Category Archives: Innovative News

‘रिपली’ ने अंतरिक्ष सैर कराने के लिए भरी उड़ान,

स्पेस एक्स कंपनी ने फ़्लोरिडा के केनेडी स्पेस सेंटर से एक रॉकेट का सफलतापूर्वक परीक्षण किया है जो इंसानों को अंतरिक्ष में ले जाने के इरादे से बनाया गया है.

इस रॉकेट में फिलहाल किसी इंसान को नहीं भेजा गया है लेकिन सब कुछ ठीक रहा तो अमरीकी स्पेस एजेंसी इसे मंज़ूरी दे सकती है जिसके बाद अंतरिक्ष यात्रियों को ले जाने का रास्ता साफ़ हो जाएगा.

स्पेस एक्स के संस्थापक एलन मस्क ने कहा है कि स्पेस के कमर्शियल टूरिज़्म की दिशा से ये पहला क़दम साबित हो सकता है.

साल 2011 में अपने शटल रिटायर होने के बाद अमरीका अपने बूते किसी अंतरिक्ष यात्री को अंतरिक्ष में नहीं भेज पाया है.

अमरीका इसके लिए रूसी सोयूज़ यानों का इस्तेमाल कर रहा है

11 मिनिट के सफ़र के बाद स्पेस एक्स का फॉल्कन 9 रॉकेट और ड्रेगन क्रू कैप्सूल उस मार्ग पर थे जिस पर बढ़कर रविवार को एक निर्धारित समय और स्थान पर उसका इंटरनेशनल स्पेस स्टेशन से मेल होगा.

इसमें भले ही कोई अंतरिक्ष यात्री नहीं है, लेकिन एक कृत्रिम अंतरिक्ष यात्री को इसमें ज़रूर भेजा गया है.

इसमें सेंसर लगाए गए हैं जो ये बताएंगे कि इसमें सवार इंसान को किस तरह की परिस्थितियों का सामना करना पड़ेगा.

इस कृत्रिम अंतरिक्ष यात्री को स्पेस एक्स ने ‘रिपली’ नाम दिया है जो एलियन मूवीज़ का एक किरदार है.

स्पेस एक्स, कैलिफोर्निया की कंपनी है. एलन मस्क ने इसे स्पेस में कमर्शियल टूरिज्म के इरादे से बनाया है.

रॉकेट लांच के बाद एलन मस्क ने संवाददाताओं से कहा, ”साल 2002 से यहां तक पहुंचने में 17 साल लग गए. सच कहूं तो मैं भावनात्मक रूप से थोड़ा तनाव में आ गया था क्योंकि ये ‘सुपर स्ट्रेसफुल’ था.”

उन्होंने कहा, ”हमारा फोकस नासा की ज़रूरतों को पूरा करने पर है. लेकिन ड्रैगन कैप्सूल ठीक से काम करने लगे, उसके बाद कमाई के हिसाब से कस्टमर्स की तलाश करेंगे. नासा का रवैया इस मामले में सकारात्मक रहा है.”

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Human body as an antenna

A team of researchers from Microsoft has discovered a home automation system that could eliminate costly rewiring and outsmart even the smartest appliances.

The team has shown that the human body is a natural antenna. It reliably picks up the electromagnetic signals that emanate from all electrical systems and appliances in the home. These ambient signals can be used to create an affordable home automation system that controls household electronics with a pat on the wall or even a simple hand gesture.

The researchers conducted a set of experiments in 10 houses each homeowner was equipped with a laptop and data-acquisition device and had a sensor pad strapped to his or her neck.

Although the test equipment for their initial experiments was rather bulky, the researchers concluded that the sensing equipment could be incorporated easily into a watch or mobile phone.

 

By Daljeet S Walia

 

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नासा का अपना ‘पार्कर सोलर प्रोब’ जुलाई में लांच …!

सूर्य के करीब पहुंचने की मानव की पहली तैयारी में अमेरिकी अंतरिक्ष एजेंसी नासा अपना ‘पार्कर सोलर प्रोब’ जुलाई में लांच करने जा रहा है. ‘पार्कर सोलर प्रोब’ को फ्लोरिडा स्थित नासा के केनेडी स्पेस सेंटर से लांच कांप्लेक्स-37 से भेजा जाएगा. अमेरिकी अंतरिक्ष एजेंसी ने एक बयान में कहा कि दो घंटे का लांच विंडो 31 जुलाई को सुबह चार बजे खुलेगा और उसके बाद 19 अगस्त तक हर दिन सुबह चार बजे से थोड़ा पहले खुलेगा.

