने लगा है कि आपकी पर्सनालिटी खराब हो रही है। इतना ही नहीं अपने मोटापे को छुपाने के लिए अब आपने ढीले-ढाले कपड़े पहनना या अंग्रेजी दवाओं का सहारा लेना भी शुरू कर दिया है तो पहले ये खबर जरूर पढ़ लें।

पेट की चर्बी और वजन घटाने के लिए वैसे तो लोग कई उपाय करते रहते हैं लेकिन वजन घटाने के लिए कच्चे पपीता का ये उपाय बेहद कारगर है। इसके नियमित सेवन से आप कुछ ही दिनों में अपने मोटापे से निजात पा सकते हैं।

कच्चे पपीते का हलवा बनाने का तरीका
कच्चे पपीते का हलवा बनाने के लिए सबसे पहले पपीते के छोटे छोटे टुकड़े कांट लें। इसके बाद पपीते के इन टुकड़ों को एक बर्तन में आधा ग्लास पानी डालकर गैस पर उबलने के लिए रख दें। ध्यान रखें कि गैस की आंच एकदम हल्की रहे। करीब 20 से 25 मिनट तक इसे पकाने के बाद जब आपको लगे कि पपीता अच्छी तरह गल गया है तो उसे अच्छी तरह मैश कर लें। आप चाहे तो इसमें चीनी भी मिला सकते हैं।

पपीते के इस हलवे को हफ्ते में करीब 3 से 4 बार खाएं। आपको खुद में फर्क महसूस होने लगेगा। वजन कम करने के लिए रोज भोजन के साथ कच्चे पपीता का सेवन करें। इसके लिए आप कच्चे पपीते को कदूकस कर के दही के साथ मिलाकर भी खा सकते हैं।अगर आप कच्चे पपीते को सलाद के तौर पर खाना चाहते हैं तो वो भी बहुत फायदेमंद है।

ध्यान दें
चर्बी चाहे पेट की हो या कमर के आस-पास के हिस्सों की जीवनशैली में सुधार किए बिना इसको कम करना संभव नहीं है। इससे निजात पाने के लिए आपको जंक फूड के साथ तेल मसालों से दूरी बनानी चाहिए।

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क्या आप है बदलते मौसम के साथ एलर्जी से हैं परेशान..? तो ध्यान दे

मेडिसिटी गुड़गांव के ईएनटी डिपार्टमेंट के चेयरमैन डॉक्टर के के हांडा ने बताया कि ‘ज़्यादातर लोग मौसमी एलर्जी से परेशान हैं। नाक से पानी गिर रहा है, छाती जकड़ गई है, सांस लेने में परेशानी है, कान और गले में दर्द है और कुछ मामलों में आंखों में जलन और खुजली की शिकायत भी है’।

गला-नाक-आंख-कान यह सारे अंग आपस में जुड़े हैं, इसलिए अगर एक में भी परेशानी हुई तो बढ़कर बाक़ी तक भी पहुंच सकती है। इनमें से ज़्यादातर परेशानियां प्रदूषण से जुड़ी हैं।

दिवाली के आस-पास प्रदूषण खतरनाक स्तर तक बढ़ जाता है क्योंकि पटाखे छुटाए जाते हैं। गांव में पुआल जलाई जाती है और मौसम में नमी आने लगती है जो प्रदूषण और धुएं को ऊपर उठने से रोकती है।

दमा के मरीजों को सबसे ज़्यादा नुकसान
दुनिया भर के दमा मरीजों में से दस फीसदी भारत में रहते हैं। डब्ल्यूएचओ पहले ही बता चुका है कि दुनिया के सबसे गंदी आबोहवा वाले 20 शहरों में से 13 शहर भारत में हैं। ऐसे में हवा में रुका यह जहर सांस के जरिए हमारे शरीर में प्रवेश कर जाता है।

