Category Archives: Lifestyle

टायकून काइली जेनर को फोर्ब्स मैगजीन ने साल 2020 में सबसे ज्यादा कमाई करने वाली सेलेब्रिटी

Kylie Jenner

काइली की हैरतअंगेज कमाई का अंदाजा इसी से लगाया जा सकता है कि उनके नीचे मौजूद टॉप चार सेलेब्स की कमाई मिलाकर भी काइली से अधिक नहीं है. काइली के बाद अमेरिकन रैपर केनी वेस्ट, मशहूर टेनिस प्लेयर रोजर फेडरर, पुर्तगाल के सुपरस्टार फुटबॉलर क्रिस्टियानो रोनाल्डो और अर्जेंटीना के सुपरस्टार फुटबॉलर लियोनेल मेसी का नाम है.  

इस लिस्ट में दूसरे नंबर पर अमेरिका के रैपर कैनी वेस्ट का नाम है. उन्होंने इस साल 170 मिलियन डॉलर्स यानी लगभग साढ़े 12 अरब की कमाई की है. वेस्ट और काइली के बीच काइली की बहन किम कार्दशियां के पति हैं. कैनी इससे पहले तब चर्चा में आए थे जब उन्होंने अमेरिका के राष्ट्रपति चुनाव लड़ने की घोषणा की थी हालांकि उन्होंने कुछ दिनों बाद ही अपने फैसले को बदल भी लिया था. 

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Nokia PureBook X14 लैपटॉप भारत में लॉन्च

Nokia PureBook X14 लैपटॉप को भारत में लॉन्च कर दिया गया है और इसकी बिक्री फ्लिपकार्ट के जरिए की जाएगी. ये नोकिया का पहला लैपटॉप है. इसमें Intel 10th-जेनरेशन प्रोसेसर दिया गया है और Windows 10 प्री-इंस्टॉल्ड है.

इसे मॉडल नंबर NKi510UL85S के साथ सिंगल कॉन्फिगरेशन में उतारा गया है. इसे मैट ब्लैक फिनिशिंग के साथ पेश किया गया है. इसकी स्क्रीन में साइड्स में स्लिम बेजल्स हैं और इसमें बड़ा टच पैड मौजूद है.

Nokia PureBook X14 की कीमत 59,990 रुपये रखी गई है और 18 दिसंबर से फ्लिपकार्ट से इसके लिए प्री-बुकिंग की जा सकेगी. फिलहाल कंपनी ने इसके लिए सेल डेट की घोषणा नहीं की है.

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जाने अफ्रीका के रोचक रीति-रिवाज़…!

बुल-जंपिंग

मास्सई व् इथोपिया के आदिवासियों में ये खेल मुख्यतः खेला जाता है l इसमें यंग अपने पुरुषत्व को साबित करने के लिए नंगे होकर दौड़ते है ,और जम्प करके बैल के ऊपर बैठते है ,इस तरह एक बैल से दुसरे बैलो पर कूदते हुए अपने पुरुषत्व को दर्शाते है l

दुल्हन का किडनैप

लातुका आदिवासी में शादी की अनोखी प्रथा है, इस समुदाय के लोगो में जब किसी को शादी करना होती है, तो तो वो अपने मन-पसंद की लड़की को काबिले से भगा ले जाता है, तत्पश्चात लड़के के घर का सबसे बड़ा मुखिया लड़की के घर जाकर सम्बन्ध को विधिवत बनने की मांग करता है l लड़की पक्ष की मंजूरी मिलने के पश्चात लड़के के घर का मुखिया लड़के की खूब पिटाई करता है , जो उसके शादी पक्की होने की निशानी मानी जाती है l

थूककर बुरी आत्मा को दूर करते है

साउथ अफ्रीका की बड़ी प्रचलित परंपरा है गिसमे हर शुभ कार्य को थूक कर किया जाता है l यहाँ पर रहने वाली प्रजातियों का मानना है की ऐसा करने से बुरी आत्मा नहीं आती है l

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अदिति सिंह व राहुल गाँधी की शादी की अफवाह क्यों उड़ी..!

47 वर्षीय राहुल गांधी का नाम जब एक लड़की के साथ जुड़ा तो तस्वीरें इंटरनेट पर वायरल हो गईं.

सोशल मीडिया पर खोज-खोजकर राहुल गांधी की लड़की के साथ तस्वीरें शेयर की जाने लगीं.