अंतरिक्ष के लिए रवाना होने के बाद अंतरिक्ष यान सीधा सूर्य के प्रभामंडल यानी कोरोना में पहुंचेगा, जोकि सूर्य के काफी करीब है जहां अब तक कोई मानव निर्मित वस्तु नहीं पहुंच पाई है. सूर्य की सतह से कोरोना की दूरी 38 लाख मील दूर है.

सूर्य की प्रचंड ताप और विकिरण को झेलते हुए इस मिशन से विज्ञान की मौलिक गुत्थियां सुलझाने में मदद मिलेगी कि सौर वात किससे चालित होती है. यहां वात से अभिप्राय सूर्य से निकलने वाले पदार्थ से है जिससे ग्रहीय वातावरण का निर्माण होता है और पृथ्वी के नजदीक अंतरिक्ष के मौसम पर प्रभाव डालता है.

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अंतरिक्ष एजेंसी NASA का अपना ‘पार्कर सोलर प्रोब’ जुलाई में लांच

सूर्य के करीब पहुंचने की मानव की पहली तैयारी

नई दिल्ली: सूर्य के करीब पहुंचने की मानव की पहली तैयारी में अमेरिकी अंतरिक्ष एजेंसी NASA अपना ‘पार्कर सोलर प्रोब’ जुलाई में लांच करने जा रहा है.

‘पार्कर सोलर प्रोब’ को फ्लोरिडा स्थित नासा के केनेडी स्पेस सेंटर से लांच कांप्लेक्स-37 से भेजा जाएगा. अमेरिकी अंतरिक्ष एजेंसी ने एक बयान में कहा कि दो घंटे का लांच विंडो 31 जुलाई को सुबह चार बजे खुलेगा और उसके बाद 19 अगस्त तक हर दिन सुबह चार बजे से थोड़ा पहले खुलेगा. 

अंतरिक्ष के लिए रवाना होने के बाद अंतरिक्ष यान सीधा सूर्य के प्रभामंडल यानी कोरोना में पहुंचेगा, जोकि सूर्य के काफी करीब है जहां अब तक कोई मानव निर्मित वस्तु नहीं पहुंच पाई है.

सूर्य की सतह से कोरोना की दूरी 38 लाख मील दूर है. सूर्य की प्रचंड ताप और विकिरण को झेलते हुए इस मिशन से विज्ञान की मौलिक गुत्थियां सुलझाने में मदद मिलेगी कि सौर वात किससे चालित होती है.

यहां वात से अभिप्राय सूर्य से निकलने वाले पदार्थ से है जिससे ग्रहीय वातावरण का निर्माण होता है और पृथ्वी के नजदीक अंतरिक्ष के मौसम पर प्रभाव डालता है. 

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मीडिया में पेड न्यूज़ बड़े पैमाने पर स्वीकार्य है-‘कोबरापोस्ट डॉटकॉम का स्टिंग ऑपरेशन..!

कोबरापोस्ट ने सात टीवी चैनलों, छह समाचारपत्रों, तीन वेब पोर्टलों और एक समाचार एजेंसी के कर्मचारियों पर ये स्टिंग ऑपरेशन किया है.

रिपोर्ट के मुताबिक कोबरापोस्ट ने दावा किया है कि भारत के कई मीडिया संस्थान हिंदुत्व की विचारधारा को बढ़ावा देने और विपक्ष के नेताओं पर लांछन लगाने के बदले 6 करोड़ रुपये से लेकर 50 करोड़ रुपये तक लेने के लिए तैयार थे.

कोबरापोस्ट ने स्टिंग ऑपरेशन का पहला हिस्सा अभी जारी किया है और कहा है कि इसका अगला हिस्सा अप्रैल में जारी किया जाएगा.

स्टिंग ऑपरेशन में कोबरापोस्ट के पत्रकार ने समाचार माध्यमों के प्रतिनिधियों को हिंदुत्व को बढ़ावा देने, विपक्ष के नेताओं पर लांछन लगाने के बदले कैश भुगतान करने, विज्ञापन ख़रीदने के प्रस्ताव दिए, जिन्हें स्वीकार कर लिया गया.