सर गंगाराम अस्पताल के सीनियर चेस्ट कंसल्टेंट डॉक्टर बॉबी भलोत्रा के मुताबिक ‘इतने प्रदूषण में दमा के मरीज़ को अटैक आ सकता है और कभी-कभी समय पर मदद न मिले तो दमा का अटैक जानलेवा भी हो सकता है’।

अब चेतना जरूरी
डॉक्टर भलोत्रा ने बताया कि इतना प्रदूषण सिगरेट के धुएं से भी कई गुना ज़्यादा खतरनाक है। उनका मानना है कि ‘अगर हम अब भी नहीं चेते और प्रदूषण ऐसे ही बढ़ता रहा तो अगले 15-20 साल में छोटी उम्र में ही फेफड़ों के कैंसर के मामले सामने आने लगेंगे’।

 

डॉक्टर की सलाह है कि अगर सांस में थोड़ा भारीपन महसूस हो, छाती और गले में घर-घर की आवाज आए तो देर न करें और तुरंत अपना ब्लड प्रेशर और छाती का चेकअप कराएं।

एहतियात की जरूरत
सीओपीडी (क्रोनिक ऑब्सट्रक्टिव पल्मनरी डिज़ीज़) के मरीज़ों को और भी एहतियात रखने की जरूरत है। उनके लिए डॉक्टर की सलाह है कि ‘अपनी दवाई लगातार लेते रहें और इन्हेलर हमेशा साथ रखें’।

प्रदूषण का असर त्वचा पर भी पड़ता है। महक डर्मा एंड सर्जरी क्लीनिक की डायरेक्टर डॉक्टर शेहला अग्रवाल ने बताया कि इस मौसम में छपाकी यानी त्वचा पर लाल चकत्ते की शिकायत वाले मरीज ज़्यादा आ रहे हैं।

सुबह की सैर से बचें
डॉक्टर के मुताबिक ‘इस मौसम में तड़के पांच या छह बजे सैर पर जाने से बचें क्योंकि इस समय मौसम में सबसे ज़्यादा नमी होती है और फूल खिलते हैं जिनसे निकले पराग कण नमी के चलते हवा में ही रुके रह जाते हैं। साथ ही इस समय की ठंडी हवा त्वचा को खुश्क बनाती है’।

डॉक्टर की सलाह है कि ”अगर बहुत ज़रूरी हो तो सात बजे सैर पर जा सकते हैं, लेकिन उससे पहले बाहर जाने से बचें’।

बच्चों का बचाव करें
डॉक्टर का कहना है कि ‘कोशिश करें कि सिर्फ़ धूप के दौरान बाहर रहें। न बहुत सुबह बाहर निकलें और न ही शाम तक बच्चों को बाहर खेलने दें। बंद वाहन जैसे गाड़ी, बस, मेट्रो में बाहर जाएं।’

डॉक्टर के के हांडा आगे बताते हैं कि ”सार्वजनिक जगहों में मास्क का इस्तेमाल करें। कोशिश करें कि एक बार के बाद फेंकने वाले (डिस्पोज़ेबल) मास्क का इस्तेमाल करें। आंखों को बचाने के लिए ज़ीरो पावर का चश्मा लगा सकते हैं।

‘दिवाली के दौरान ज़्यादा मीठा, तला-भुना और डिब्बा बंद खाना खाने से इम्युनिटी भी कमज़ोर होती है इसलिए खाने-पीने का भी ध्यान रखें।

 

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केवल 25 मिनट एक्‍सरसाइज से दिमाग रहेगा दुरूस्‍त, बॉडी रहेगी फिट..!!!