इसी बीच, तस्वीर में दिखने वाली लड़की ने इंटरनेट पर चल रहीं तमाम अटकलों पर विराम लगाते हुए कहा, “ये अफवाह मात्र है. अफवाह फैलाने वाले बाज आएं.”

लड़की ने ये भी कहा कि जिन राहुल गांधी से उनका नाम जोड़ा जा रहा था, वो उन्हें अपना “भाई” मानती हैं.

राहुल को अपना भाई मानने वाली इस महिला का नाम अदिति सिंह हैं, जो रायबरेली सदर सीट से कांग्रेस की विधायक हैं.

अदिति ने इस अफ़वाह के पीछे इशारों-इशारों में भाजपा का हाथ बताया और इसे कर्नाटक चुनाव से लोगों का ध्यान भटकाने की साज़िश बताया.

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डेनियल वायट ने विराट कोहली को किया प्रपोज..!!!!

विराट कोहली की फैन फॉलोइंग पूरी दुनिय में है. लेकिन जो सबसे ज्यादा विराट को फॉलो करती हैं तो वो हैं महिला इंग्लैंड टीम की सदस्य डेनियल वायट.

आईसीसी महिला वर्ल्ड कप 2017 के फाइनल में भारतीय टीम को हराकर वो चर्चा में आई थीं. लेकिन उससे पहले वो विराट कोहली की वजह से चर्चा में थीं.

2014 में विराट कोहली को उन्होंने ट्विटर पर प्रपोज किया था. उन्होंने ट्वीट करते हुए शादी के लिए प्रपोज किया था.साउथ अफ्रीका के खिलाफ 2014 टी-20 वर्ल्ड कप में शानदार परफॉर्म के बाद उन्होंने प्रपोज किया था.

जिसके बाद इंडिया और इंग्लैंड के बीच वॉर्म-अप मैच के दौरान उन्होंने वायट को बल्ला गिफ्ट किया था. वायट अब टी-20 सीरीज खेलने के लिए इंडिया दौरे पर आ रही हैं. अब वो उन्ही के बल्ले को सीक्रेट वेपन के तौर पर यूज करने वाली हैं. 

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जब पत्रकार कुलदीप नैयर लाल बहादुर शास्त्री का संदेश लेकर मोरारजी देसाई के पास गए

भारत में राजनीतिक रूप से महत्वाकांक्षी होना बहुत अच्छा नहीं माना जाता है, कम से कम सार्वजनिक रूप से तो हरगिज़ नहीं. लेकिन मोरारजी भाई ने प्रधानमंत्री बनने की अपनी इच्छा को कभी नहीं छिपाया.

नेहरू के निधन के बाद मशहूर पत्रकार कुलदीप नैयर लाल बहादुर शास्त्री का संदेश लेकर मोरारजी देसाई के पास गए कि ‘अगर वो जयप्रकाश नारायण और इंदिरा गांधी में से किसी एक नाम पर सहमत हो जाते हैं, तो मैं प्रधानमंत्री का चुनाव नहीं लड़ूंगा.’

जब नैयर ने शास्त्री का संदेश मोरारजी देसाई को दिया, तो उन्होंने छूटते ही कहा, “जयप्रकाश नारायण? वो तो संभ्रमित व्यक्ति हैं…और इंदिरा गांधी? दैट चिट ऑफ़ ए गर्ल.”

मोरारजी के बेटे कांति देसाई ने नैयर से कहा, “अपने शास्त्री जी से कहिए कि बैठ जाएं. मोरारजी देसाई को वो हरा नहीं पाएंगे.”

कुलदीप नैयर ने आते ही यूएनआई टिकर पर कहानी की जिसका शीर्षक था, “मोरारजी ने सबसे पहले अपनी टोपी रिंग में फेंकी.”

इस कहानी का असर ये हुआ कि अगले दिन संसद भवन में कामराज ने कुलदीप नैयर के कान में फुसफुसा कर कहा, “थैंक यू.”

शास्त्री ने भी उन्हें फ़ौरन बुलाकर कहा, “अब कोई कहानी लिखने की ज़रूरत नहीं. मुकाबला ख़त्म हो चुका है.”

मोरारजी देसाई ने इसके लिए कुलदीप नैयर को कभी माफ़ नहीं किया.

उन्होंने समझाने की कोशिश की कि इसके लिए उन्हें अपने समर्थकों को दोष देना चाहिए जो नेहरू की अंत्येष्टि के दिन ही लोगों से कहते फिर रहे थे कि प्रधानमंत्री पद उनकी जेब में है.