मीडिया संस्थानों के प्रतिनिधियों को किसानों को माओवादी बताने, न्यायिक फ़ैसलों पर सवाल उठाने, क़ानून के क्षेत्र के कुछ लोगों को बदनाम करने के बदले भी पैसे देने का प्रस्ताव दिया गया.

कोबरापोस्ट का कहना है कि लगभग सभी मीडिया संस्थान ये प्रस्ताव स्वीकार करने के लिए आतुर थे.

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जुगाड़ असम के लखीमपुर ज़िले के भाराली अब तक 140 से ज़्यादा चीजें बना चुके हैं…!!

उद्धब भाराली कहते हैं, “समस्याओं को सुलझाना मुझे अच्छा लगता है. मैं चाहता हूं कि लोग अपनी ज़िंदगी को अपनी कोशिशों से थोड़ा बेहतर और आत्मनिर्भर बनाएं.”असम के लखीमपुर ज़िले के भाराली इसी मंशा के साथ नई-नई खोजों में लगे हुए हैं. उन्होंने तीस साल पहले अपने परिवार के कर्ज़ को चुकाने के मकसद से यह शुरू किया था. लेकिन आज यह उनका जुनून बन चुका है.वह अब तक 140 से ज़्यादा चीजें बना चुके हैं. इनमें से कई चीज़ें व्यवसायिक तौर पर खरीदी-बेची जा रही हैं तो कई चीजों को अंतरराष्ट्रीय अवॉर्ड तक हासिल हो चुका है.

उनका कहना है कि उनका मुख्य मकसद लोगों की मदद करना रहा है. पूरे भारत में उन्हें उनके कृषि संबंधी नई खोजों के लिए जाना जाता है. लेकिन उनकी नई खोज से शारीरिक रूप से असमर्थ लोगों को मदद मिल रही है.

वो बताते हैं कि चूंकि भारत में सरकार की ओर से ऐसे लोगों को सीमित सहायता मिलती है इसलिए उनके जैसे लोगों को इसके समाधान के लिए आगे आना चाहिए.15 साल के राज रहमान जन्म से विकलांग पैदा हुए थे.भाराली ने उनके लिए एक साधारण सा उपकरण तैयार किया जो कि रोज़मर्रा की ज़िंदगी में इस्तेमाल होने वाली चीज़ों वेल्क्रो और चम्मच से बना हुआ था. इसे उनके हाथ की जगह पर लगाया गया. इसकी मदद से वो खाना खाते हैं और लिख पाते हैं.भाराली ने राज के लिए खास तरह के जूते भी तैयार किए हैं जिसकी मदद से राज आसानी से घूम फिर सकते हैं.राज बताते हैं, “मैं ख़ुद को लेकर काफी परेशान रहा करता था. लेकिन अब मैं ख़ुद को तनाव मुक्त महसूस करता हूं. मुझे इस बात की फ़िक्र नहीं करनी होती है कि मैं स्कूल जाने के लिए रेलवे लाइन कैसे पार कर पाऊंगा. अब बिना किसी परेशानी के चल सकता हूं.”वो कहते हैं, “मैं खुश हूं कि मैं अपना ख़याल ख़ुद रख सकता हूं.”

 

source- BBC

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हजारों मधुमक्खियों की सड़क हादसे में हुई मौत..!!

जब फायर डिर्पाटमेंट घटनास्‍थल पर पहुंचा तो देखा कि मधुमक्खियों को जिन डिब्‍बों में रखा गया था वो टूट गए थे. इन डिब्‍बों में कई मधुमक्खियां जिंदा थी जो लोगों के लिए खतरा बन सकती थी. इसलिए फायर विभाग के पास उन मधुमक्खियों को मार दिया.

अमेरिका के कैलीफोर्निया में हुए एक सड़क हादसे में हजारों मुधमक्खियों की मौत हो गई है. जब ये हादसा हुआ तो मुधमक्खियों को ट्रक से ले जाया जा रहा था.

बताया जा रहा है कि सड़क हादसे की जानकारी मिलते ही पुलिस घटनास्‍थल पर पहुंची तो देखा ट्रक ड्राइवर बुरी तरह जख्‍मी था और उसे पास अस्‍पताल में भर्ती कराया गया.

जानकारी मिलने पर जब फायर डिर्पाटमेंट घटनास्‍थल पर पहुंचा तो देखा कि मधुमक्खियों को जिन डिब्‍बों में रखा गया था वो टूट गए थे. इन डिब्‍बों में कई मधुमक्खियां जिंदा थी जो लोगों के लिए खतरा बन सकती थी. इसलिए फायर विभाग के पास उन मधुमक्खियों को मार दिया.

