Category Archives: Informative news

जाने अफ्रीका के रोचक रीति-रिवाज़…!

बुल-जंपिंग

मास्सई व् इथोपिया के आदिवासियों में ये खेल मुख्यतः खेला जाता है l इसमें यंग अपने पुरुषत्व को साबित करने के लिए नंगे होकर दौड़ते है ,और जम्प करके बैल के ऊपर बैठते है ,इस तरह एक बैल से दुसरे बैलो पर कूदते हुए अपने पुरुषत्व को दर्शाते है l

दुल्हन का किडनैप

लातुका आदिवासी में शादी की अनोखी प्रथा है, इस समुदाय के लोगो में जब किसी को शादी करना होती है, तो तो वो अपने मन-पसंद की लड़की को काबिले से भगा ले जाता है, तत्पश्चात लड़के के घर का सबसे बड़ा मुखिया लड़की के घर जाकर सम्बन्ध को विधिवत बनने की मांग करता है l लड़की पक्ष की मंजूरी मिलने के पश्चात लड़के के घर का मुखिया लड़के की खूब पिटाई करता है , जो उसके शादी पक्की होने की निशानी मानी जाती है l

थूककर बुरी आत्मा को दूर करते है

साउथ अफ्रीका की बड़ी प्रचलित परंपरा है गिसमे हर शुभ कार्य को थूक कर किया जाता है l यहाँ पर रहने वाली प्रजातियों का मानना है की ऐसा करने से बुरी आत्मा नहीं आती है l

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19 मई के दिन अधिक-से अधिक मतदान के लिए आईपीएस अकादमी में अपील..

आईपीएस अकादमी में जिला प्रशासन द्वारा चलाये जा रहे 100% मतदान की अपील करने वोट-रथ पंहुचा.
आईपीएस अकादमी के रजिस्ट्रार श्री रवि सक्सेना जी ने हस्ताक्षर कर सभी प्रोफेसर एवं कर्मचारियों से 19 मई को मतदान करने की अपील कीl

ICSR की अलका सक्सेना ने सभी स्टूडेंट्स को आह्वान कर हस्ताक्षर करवाए, साथ ही उन्हें मतदान करने को प्रेरित किया, ” अलका सक्स्सेना ने बताया की कॉलेज में बहुत से छात्र ऐसे है जो पहली बार मतदान करेंगे, हमें उन्हें प्रेरित करना जरूरी है, इसलिए आज हमने इस इवेंट को एक राष्ट्रिय इवेंट के रूप में मनाया,l हमने कॉलेज के सभी छात्रो से रथ के डिजिटल स्क्रीन में हस्ताक्षर करवाए और उन्हें मतदान करने की शपथ दिलवाई l
ICSR के श्री राणा ने बताया कि मतदान के लिए हम आसपास के गाँव के छात्रो को भी हमारी सोशल सर्विस के जरिये अधिक मतदान करने के लिए प्रेरित कर रहे हैl

मतदान जागरूकता कार्यक्रम  में डॉ. वैशाली शर्मा , प्रो. मंगला जैन,प्रो.पूनम सिंह,एवं प्रो. प्रीती रतोला उपस्थित रहे l

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आरआरबी (RRB) फरवरी या मार्च में 1 लाख 31 हजार 428 पदों पर भर्ती के लिए नोटिफिकेशन जारी करेगा

रेलवे (Railway) में बंपर भर्तियां होनी हैं. कुछ पदों पर भर्ती के लिए नोटिफिकेशन जारी हो चुका है और कुछ के लिए नोटिफिकेश जल्द ही जारी कर दिया जाएगा. आरआरबी (RRB) फरवरी या मार्च में 1 लाख 31 हजार 428 पदों पर भर्ती के लिए नोटिफिकेशन जारी करेगा. वहीं नोर्थेर्न रेलवे (Northern Railway) इस समय अपरेंटिस के पदों पर भर्ती कर रहा है. जिसके लिए आवेदन की आखिरी तारीख 31 जनवरी है. साथ ही नोर्थेर्न रेलवे कनीय अभियंता, तकनीशियन और क्लर्क के पदों पर भी भर्ती करेगा, जिसके लिए आवेदन की प्रक्रिया अभी चल रही है. अगर आप रेलवे में नौकरी करना चाहते हैं, तो ये मौका आपके लिए अच्छा है. ​