मोरारजी देसाई की प्रधानमंत्री बनने की इस खुलेआम चाहत ने माहौल उनके ख़िलाफ़ कर दिया और लालबहादुर शास्त्री भारत के प्रधानमंत्री बनाए गए.

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छात्रो के happening life के लिए पहला चॉइस बन रहा आईपीएस कॉलेज,सिम्बायोसिस, और यूटीडी कैंपस..!..!

स्कूल  से पढ़ने के बाद  स्टूडेंट एक ऐसे कॉलेज का सपना देखता है जहाँ उसका हर तरह से विकास हो सके , वो ज़िन्दगी को बेहतर तरीके से जीना सीख सके . वह कॉलेज में एक बेहतर कैंपस के साथ-साथ वह की लाइफ स्टाइल को भी अडॉप्ट करना चाहता है , ताकि वह दोस्तों एवं सोसायटी में अपना अहम् स्थान बना सके l

लाइफ स्टाइल की ये सारी चीज़े उसे आईपीएस अकादमी के कैंपस में आकर मिलती है l तकरीबन 70 एकड़ में फैला कॉलेज कैंपस एक बेहतरीन आर्किटेक्ट का जीता जगता उदाहरण है l एक ही कैंपस में विभिन्न कोर्स के 16 कॉलेज है l पर्यावरण व् ग्रीनरी से भरपूर आईपीएस अकादमी में पढ़ने का मज़ा ही कुछ और है l

फ्री लाइफ स्टाइल में यहाँ आपको हर तरह की opportunity उपलब्ध है , फिर चाहे वो कला या संगीत से , या खेल से हो यहाँ पर वर्ल्ड क्लास सुविधाये है l यहाँ के लाखो विद्यार्थी आज देश विदेश में अपना परचम फहरा रहे है l

ये देश के उन गिने -चुने  कॉलेज में है जहाँ मेडिकल को छोड़कर हर एक कोर्स उपलब्ध है l

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जुगाड़ असम के लखीमपुर ज़िले के भाराली अब तक 140 से ज़्यादा चीजें बना चुके हैं…!!

उद्धब भाराली कहते हैं, “समस्याओं को सुलझाना मुझे अच्छा लगता है. मैं चाहता हूं कि लोग अपनी ज़िंदगी को अपनी कोशिशों से थोड़ा बेहतर और आत्मनिर्भर बनाएं.”असम के लखीमपुर ज़िले के भाराली इसी मंशा के साथ नई-नई खोजों में लगे हुए हैं. उन्होंने तीस साल पहले अपने परिवार के कर्ज़ को चुकाने के मकसद से यह शुरू किया था. लेकिन आज यह उनका जुनून बन चुका है.वह अब तक 140 से ज़्यादा चीजें बना चुके हैं. इनमें से कई चीज़ें व्यवसायिक तौर पर खरीदी-बेची जा रही हैं तो कई चीजों को अंतरराष्ट्रीय अवॉर्ड तक हासिल हो चुका है.

उनका कहना है कि उनका मुख्य मकसद लोगों की मदद करना रहा है. पूरे भारत में उन्हें उनके कृषि संबंधी नई खोजों के लिए जाना जाता है. लेकिन उनकी नई खोज से शारीरिक रूप से असमर्थ लोगों को मदद मिल रही है.

वो बताते हैं कि चूंकि भारत में सरकार की ओर से ऐसे लोगों को सीमित सहायता मिलती है इसलिए उनके जैसे लोगों को इसके समाधान के लिए आगे आना चाहिए.15 साल के राज रहमान जन्म से विकलांग पैदा हुए थे.भाराली ने उनके लिए एक साधारण सा उपकरण तैयार किया जो कि रोज़मर्रा की ज़िंदगी में इस्तेमाल होने वाली चीज़ों वेल्क्रो और चम्मच से बना हुआ था. इसे उनके हाथ की जगह पर लगाया गया. इसकी मदद से वो खाना खाते हैं और लिख पाते हैं.भाराली ने राज के लिए खास तरह के जूते भी तैयार किए हैं जिसकी मदद से राज आसानी से घूम फिर सकते हैं.राज बताते हैं, “मैं ख़ुद को लेकर काफी परेशान रहा करता था. लेकिन अब मैं ख़ुद को तनाव मुक्त महसूस करता हूं. मुझे इस बात की फ़िक्र नहीं करनी होती है कि मैं स्कूल जाने के लिए रेलवे लाइन कैसे पार कर पाऊंगा. अब बिना किसी परेशानी के चल सकता हूं.”वो कहते हैं, “मैं खुश हूं कि मैं अपना ख़याल ख़ुद रख सकता हूं.”

