Category Archives: Innovative News

त्रिपुरा की उंनकोटि एक रहस्यमय देवस्थल

त्रिपुरा के उनाकोटि पहाड़ में मौजूद हैं असंख्य हिन्दू देवी-देवताओं की मूर्तियां :

संकीर्ण पगडंडियां, दूर-दूर तक फैले जंगल और कोलाहल मचाते नदी स्रोतों के मध्य स्थित है त्रिपुरा की ‘उनाकोटि’। जिसे पूर्वोत्तर भारत के सबसे बड़े रहस्यों में भी गिना जाता है।यहाँ पर जगंलों की बीच शैलचित्रों और मूर्तियों का अद्भुत भंडार है।

इस स्थल का इतिहास पौराणिक काल से माना जाता है। उनाकोटि की सबसे खास बात यहां मौजूद असंख्य हिन्दू देवी-देवताओं की मूर्तियां हैं।जो इस स्थान को सबसे अलग बनाती हैं। उनाकोटि एक पहाड़ी इलाका है जो दूर-दूर तक घने जंगलों से भरा है। उनाकोटि लंबे समय से शोध का बड़ा विषय बना हुआ है, क्योंकि इस तरह जंगल की बीच जहां आसपास कोई बसावट नहीं एक साथ इतनी मूर्तियों का निर्माण कैसे संभव हो पाया।

उनाकोटि में दो तरह की मूर्तियों मिलती हैं, एक पत्थरों को काट कर बनाई गईं मूर्तियां और दूसरी पत्थरों पर उकेरी गईं मूर्तियां। यहां ज्यादातर हिन्दू धर्म से जुड़ी प्रतिमाएं हैं, जिनमें भगवान शिव, देवी दुर्गा, भगवान विष्णु, और गणेश भगवान आदि की मूर्तियां स्थित है। इस स्थान के मध्य में भगवान शिव की एक विशाल प्रतिमा मौजूद है, जिन्हें उनाकोटेश्वर के नाम से जाना जाता है।

भगवान शिव की यह मूर्ति लगभग 30 फीट ऊंची बनी हुई है। इसके अलावा भगवान शिव की विशाल प्रतिमा के साथ दो अन्य मूर्तियां भी मौजूद हैं, जिनमें से एक मां दुर्गा की मूर्ति है। साथ ही यहां तीन नंदी मूर्तियां भी दिखीं हैं। इसके अलावा यहां और भी ढेर सारी मूर्तियां बनी हुई हैं।

इस स्थान के मुख्य आकर्षणों में भगवान गणेश की अद्भुत मूर्तियां भी हैं। जिसमें गणेश की चार भुजाएं और बाहर की तरफ निकले तीन दांत को दर्शाया गया है। इसके अलावा यहां भगवान गणेश की चार दांत और आठ भुजाओं वाली दो और मूर्तियां भी हैं। इन अद्भुत मुर्तियों के कारण यह स्थान काफी काफी रोमांच पैदा करता है। यहां की अद्भुत मूर्तियों को देखने के लिए अब देश-विदेश के लोग आते हैं।

पौराणिक कथा के अनुसार इन मूर्तियों का निर्माण कालू नाम के शिल्पकार ने किया था। कथा के अनुसार यह कालू शिल्पकार भगवान शिव और माता पार्वती के साथ कैलाश पर्वत जाना जाता था, लेकिन यह मुमकिन नहीं था। शिल्पकार की जाने की जिद्द के कारण यह शर्त रखी गई कि अगर वो एक रात में एक करोड़ (एक कोटि) मूर्तियों का निर्माण कर देगा तो वो भगवान शिव और पार्वती के साथ कैलाश जा पाएगा। यह बात सुनते ही शिल्पकार काम में जुट गया, उसने पूरी रात मूर्तियां का निर्माण किया। लेकिन सुबह जब गिनती हुई तो पता चला उसमें एक मूर्ति कम है। इस तरह वो शिल्पकार धरती पर ही रह गया। स्थानीय भाषा में एक करोड़ में एक कम संख्या को उनाकोटि कहते हैं। इसलिए इस जगह का नाम उनाकोटि पड़ा।

आसपास के लोग यहां आकर इन मूर्तियों की पूजा भी करते हैं। यहां हर साल अप्रैल महीने के दौरान अशोकाष्टमी मेले का आयोजन किया जाता है। जिसमें शामिल होने के लिए दूर-दूर से हजारों श्रद्धालु यहां आते हैं। इसके अलाव यहां जनवरी के महीने में एक और छोटे त्योहार का आयोजन किया जाता है।