आरआरबी (RRB) में बंपर भर्ती
रेलवे (RRB) 2 लाख 30 हजार नए पदों पर भर्ती के लिए जल्द ही नोटिफिकेशन जारी करेगा. इस भर्ती में आर्थिक रूप से कमजोर उम्मीदवारों को 10 फीसदी आरक्षण दिया जाएगा. कुल 23 हजार पद आर्थिक रूप से कमजोर लोगों के लिए होंगे. ये भर्ती 2 फेज में होगी. पहले फेज में 1 लाख 31 हजार 428 पदों पर भर्ती के

लिए नोटिफिकेशन जारी होगा. ये नोटिफिकेशन फरवरी या मार्च में जारी किया जाएगा. जबकि दूसरे फेज में 99 हजार पदों पर भर्ती के लिए मई-जून 2020 में नोटिफिकेशन जारी किया जाएगा.

 

नोर्थेर्न रेलवे अपरेंटिस की भर्ती
नोर्थेर्न रेलवे (Northern Railway) ने हाल ही में अपरेंटिस के 1092 पदों पर भर्ती के लिए वैकेंसी निकाली थी. अब इन पदों पर आवेदन की आखिरी तारीख नजदीक है. आप इन पदों पर 31 जनवरी 2019 तक आवेदन कर सकते हैं. आवेदन करने वाले उम्मीदवार का 10वीं और ITI पास होना अनिवार्य है.

Railway Job Notification

नोर्थेर्न रेलवे में कनीय अभियंता, तकनीशियन, क्लर्क के पदों पर वैकेंसी
नोर्थेर्न रेलवे  (Northern Railway)
योग्यता: ग्रेजुएट
नौकरी स्थान: नई दिल्ली
पदों की संख्या: 52

 

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ये ख़ास आदते जो बताती है कि आप बूढ़े हो रहे हो ..जानने के लिए पढ़े ..!!

1. डीएनए की क्षति

हमारा डीएनए एक तरह का जेनेटिक कोड होता है जो कोशिकाओं के बीच संचरित होता है.

उम्र बढ़ने से इन जेनेटिक कोड के संचरण में गड़बड़ी होनी शुरू हो जाती है.

धीरे-धीरे यह कोशिकाओं में जमा होना शुरू हो जाती हैं.

इस प्रक्रिया को आनुवांशिक अस्थिरता के रूप में जाना जाता है और यह विशेष रूप से तब प्रासंगिक होता है जब डीएनए स्टेम कोशिकाओं को प्रभावित करता है.

आनुवांशिक अस्थिरता स्टेम कोशिकाओं की भूमिका को ख़तरे में डाल सकती है.

अगर ये अथिरता बढ़ जाती है तो यह कैंसर में भी तब्दील हो सकती है.

2. क्रोमोसोम्स का कमज़ोर होना

हर डीएनए सूत्र के अंतिम छोर पर कैप जैसी संरचना होती है जो हमारे क्रोमोसोम्स को सुरक्षित रखते हैं- ये बिल्कुल वैसी ही संरचना होती है, जैसे हमारे जूतों के फीतों की, जिसमें फीते के अंतिम छोर पर एक प्लास्टिक का टिप लगा होता है.

इन्हें टेलोमर्स कहते हैं. हम जैसे-जैसे उम्रदराज़ होते जाते हैं, ये कैप रूपी संरचना हटने लगती है और क्रोमोसोम की सुरक्षा ढीली पड़ने लगती है.

इस वजह से परेशानी पैदा हो सकती है.

शोधकर्ता मानते हैं कि टेलोमर्स की संरचना में जब गड़बड़ी आती है तो कई बीमारियां होने का ख़तरा बढ़ जाता है. इसकी वजह से फेफड़ों से जुड़ी समस्याएं और एनीमिया होने का ख़तरा बढ़ जाता है. ये दोनों ही रोग प्रतिरक्षा से जुड़ी गंभीर समस्याएं हैं.

 

3. कोशिकाओं का व्यवहार प्रभावित होता है

हमारे शरीर में एक विशेष प्रकार की प्रक्रिया होती है जिसे डीएनए एक्सप्रेशन कहते हैं, जिसमें किसी एक कोशिका में मौजूद हज़ारों जीन्स ये तय करते हैं कि उस कोशिका को क्या करना है .