केवल 25 मिनट के लिए माइंडफुलनेस मेडिटेशन के साथ रोजाना हठ योग (आसन, प्राणायाम और ध्यान का एक संयोजन) करने से मस्तिष्क तंत्र के क्रियान्वयन व ऊर्जा स्तर में काफी सुधार हो सकता है। एक शोध में पता चला है कि नियमित तौर पर हठ योग और माइंडफुलनेस मेडिटेशन (ध्यान की एक स्थिति) मस्तिष्क तंत्र के क्रियान्वयन, लक्ष्य-निर्देशित व्यवहार से जुड़ी संज्ञानात्मक व भावनात्मक प्रतिक्रियाओं को नियंत्रित करने की क्षमताओं, स्वाभाविक सोच की प्रक्रियाएं और क्रियाएं को बढ़ावा दे सकता है।
कनाडा की ओंटारियो स्थिति यूनिवर्सिटी ऑफ वाटरलू में सहायक प्राध्यापक पीटर हॉल ने कहा कि हठ योग और माइंडफुलनेस मेडिटेशन दोनों ही ध्यान सत्र के बाद कुछ सकारात्मक प्रभाव देते हैं जिससे लोग जो रोजमर्रा की जिंदगी में करना चाहते हैं उस पर अधिक आसानी से ध्यान केंद्रित कर पाते हैं।”

हठ योग पश्चिमी देशों में प्रचलित योगों की सबसे आम शैलियों में से एक है, जिसमें ध्यान को शारीरिक आसनों और सांस लेने के व्यायाम से जोड़ा जाता है। माइंडफुलनेस मेडिटेशन में विचारों, भावनाओं और शरीर की उत्तेजनाओं पर ध्यान केंद्रित किया जाता है।
योग शब्द संस्कृत धातु ‘युज’ से निकला है, जिसका मतलब है व्यक्तिगत चेतना या आत्मा का सार्वभौमिक चेतना या रूह से मिलन। योग, भारतीय ज्ञान की पांच हजार वर्ष पुरानी शैली है । हालांकि कई लोग योग को केवल शारीरिक व्यायाम ही मानते हैं, जहाँ लोग शरीर को मोडते, मरोड़ते, खिंचते हैं और श्वास लेने के जटिल तरीके अपनाते हैं। यह वास्तव में केवल मनुष्य के मन और आत्मा की अनंत क्षमता का खुलासा करने वाले इस गहन विज्ञान के सबसे सतही पहलू हैं। योग विज्ञान में जीवन शैली का पूर्ण सार आत्मसात किया गया है|

माइंडफुलनेस मेडिटेशन और हठ योग दोनों ऊर्जा स्तर में सुधार के लिए प्रभावी पाए गए हैं, लेकिन केवल ध्यान करने की तुलना में हठ योग व ध्यान दोनों एक साथ में काफी अधिक शक्तिशाली प्रभाव देते हैं। यह शोध ‘माइंडफुलनेस’ पत्रिका में प्रकाशित हुआ है।

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जानिये कैसे बिना तेल लगाए बालों को बनाएं खूबसूरत और काला..!!

जैसे हमारे शरीर को पोषण की आवश्यकता होती है वैसे ही बालो को स्वस्थ बनाए रखने के लिए पोषण की जरूरत होती है बालों की खूबसूरती के लिए आप क्या कुछ नहीं करते तेल मालिश से लेकर मंहगे हेयर स्पा तक न जाने कितने सौंदर्य प्रसाधनों का इस्तेमाल करते हैं लेकिन क्या आप जानते हैं कि यदि आपका आहार अच्छा होगा तो बाहरी तौर पर आपको अपने बालो पर इतना खर्च करने की जरूरत नहीं होगी इसके लिए सबसे जरूरी है ये जानना कि बालों की मजबूती और उन्हें सुंदर बनाने क लिए कौन-कौन से पोषक तत्व आवश्यक हैं।

अक्सर टूटते झड़ते बालों की परेशानी झेल रहे लोगों को सिर पर तेल लगाने की सलाह दी जाती है। लेकिन क्या आप जानते हैं कि बिना तेल लगाए भी आप खूबसूरत बाल पाने का सपना पूरा कर सकते हैं।

जी हां खूबसूरत और घने बाल पाने के लिए अंडे को अपना दोस्त बनाएं। इसके लिए आपको सबसे पहले अंडे में थोड़ा-सा दूध मिलाकर गाढ़ा होने तक फेंटना है। इस पेस्ट को बालों में एक घंटा लगाने के बाद अच्छी तरह धो लें। ऐसा करने से आपके बाल न सिर्फ घने होंगे बल्कि चमकदार भी दिखेंगे।