उनाकोटि त्रिपुरा के राजधानी शहर अगरतला से लगभग 125 किमी की दूरी पर स्थित है। आप उनाकोटि सड़क मार्ग के द्वारा पहुंच सकते हैं। त्रिपुरा के बड़े शहरों से यहां तक के लिए बस सेवा उपलब्ध है। यहां का नजदीकी हवाई अड्डा अगरतला है। रेल मार्ग से कुमारघाट तक जा सकते हैं। वहाँ से सड़क मार्ग से उनाकोटि पहुँच सकते हैं।

मुझे भी इस अद्भुत संसार को देखने का अवसर 31 अगस्त, 2019 को त्रिपुरा प्रवास के दौरान मिला।

हम कश्मीर के मामले में हस्तक्षेप नहीं करेंगे-तालिबानी नेता अनस हक्कानी

नई दिल्ली: तालिबान (Taliban) ने अमेरिकी सैनिकों की वापसी के बाद अफगानिस्तान पर अब पूरी तरह कब्जा कर लिया है. इस बीच पाकिस्तान तालिबान को भारत के खिलाफ उकसाने में लगा है और वह कश्मीर को लेकर साजिश रचने की कोशिश कर रहा है, लेकिन तालिबान ने पाकिस्तान की नापाक उम्मीदों को बड़ा झटका दिया है और साफ किया है कि वह कश्मीर मुद्दे पर किसी तरह का दखल नहीं देगा.

तालिबान ने कश्मीर को बताया आंतरिक मुद्दा

सीएनएन-न्यूज18 के बात करते हुए तालिबानी नेता अनस हक्कानी (Anas Haqqani) ने कश्मीर मुद्दे को भारत और पाकिस्तान का आंतरिक मामला बताया और कहा कि हम कश्मीर के मामले में हस्तक्षेप नहीं करेंगे. बता दें कि अनस हक्कानी, हक्कानी नेटवर्क के संस्थापक जलालुद्दीन हक्कानी के सबसे छोटे बेटे हैं.

कश्मीर अधिकार क्षेत्र का हिस्सा नहीं: हक्कानी

अनस हक्कानी से पूछा गया कि पाकिस्तान हक्कानी नेटवर्क के बेहद करीब है और वह कश्मीर में लगातार दखल दे रहा है. क्या आप भी पाकिस्तान को समर्थन देने के लिए कश्मीर में दखल देंगे? इस पर उन्होंने कहा, ‘कश्मीर हमारे अधिकार क्षेत्र का हिस्सा नहीं है और हस्तक्षेप नीति के खिलाफ है. हम अपनी नीति के खिलाफ कैसे जा सकते हैं? इसलिए यह स्पष्ट है कि हम कश्मीर में हस्तक्षेप नहीं करेंगे.’

अब गूगल की सहायता से आँखे करेंगी दिल की बिमारियों की स्कैनिंग

गूगल और उसके स्वास्थ्य-तकनीकी में सहयोगी Verily के वैज्ञानिक ने इंसानों में हार्ट की बीमारी का पता लगाने का एक तरीका ढूंढ़ निकाला है। कंपनी ऑर्टिफिशियल इंटेलीजेंस से मरीज की ऑख के रेटिना को स्कैन करेगी और हार्ट के बीमारी का पता लगाएगी। कंपनी का सॉफ्टवेयर किसी की वास्तविक उम्र और ब्लड प्रेशर के अलावा यह भी बताने में सक्षम है कि व्यक्ति स्मोकिंग करता है या नहीं।

गूगल का यह सॉफ्टवेयर ऑख की रेटिना को स्कैन हार्ट की बीमारी के कारण के बारे में भी बता सकता है। इस एल्गोरिदम से डॉक्टरों को हार्ट से संबंधित बीमारी का इलाज करने में आसानी होगी और समय की भी बचत होगी। इस सॉफ्टवेयर से स्कैन कराने के बाद आपको ब्लड टेस्ट कराने की जरूरत नहीं पड़ेगी। लेकिन इसे क्लिनिकल मेथड के तौर पर अपनाने से पहले इसका कई बार टेस्ट जरूरी है।  

गूगल और Verily के वैज्ञानिक ने इस एल्गोरिदम से करीब 3 लाख मरीजों का मेडिकल डाटासेट तैयार किया और उसका विश्लेषण किया। इसमें ऑख के स्कैन के साथ ही जनरल मेडिकल डाटा भी है। वैज्ञानिकों ने आंखों का स्कैन करने के बाद उसका विश्लेषण किया।  