मसलन, क्या उस कोशिका को त्वचा वाली कोशिका के तौर पर काम करना है या मस्तिष्क कोशिका के रूप में.

लेकिन समय और जीवनशैली इन निर्देशों को बदल सकते हैं. ऐसे में कोशिकाएं भी अपने तय व्यवहार से अलग तरीक़े से व्यवहार कर सकती हैं.

4. कोशिकाओं के नवीनीकरण की क्षमता ख़त्म हो जाती है

हमारी कोशिकाओं में क्षतिग्रस्त घटकों के संचय को रोकने के लिए शरीर में नवीनीकरण की क्षमता होती है.

लेकिन बढ़ती उम्र के साथ ही ये क्षमता धीरे-धीरे कम होती जाती है.

ऐसे में कोशिकाएं बेकार या ज़हरीले प्रोटीन जमा करने लगती हैं- जो कई बार अल्ज़ाइमर का कारण बन जाता है. कई बार इसकी वजह से पार्किन्संस और मोतियाबिंद का ख़तरा भी बढ़ जाता है.

5. कोशिकाएं मेटाबॉलिज़्म कंट्रोल खो देती हैं

बढ़ती उम्र के साथ कोशिकाएं वसा और शक्कर के तत्व को सोखने की क्षमता खोती जाती हैं.

इसके चलते बहुत बार मधुमेह की शिकायत हो जाती है. बढ़ती उम्र में जिन लोगों को मधुमेह की शिकायत होती है उन लोगों में विशेष रूप से यही कारण होता है- उम्रदराज़ शरीर उन सभी पोषक तत्वों को ग्रहण नहीं कर पाता है जो वो खाता है.

६.स्टेम सेल अपनी क्षमता खोने लगती हैं

उम्र बढ़ने के साथ कोशिकाओं की पुनरुत्पादक क्षमता में कमी आ जाती है.

स्टेम कोशिकाएं थकने लगती हैं. हाल के अध्ययनों से पता चलता है कि स्टेम कोशिकाओं के कायाकल्प से बढ़ती उम्र के शारीरिक लक्षणों को सामने आने से रोका जा सकता है.

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दीपावली के दिन सिर्फ शाम 8:00 से 10:00 तक पटाके चलने की छूट – सुप्रीम कोर्ट

एक जनहित याचिका में अपना फैसला सुनते हुए सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि दिवाली के दिन सिर्फ दो घंटे ही पटाखे जलाये, वो भी कम धुवे वाले, ताकि प्रदुषण कम से कम फैले l कोर्ट के इस फैसले से सभी देशवासी हतप्रद है l

ट्विस्ट मोबाइल के फाउंडर एवं सीईओ विराट खुटाल आश्चर्य व्यक्त करते हुए कहते है, “ये तो बड़ी अजीब सी बात है कि त्योहारों में कोर्ट का इस तरह पाबन्दी लगाना देश को एक पाषाणयुग( स्टोन ऐज) में ले जाने जैसा है” , कल से कोर्ट मुश्लिम के ईद में होने वाली पद्दति पर भी रोक लगा सकती है, क्योकि ये भी पर्यावरण को दूषित करता हैl  विराट कहते है कही ऐसा तो नहीं की कुछ ताकते देश में सरकार को अस्थिर करना चाह रही है, और अराजकता फैलाना चाह रही है ..?

सुप्रीम कोर्ट ने अपने फैसले में कहा है कि दिवाली पर लोग रात 8-10 बजे तक ही पटाखे चला सकेंगे। यह आदेश सभी धर्मों के त्यौहारों पर लागू होगा।सर्वोच्च न्यायालय ने यह भी कहा है कि जो पटाखें चलाए जाएं वो कम धुएं और आवाज वाले हों ताकि प्रदूषण ना फैले। सर्वोच्च न्यायालय ने पटाखों की बिक्री पर से भी कुछ शर्तों के साथ रोक हटाई है। इसके तहत पटाखों की ऑनलाइन बिक्री पर रोक लगा दी है।

बीजेपी नेता राजू सोमानी का कहना है कि ये तो सरासर अन्याय है कि अब हम अपना त्यौहार भी कानून के संगीनों के साए में मनाएंगे,l

वही गृहणी मंजुला त्रिपाठी कहती है, इस तरह कोर्ट यदि हर बात में निर्णय देने लगेगी तो हमारा जीना मुश्किल हो जायेगा, कॉलेज स्टूडेंट मुकुंद का कहना है हम ये बाते तो नहीं मानेगे फिर चाहे जो हो जाये l

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सवर्ण तो बाहर से आये हुए मुग़ल है,..अब समानता की बात करना बेईमानी होगी ..!