इन मधुमक्खियों को अगले वसंत में फलों, सब्जियों में परागण काम के लिए ले जाया जा रहा था. इन मधुमक्खियों की मौत होने से मालिक को काफी नुकसान हुआ है.

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जॉब नहीं फिर भी घर बैठे एक घंटे में लाखों कमा रही है ये लड़की..!!

ऑस्ट्रेलिया की रहने वाली चेल्सिया घर बैठे एक घंटे में 8 लाख रुपये तक कमा लेती है. इस खबर को पढ़कर आप भी हैरान रह जाएंगे. क्योंकि लाइफ को पूरा एन्जॉय करते हुए ये लड़की लाखों कमा रही है.

हर युवा का एक सपना होता है कि उसकी भी पढ़ाई करने के बाद अच्छी जॉब लग जाए. कुछ तो सारे शौक छोड़कर लोग जॉब करने लग जाते हैं. क्या हो, अगर आपको अपने पसंद का काम मिल जाए और कमाई भी शानदार होने लगे ? ऐसा होना थोड़ा मुश्किल है लेकिन नामुमकिन कुछ भी नहीं. अगर बिना ऑफिस जाए घर बैठे लाखों रुपये दे दिए जाएं तो क्या चाहिए. लेकिन एक लड़की ने ऐसा मुमकिन कर दिखाया है. जो घर बैठे एक घंटे में 8 लाख रुपये तक कमा लेती है. इस खबर को पढ़कर आप भी हैरान रह जाएंगे. क्योंकि लाइफ को पूरा एन्जॉय करते हुए ये लड़की लाखों कमा रही है. आइए जानते हैं कैसे….

गेम खेलकर कमाती हैं लाखों रुपये
ऑस्ट्रेलिया की रहने वाली चेल्सिया को ऑफिस में बैठकर कंप्यूटर के सामने काम करना बिलकुल पसंद नहीं था. कमाने के लिए वो कोई दूसरी फील्ड देख रही थीं जिसमें वो आराम से पैसा कमा सकें. जिसके बाद उन्हें ऑनलाइन वीडियो गेम से पैसा कमाने का आइडिया आया. जिसके बाद उन्होंने वीडियो गेम खेलना शुरू कर दिया. चेल्सिया एक घंटे वीडियो गेम खेलने के करीब 8 लाख रुपये लेती हैं. उनके कुल 35 लाख फोलॉअर्स भी हैं.

कैसे मिलते हैं इतने पैसे
जिस वक्त ये गेम खेल रही होती हैं. उस वक्त लोग गेम लाइव देखते हैं. लाइव स्ट्रीमिंग के दौरान सब्स्क्रिप्शन, ऐड और स्पॉन्सर मिलने के चलते उन्हें करीब 8 लाख तक मिल पाते हैं. चेल्सिया को पार्टीज करने का काफी शौक है, वो सोशल मीडिया पर अपनी कई फोटोज अपलोड करती रही हैं. उन्होंने फार्मेसी में डिग्री ली है. लेकिन उनको जॉब नहीं करनी थी. उनका कहना है कि जितनी कमाई वो गेमिंग में कर लेती हैं उतनी वो जॉब करके कभी नहीं कर पातीं. यही नहीं इस कमाई से वो अपने पूरे परिवार का भी खर्चा उठा लेती हैं.

चैरेटी भी करती हैं
लोगों के कल्याण के लिए वो इन पैसों को चैरिटी में भी लगाती हैं. वो कई सामाजिक कार्य करती रहती हैं. कई फंक्शंस में भी वो हिस्सा लेती हैं और जिनकों पैसों की जरूरत पड़ती है वो चैरिटी कर देती हैं.

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खोजे गूगल अर्थ ने सऊदी अरब में पत्थर के ‘प्राचीन द्वार’

वैज्ञानिकों का मानना है कि इनका निर्माण 2000 से 9000 साल पहले किया गया होगा.