गूगल एल्गोरिदम के सामने दो इंसान की रेटिना इमेज प्रस्तुत की गई। एक इंसान पिछले 5 साल से हृदय की बीमारी से पीड़ित था, जबकि दूसरा स्वस्थ था। गूगल एल्गोरिदम ने दोनों को बारे में सटीक जानकारी दी। गूगल एल्गोरिदम ने हृदय की बीमारी से पीड़ित के बारे में बताया कि इसमें 70 फीसदी हार्ट अटैक का खतरा है। जबकि ब्लड टेस्च कराने पर पता चला कि इस व्यक्ति में 72 फीसदी हार्ट अटैक का खतरा है।

FM मिनिस्टर सीतारमण शुभारम्भ करेगी NMP जिसमें प्राइवेट कंपनियों को ‘किराये’ पर दी जाएगी सरकारी प्रॉपर्टी

सरकार एक तरफ घाटे में चल रही सरकारी कंपनियों को बंद कर या प्राइवेट कंपनियों के हाथों बेचकर पैसा जुटाने में लगी है, तो दूसरी ओर सरकारी प्रोजेक्ट को प्राइवेट कंपनियों के साथ साझा कर या किराये पर देकर आमदनी बढ़ाने की तैयारी है. सरकार ने इस दिशा में अगला कदम बढ़ा दिया है जिसे ‘नेशनल एसेट मोनेटाइजेशन’ का नाम दिया गया है. इसके लिए सरकार ने नेशनल मोनेटाइजेशन पाइपलाइन (National Monetisation Pipeline) भी शुरू कर दिया है.

इस पाइपलाइन या कार्यक्रम की एक झलक बजट भाषण में वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने दिया था. बजट के दौरान निर्मला सीतारमण ने कहा था कि सरकार इंफ्रास्ट्रक्चर सेक्टर की ऐसी पुरानी परियोजनाओं के लिए राष्ट्रीय मौद्रिकरण कार्यक्रम (National Monetisation Pipeline) शुरू करेगी जहां इसकी संभावना दिखेगी. सीतारमण ने लोकसभा में 2021-22 का बजट पेश करते हुए इसकी घोषणा की. इस योजना के तहत गैस पाइपलाइन, राजमार्ग जैसी परियोजनाओं को निजी क्षेत्र के साथ साझा करने या किराये पर चढ़ाकर (monetise national assets) आय बढ़ाने का प्रस्ताव है.

क्या है नेशनल मोनेटाइजेशन पाइपलाइन

नेशनल मोनेटाइजेशन पाइपलाइन के तहत आठ मंत्रालयों की प्रॉपर्टी प्राइवेट कंपनियों के साथ साझा की जा सकती है या किराये पर दी जा सकती है. साझा करने का अर्थ होगा कि सरकारी और प्राइवेट कंपनियां मिलकर किसी प्रोजेक्ट को आगे बढ़ाएंगी जबकि किराये पर देने का मतलब है किसी सरकारी काम को प्राइवेट हाथों में देकर उससे किराया वसूला जाएगा. जिन आठ मंत्रालयों में यह काम होना है, उनमें रेलवे, टेलीकॉम, रोड ट्रांसपोर्ट और हाइवे, बिजली, युवा मामले और खेल, नागरिक उड्डयन, पेट्रोलियम और नेचुरल गैस, शिपिंग, पोर्ट्स और वाटरवेज.

नीति आयोग की तैयारी

‘इंडियन एक्सप्रेस’ की एक रिपोर्ट के मुताबिक, नीति आयोग वित्तीय वर्ष 21-24 के लिए नेशनल मोनेटाइजेशन पाइपलाइन (कार्यक्रम) बना रहा है. नीति आयोग ने इन आठ मंत्रालयों से कहा है कि वे अपनी प्रॉपर्टी की पहचान करें और बताएं जिन्हें पाइपलाइन में शामिल किया जा सकता है. रिपोर्ट के मुताबिक, सरकार सड़क, बिजली, तेल और गैस पाइपलाइन, टेलीकॉम टावर, स्पोर्ट्स स्टेडियम और अन्य संपत्तियों को प्राइवेट कंपनियों के साथ साझा किया जा सकता है या प्राइवेट कंपनियों को किराये पर दिया जा सकता है.

नितिन गडकरी ने क्या कहा

मोनेटाइजेशन या मौद्रिकरण के बारे में केंद्रीय मंत्री नितिन गडकरी बहुत पहले इशारा दे चुके हैं. केंद्रीय सड़क परिवहन, राजमार्ग एवं एमसएमई मंत्री नितिन गडकरी ने कहा था कि भारतीय राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण (NHAI) की अगले पांच साल में टोल-ऑपरेट-ट्रांसफर (टीओटी) के जरिये राजमार्गों का मोनेटाइजेशन कर एक लाख करोड़ रुपये जुटाने की योजना है. गडकरी ने कहा था, ‘एनएचएआई अगले पांच साल में टीओटी के मार्फत राजमार्गों का मौद्रिकरण कर एक लाख करोड़ रुपये जुटाना चाह रहा है. हमें शानदार प्रतिक्रियाएं मिल रही हैं. हमें विदेश के निवेशकों के साथ ही पेंशन कोषों से भी पेशकश प्राप्त हुई हैं.’