मंजुला दाधीच की कलम से   :-

गरीब की कोई जात नही होती, वो तो सिर्फ गरीब होता है l वो हर चुनाव में नयी पार्टी को इस उम्मीद से वोट देता है कि शायद ये सरकार उसके लिए कुछ करेगी, चूकि चुनाव में ये सब समानता की बात करते है ,सबका साथ ,सबका विकास कह ये हर गरीब का दुःख समझाते है l

मगर सरकार आते ही ये अपना राग अलापने लगते है, और पुरानी सरकार को कोसने लगते है , दलितों के मसीहा बनने की कोशिश करते है l

ना जाने कौन इनको सरकार में रहकर ज्ञान देता है कि दलितों को ऐसा करने से तुम्हारा इतना परसेंट वोट बैंक निश्चित हो जायेगा, और सरकार जोर जोर से भोंगे में दलित राग अलापने लगती है , और ऐसा लगने लगता है, जैसे सवर्ण तो बाहर से आये हुए मुग़ल है, और तथाकथित राजनीतिक ये बोलने लगते है कि इनको सवर्णों ने हजारो साल तक दोहन किया है, इसलिए अब इनको मौका मिलना चाहिए l

मतलब सीधा है कि हमें इनको सिर्फ वोट बैंक बनना है, इसलिए इनको रोटी राम बना दो l फिर सवर्ण क्यों और किस हिन्दू की बात करे, वो तो ब्राम्हण है, क्षत्रिय है,कायस्थ है ,वणिक है, जैन है , इन सबके देवता है , सबके अपने कर्म है और इनका अपना समाज़ है , और जो इनके हक़ की बात करेगा ये उसी को वोट देंगे l

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लंदन का नॉटिंग हिल फेस्टिवल बना लोगो मके आकर्षण का केंद्र ….!!!

1966 से शुरू हुआ लंदन के नॉटिंग हिल इलाके में हर साल मनाया जानेवाला कार्निवल पूरे यूरोप में सबसे बड़ा माना जाता है. लंदन के कार्निवल में अफ़्रीकन मूल के लोग नोटिंग हिल में जुटते हैं. ब्राज़ील का कार्निवल दुनिया का सबसे बड़ा माना जाता है.

अगस्त के दूसरे सप्ताह में मनाया जाने वाला ये फेस्टिवल ब्रिटेन में स्ट्रीट फेस्टिवल के नाम से भी जाना जाता है l वर्तमान में इस फेस्टिवल में तकरीबन एक लाख लोग देखने आते है l

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4 साल के बेटे की मां अनु ने यूपीएससी 2017 परीक्षा में दूसरा स्थान प्राप्त किया है…

 

एक समर्पित मां होते हुए अनु कुमारी ने न सिर्फ घरेलू जिम्मेदारियों को पूरा किया बल्कि अपने अध्ययन के लिए हर दिन 10 से 12 घंटे का समय भी निकाला. अनु ने बताया कि जिस गांव में मैं अपनी परीक्षा के लिए तैयारी कर रही थी, वहां अखबार भी नहीं आता था. मैंने ऑनलाइन कॉन्टेंट का सहारा लेकर तैयारी की.

यूपीएससी परीक्षा 2017 का परिणाम घोषित हो गया है. सफलता प्राप्त करने वालों में कई ऐसे भी नाम हैं जिनकी मेहनत और कर्मठता किसी मिसाल से कम नहीं. इस प्रतिष्ठित प्रतियोगी परीक्षा में हरियाणा के सोनीपत की रहने वाली अनु कुमारी ने अपनी कामयाबी के झंडे गाड़ दिए हैं. 4 साल के बेटे की मां अनु कुमारी ने अपनी मेहनत और लगन के दम पर पूरे देश में दूसरा स्थान हासिल किया है. महिलाओं में उनकी रैंकिंग पहली है.