 

source- BBC

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अपने रिलेशनश‍िप को टूटने से बचाना है तो कीजिए बस ये एक काम..!!!

आजकल शादियों के टूटने का सबसे बड़ा कारण है कॉम्प्रोमाइज़ न करना. आपसी बातचीत से सब कुछ ठीक करने या फिर सुलझाने के बजाय हम लोग अलग रहना पसंद करते हैं.

टेक्नोलॉजी ने हमें मॉडर्न बनाने के साथ ही काफी ‘पिकी’ भी बना दिया है. यानी अगर हमें कोई चीज़ नहीं पसंद तो हम उसे लेफ्ट स्वाइप कर हटा देते हैं. अगर कुछ ठीक न लगे या पसंद न आए तो हम उसे बदल देते हैं. कुछ ऐसा ही हुआ है हमारे रिलेशनशिप के साथ भी. जब हमें हमारे रिलेशनशिप में भी वो नही मिलता जो हमें चाहिए, तो हम यहां भी अपनी पसंद बदल लेते हैं. आजकल के रिलेशनशिप में कॉम्प्रोमाइज़ करने जैसा कुछ नहीं बचा है. क्य़ोंकि हम इससे पहले मूव ऑन करना पसंद करते हैं.

लेकिन ऐसा हमेशा से नहीं था. हमारे पेरेंट्स की जनरेशन में 30 से 40 साल तक शादी का टिकना कोई बड़ी बात नही थी. वहीं, आजकल शादियों के टूटने का सबसे बड़ा कारण है कॉम्प्रोमाइज़ न करना. आजकल आपसी बातचीत से सब कुछ ठीक करने या फिर सुलझाने के बजाय हम लोग अलग रहना पसंद करते हैं. रिश्तों को टूटने की कगार पर लाने वाली सीमा को हम अनदेखा करने लगे हैं. यह न सिर्फ हमारे रिलेशनशिप के लिए हानिकारक है बल्कि खुद के लिए भी नुकसानदेय है.

तो क्या आजकल के मॉडर्न रिलेशनशिप में कॉम्प्रोमाइज़ संभव है?
रिलेशनश‍िप काउंसलर डॉक्‍टर मीनू भोंसले के मुताबिक, ‘आजकल ‘कॉम्प्रोमाइज़’ शब्द का अर्थ मॉडर्न कपल खुद की हार की तरह लेते हैं. ऐसे में इनके लिए ‘नेगोसिएशन’ शब्द बिल्कुल ठीक होगा. क्योंकि इससे दोनों को ही ऐसा नहीं लगेगा कि वो एक-दूसरे से हार रहे हैं. ऐसे में छोटे-मोटे मसलों में हार-जीत को आसानी से सुलझाया जा सकेगा. लेकिन बात जब कॉम्प्रोमाइज़ की आती है तो ऐसे में सिर्फ दोनों की आपसी समझ से ही मामला सुलझ सकता है.’

डॉक्‍टर मीनू का कहना है कि ‘कॉम्प्रोमाइज़’ भी कोई बड़ा विषय नहीं है. अगर दोनों पार्टनर की समझ एक जैसी हो यानी अगर दोनों तरफ से ही अपने रिश्ते को बचाने की कोशिश हो तो ‘कॉम्प्रोमाइज़’ संभव है. इसके लिए बस दोनों को नेगोशिएट करने का मन होना चाहिए.

रिलेशनश‍िप में हमेशा यह याद रख‍िए कि यह कोई स्कोर कार्ड नहीं जहां जीतकर आपको नंबर बढ़ाने हैं. नेगोसिएशन का प्रोसेसआपके रिलेशनशिप को ठीक करने का  सिर्फ एक माध्यम है. जिसके बाद आप दोनों एक बार फिर से खुशी-खुशी रह सकें. इस प्रोसेस का मकसद आपकी इच्छाओं या आपके सपनों को एक बार फिर से पॉज़िटिव एनर्जी देना होता है. ताकि आप दोनों हमेशा अपने सपनों और इच्छाओं के साथ फिर से अपने पार्टनर के साथ हंसी-खुशी रह सकें.