वैज्ञानिकों ने गूगल अर्थ इमेजरी की मदद से सऊदी अरब में पत्थर के 400 ऐसे ढांचों का पता लगाया है, जिनका पहले कभी किसी दस्तावेजों में जिक्र नहीं था. इन ढांचों को ‘गेट्स’ के नाम से जाना जाता है. यूनिवर्सिटी ऑफ वेस्टर्न ऑस्ट्रेलिया में अनुसंधानकर्ता डेविड केनेडी ने बताया कि सऊदी अरब को मुख्य रूप से बंजर पहाड़ों और रेगिस्तान के लिए जाना जाता है, लेकिन इसमें बड़ी संख्या में पुरातात्विक स्थल भी है. इनका अभी पता लगाया जाना  है और इन्हें दर्ज किया जाना और नक्शे में दर्शाया जाना बाकी है.

केनेडी ने कहा, जमीनी स्तर पर आप उन्हें ऐसे नहीं देख सकते कि वे आपको समझ आ सकें, लेकिन जब आप कुछ 100 फुट ऊपर उठते हैं या और भी ऊपर उपग्रह से वे बहुत खूबसूरत लगते हैं. गूगल अर्थ से मिली छवियों में ऊंचाई से ये ढांचे खेतों मे पड़े द्वारों की तरह प्रतीत होते हैं.

उन्होंने कहा, मैं उन्हें ‘गेट्स’ कह रहा हूं, क्योंकि जब आप उन्हें ऊपर से देखते हैं तो खेत में पड़े सामान्य द्वार की तरह प्रतीत होते हैं. अनुसंधानकर्ताओं ने कहा कि ये ढांचे ऐसे नहीं प्रतीत होते कि वहां लोग रहे हों. न ही ये जानवरों को फंसाने वाले जाल या शवों के निपटान स्थल प्रतीत होते हैं.यह एक रहस्य है कि इनका मकसद क्या होगा.

उन्होंने कहा कि इस बारे में अधिक जानकारी नहीं है कि ये ढांचे किन लोगों ने बनाए, लेकिन ऐसा माना जा रहा है कि इनका निर्माण 2000 से 9000 साल पहले किया गया होगा.

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जगह जहां शादी के बाद दूल्हा-दुल्हन को करना पड़ता है कुछ ऐसा जो आप सोच भी नहीं सकते…!!

दुनिया में हजारों जातियों के लोग निवास करते है तथा इन सभी जातियों के अलग-अलग रिति-रिवाज होते है, इर जाति की अपनी-अपनी परंपरा होती है जिससे इनकी पहचान बनती है। आपको बता दे की अलग अलग जाति के लोगों मे शादी से जुड़ी परंपरायें भी अलग होती है और कई स्थानों पर ये रस्म-रिवाज इतने ज्यादा अजीब होते हैं कि इंसान उसके बारे में कल्पना भी नहीं सकता।

इस दुनिया में बहुत से समुदाय ऐसे हैं, जिनके रीति रिवाज भी विचित्र होते हैं और इतने अलग कि हमें उन पर आश्चर्य भी होता है। कुछ ऐसे ही अजीब और अनोखे परंपरा से आपको वाकिफ कराते है, हम बात कर रहे है इंडोनेशिया में टीडांग समुदाय की जहां शादी से जुड़े रीति-रिवाज दुनिया में एकदम अनोखे है, जिन्हे सुन आपका मुह खुला का खुला रह जाएगा की ऐसा भी होत है क्या। असल में इस देश में शादी के यहां दूल्हा-दुल्हन को अगले तीन दिन तक शौचालय जाने की इजाजत नहीं होती।

जी हाँ, आप बिलकुल सही सुन रहे है शादी के अगले तीन दिन तक एक बार भी बाथरूम नहीं जा सकते। आपको यह सब बातें सुनने में यह चाहे भले ही अजीब लगे लेकिन वहाँ के लोगों के लिए यह एक आम रिवाज है। आपको बताना चाहेंगे की इसके पीछे एक खास वजह है, असल में वहाँ के लोगों का मानना है कि यदि शादी के तीन दिनों तक अगर दूल्हा और दूल्हन घर के शौचालय का प्रयोग करते है तो इससे उनकी किस्मत को बुरी नजर लग जाएगी और ऐसा भी हो सकता है की उनकी शादी जल्दी ही टूट जाए या किसी की मौत तक हो सकती है।

बताना चाहेंगे की तीन दिन बिना बाथरूम गए रेह पाना बहुत ही मुश्किल कम है इसलिए नए जोड़ों को अगले तीन दिनों तक बहुत ही हल्का खाना दिया जाता है। बता दे की तीन दिन इस रिवाज को निभाने के बाद दोनों नहाते हैं और अपनी नई जिंदगी की शुरूआत करते हैं।

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