अपने सफलता के मंत्र को साझा करते हुए अनु कहती है कि जीवन में कुछ हासिल करने के लिए मजबूत इच्छाशक्ति का होना जरूरी है और यदि आप ऐसा करने में सक्षम हैं, तो कुछ भी आपको सफल होने से रोक नहीं सकता है. उन्होंने कहा कि आईएएस अधिकारी बनने के बाद देश में महिलाओं की सुरक्षा उनकी सर्वोच्च प्राथमिकता होगी.

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नासा का अपना ‘पार्कर सोलर प्रोब’ जुलाई में लांच …!

सूर्य के करीब पहुंचने की मानव की पहली तैयारी में अमेरिकी अंतरिक्ष एजेंसी नासा अपना ‘पार्कर सोलर प्रोब’ जुलाई में लांच करने जा रहा है. ‘पार्कर सोलर प्रोब’ को फ्लोरिडा स्थित नासा के केनेडी स्पेस सेंटर से लांच कांप्लेक्स-37 से भेजा जाएगा. अमेरिकी अंतरिक्ष एजेंसी ने एक बयान में कहा कि दो घंटे का लांच विंडो 31 जुलाई को सुबह चार बजे खुलेगा और उसके बाद 19 अगस्त तक हर दिन सुबह चार बजे से थोड़ा पहले खुलेगा.

अंतरिक्ष के लिए रवाना होने के बाद अंतरिक्ष यान सीधा सूर्य के प्रभामंडल यानी कोरोना में पहुंचेगा, जोकि सूर्य के काफी करीब है जहां अब तक कोई मानव निर्मित वस्तु नहीं पहुंच पाई है. सूर्य की सतह से कोरोना की दूरी 38 लाख मील दूर है.

सूर्य की प्रचंड ताप और विकिरण को झेलते हुए इस मिशन से विज्ञान की मौलिक गुत्थियां सुलझाने में मदद मिलेगी कि सौर वात किससे चालित होती है. यहां वात से अभिप्राय सूर्य से निकलने वाले पदार्थ से है जिससे ग्रहीय वातावरण का निर्माण होता है और पृथ्वी के नजदीक अंतरिक्ष के मौसम पर प्रभाव डालता है.

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अंतरिक्ष एजेंसी NASA का अपना ‘पार्कर सोलर प्रोब’ जुलाई में लांच

सूर्य के करीब पहुंचने की मानव की पहली तैयारी

नई दिल्ली: सूर्य के करीब पहुंचने की मानव की पहली तैयारी में अमेरिकी अंतरिक्ष एजेंसी NASA अपना ‘पार्कर सोलर प्रोब’ जुलाई में लांच करने जा रहा है.

‘पार्कर सोलर प्रोब’ को फ्लोरिडा स्थित नासा के केनेडी स्पेस सेंटर से लांच कांप्लेक्स-37 से भेजा जाएगा. अमेरिकी अंतरिक्ष एजेंसी ने एक बयान में कहा कि दो घंटे का लांच विंडो 31 जुलाई को सुबह चार बजे खुलेगा और उसके बाद 19 अगस्त तक हर दिन सुबह चार बजे से थोड़ा पहले खुलेगा. 

अंतरिक्ष के लिए रवाना होने के बाद अंतरिक्ष यान सीधा सूर्य के प्रभामंडल यानी कोरोना में पहुंचेगा, जोकि सूर्य के काफी करीब है जहां अब तक कोई मानव निर्मित वस्तु नहीं पहुंच पाई है.

सूर्य की सतह से कोरोना की दूरी 38 लाख मील दूर है. सूर्य की प्रचंड ताप और विकिरण को झेलते हुए इस मिशन से विज्ञान की मौलिक गुत्थियां सुलझाने में मदद मिलेगी कि सौर वात किससे चालित होती है.

यहां वात से अभिप्राय सूर्य से निकलने वाले पदार्थ से है जिससे ग्रहीय वातावरण का निर्माण होता है और पृथ्वी के नजदीक अंतरिक्ष के मौसम पर प्रभाव डालता है. 

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