रेलवे में होगा बड़ा काम

ऐसे ही एक प्रयास के तहत सरकार ने 150 पैसेंजर ट्रेन को प्राइवेट कंपनियों को देने की तैयारी की है. एयरपोर्ट्स अथॉरिटी ऑफ इंडिया (Airports Authority of India) के कुछ काम प्राइवेट कंपनियों को दिए जाएंगे ताकि दिल्ली, मुंबई, बेंगलुरु और हैदराबाद एयरपोर्ट को ऑपरेट किया जा सके. रिपोर्ट के मुताबिक, दिल्ली स्थित जवाहरलाल नेहरू स्टेडियम को किसी प्राइवेट कंपनी को लीज या किराये पर दिया जा सकता है.

रिपोर्ट की मानें तो रेल मंत्रालय ने वित्त वर्ष 2021-22 के दौरान किराये से 90 हजार करोड़ रुपये कमाने की योजना बनाई है. इसके लिए मंत्रालय 150 पैसेंजर ट्रेन को प्राइवेट कंपनियों को दे सकता है. अंत मार्च तक देश के 50 रेलवे स्टेशनों को दुबारा विकसित करने के लिए आरएफपी (रिक्वेस्ट फॉर प्रोपोजल) और आरएफक्यू (रिक्वेस्ट फॉर क्वालिफिकेशन) जारी किया जा सकता है.

BSNL, MTNL का क्या होगा

सरकार एमटीएनएल, बीएसएनएल और भारतनेट का मोनेटाइजेशन करना चाहती है. इसी तरह खेल मंत्रालय देश के स्पोर्ट्स स्टेडियम का मोनेटाइजेशन करना चाहता है. खेल मंत्रालय ने इसके लिए 20 हजार करोड़ रुपये का लक्ष्य रखा है. स्पोर्ट्स स्टेडियम प्राइवेट कंपनियों को लीज पर दिए जाएंगे और स्टेडियम का ऑपरेशन और मेंटीनेंस कॉन्ट्रेक्ट पर दिया जा सकता है. कोरोना महामारी के दौरान जब अर्थव्यवस्था ढीली पड़ रही है, सरकारी खर्च बढ़ रहा है और आय लगातार घट रही है, तो सरकार मोनेटाइजेशन का काम तेजी से बढ़ाने पर विचार कर रही है.

    'No new videos.'

जाने मालवा के नाम के पीछे की कहानी

मालव जनजाति का उल्लेख सर्वप्रथम ई. पू. चौथी सदी में मिलता है, जब यह जाति सिकंदर से युद्ध में पराजित हुई थी। ये मालव प्रारंभ में पंजाब तथा राजपूताना क्षेत्रों के निवासी थी, लेकिन सिकंदर से पराजित होकर वे अवन्ति (वर्तमान उज्जैन) व उसके आस-पास के क्षेत्रों में बस गये । उन्होंने आकर (दशार्ण) तथा अवन्ति को अपनी राजनीतिक गतिविधियों का केंद्र बनाया। दशार्ण की राजधानी विदिशा थी तथा अवन्ति की राजधानी उज्जयिनी थी। कालांतर में यही दोनों प्रदेश मिलकर मालवा कहलाये। इस प्रकार एक भौगोलिक घटक के रूप में ‘मालवा’ का नाम लगभग प्रथम ईस्वी सदी में मिलता है। मालवा पर करिब 547 वर्षो तक भील राजाओ का शासन रहा,जिनमें राजा धन्ना भील प्रमुख रहे ।[1]। राजा धन्ना भील के ही एक उत्तराधिकारी ने 730 ईसा पूर्व में दिल्ली के सम्राट को चुनौती दी थी , इस प्रकार मालवा उस समय एक शक्तिशाली साम्राज्य था [2]

मौर्य शासक चंद्रगुप्त मौर्य के समय के शासक राजा गरिमध्वज भील थे , वे अपनी बहादुरी और शौर्य के लिए जाने जाते थे , चन्द्रगुप्त मौर्य के मालवा आक्रमण के दौरान उनका सामना भील राजा से हुआ , लेकिन चाणक्य की नीति के फलस्वरूप दोनों राजाओं में मित्रता हो गई [3]

source :- विक्कीपेडिया

    'No new videos.'
LIVE OFFLINE
Loading...