जो लोग दोमुंहे बाल से परेशान है उन्हें 2 चम्मच ग्लिसरीन, एलोवेरा जेल और अंडे का पीला वाला भाग एक साथ लेकर अच्छी तरह मिलाकर बालों पर लगाकर आधे घंटे बाद धोना है।

बालों को पोषण देने के लिए नियमित रूप से दही का प्रयोग भी काफी लाभदायक होता है। बाल में दही लगाने के बाद आधे घंटे बाद शैंपू कर लें।

तैलीय बालों के साथ डैंड्रफ की समस्या से भी परेशान है तो थोड़ा-सा पका पपीता लेकर मैश करें और उसमें बेसन और एपल विनिगर मिलाएं। इस पेस्ट को आधे घंटे के लिए बाल पर लगाएं और उसके बाद शैंपू कर लें।

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भोजन की आदत से कैसी है पर्सनैलिटी, आप क्या पसंद करते हैं..!!!

क्या आपने कभी सुना है कि आपका पसंदीदा भोजन आपकी लाइफ से जुड़े कई राज लोगों के सामने खोल सकता है।जी हां ये बिल्कुल वैसा है जैसे कोई व्यक्ति आपकी बॉडी लैंग्वेज को देखकर आपकी पर्सनैलिटी के बारे में सब कुछ बता दें। ठीक उसी तरह हमारे खाने की पसंद से भी आप किस तरह के व्यक्ति हैं पता चल जाता है। आगे की स्लाइड पर क्लिक करके जानें आप किस तरह के व्यक्ति हैं।

नाक-भौं सिकोड़ने वाले लोग
आप भी उन लोगों की लिस्ट में शामिल हैं जो खाने को देखकर अपनी नाक-भौं सिकोड़ते हैं तो आपका व्यक्तित्व चिंतित किस्म का हो सकता है। ऐसे लोग आसानी से बेचैनी के शिकार हो सकते हैं।

मीठा खाने वाले लोग
भोजन में मीठा पसंद करने वाले लोग अक्सर मिजाज से बहुत प्यारे होते हैं जबकि तीखा खाने वाले लोगों को शातिर लोगों में शामिल किया जाता है।

खाना मिक्स कर के खाने वाले लोग
अगर आप अपने खाने में सभी चीजों को मिलाकर खाना पसंद करते हैं, तो हो सकता है आप अक्सर काम करते समय अपनी प्राथमिकताएं भूल जाने वाले लोगों में से एक हों। हालांकि ऐसे लोगों के बॉस उनसे काफी खुश रहते हैं क्योंकि ऐसे व्यक्ति सारी जिम्मेदारियां एक साथ ले कर बड़ी अच्छी तरह से निभा लेते हैं।

पार्टी में अगर अपने लुक से कोई छा गया तो वह हैं दो स्‍टार डॉटर्स….!!!

धीरे-धीरे खाने वाले लोग
धीरे खाने वाले लोग कभी जल्दबाजी में नहीं होते और वे वर्तमान में जीने में विश्वास रखते हैं। दूसरी वे जिद्दी होते हैं, जिन्हें अपनी दिनचर्या से चिपके रहना बेहद पसंद होता है।

नया फूड ट्राई करने वाले लोग –
ऐसे लोगों के पार्टनर, उनसे कभी ऊबने की शिकायत नहीं करते हैं। ऑफिस में काम करते समय ऐसे लोग अपने किसी नए आइडिया को भी बॉस के साथ शेयर करने से नहीं हिचकिचाते। ऐसे लोगों के काफी दोस्त बनते हैं।

नमकीन खाना पसंद करने वाले लोग –
तेज नमक वाला खाना खाने वाले लोग दिल के बड़े साफ होते हैं। ऐसे लोग अक्सर दूसरों के साथ अपना दिल खोल कर बात करते हैं। वे दुनिया से अपनी राय और विचार को शेयर करने से नहीं डरते।

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