आपको बता दें कि डॉक्‍टर मीनू मुंबई के हार्ट काउंसलिंग सेंटर में एक सीनियर कंसलटिंग साइकोथेरेपिस्ट और रिलेशनशिप काउंसल हैं. वो वहां पिछले तीस सालों से कपल्स के बिगड़े रिश्तों को सुलझा रही हैं.

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क्या सच में डर के आगे जीत है आओ जाने..!!!

हर दिन को ऐसे ही जिएं और जीत तक पहुंचने के लिए डर का दुर्ग जीतने की जरूरत नहीं रहेगी.

क्या आप भी किसी गाने को सुनकर या कोई एड देखकर जोश से भर जाते हैं? क्या डर के आगे जीत…जैसी बातें आपके खून की रफ्तार बढ़ा देती हैं? क्या आपको भी लगता है कि आप भी एक से दूसरे घर की ऊंची छत पर वैसे ही स्टंट कर सकते हैं या जो चाहें वो हासिल कर सकते हैं? बिल्कुल. आप ये सब बिल्कुल कर सकते हैं लेकिन किसी गाने, किसी टैग लाइन या सॉफ्ट ड्रिंक के बूते नहीं.

अगर शब्द आपके खून की रफ्तार बढ़ाने का काम करते हैं तो शब्दों के जाते ही जोश भी ठंडा पड़ सकता है. अगर ठंडा पीने से आपके इरादों को गर्मी मिलती है तो ठंडे की बोतल खत्म होते ही वो भी खत्म हो सकती है. इसलिए किसी इंस्टैट जोश को नहीं, बल्कि लॉन्ग टर्म हिम्मत को जगाना जरूरी है. डर का विकेट एकाएक नहीं गिरता. इसके लिए लंबी मेहनत, लगन और दृढ़ता चाहिए.

 

ये डर ही तो है, जो हमें हिम्मत का मौका देता है
साहस तो तभी है, जब आपके भीतर किसी चीज का डर हो. कई बार ये डर इस हद तक हावी हो जाता है कि हमें या तो दुस्साहस के लिए उकसाने लगता है या फिर हम डर को ही सच मानकर बैठ जाते हैं. डर से निजात पाने का सबसे अच्छा तरीका यही है कि हम उसे पहचानें.

अपने डर को पहचानें. उसे नाम दें. उसे एक तीसरे व्यक्ति की तरह संबोधित करें और आप पाएंगे कि वो आपके भीतर सिर्फ एक किराएदार की हैसियत से रह रहा था. आपने नोटिस दिया और उसने कमरा खाली किया.

इस घोड़े की लगाम आपके हाथ में है
कल्पना यूं तो बड़ी खूबसूरत शै है, लेकिन डर के मामले में यही हमारी सबसे बड़ी दुश्मन बन जाती है. हम जितनी ज्यादा कल्पना करेंगे, हमारा डर उतना ही बड़ा होकर हमें डराएगा. लंबी-गहरी सांस लें और अपने डर को 1 से 10 तक नंबर दें. देखें कि आपका डर किस पायदान पर है.

आप जैसे ही ये करते हैं, दिल पर दिमाग हावी हो जाता है और डर अपने-आप कम होने लगता है. वे सारे काम करें, जिनसे डर लगता है, गणित से लेकर घोड़ा भगाने तक. भाषण देने से लेकर प्यार करने तक. उस काम से शुरुआत करें जो सबसे ज्यादा डराए. उस तक पहुंचने के लिए खुद को छोटे-छोटे लक्ष्य दें और फिर उसे जीतें.

डर को दें उल्टी दिशा
कल्पना करें कि आप कुछ ही देर में मरने वाले हैं. आपके आसपास लोग जमा हैं, रो रहे हैं, प्यार कर रहे हैं. याद करें कि आप कौन सा काम करना चाहते थे और नहीं कर सके. क्या आपने उसके लिए पूरी कोशिश की? अधूरी कोशिश आपको चैन से मरने भी नहीं देगी.

तो अब आप मौत से पहले के उस कुछ देर का इस्तेमाल अपने डर को जीतने के लिए करें. इसके लिए किसी सॉफ्ट ड्रिंक या झकझोरने वाले संगीत की जरूरत नहीं. ड्रिंक की झाग बैठते-न बैठते आपका जोश बैठ सकता है, गाने के बोलों का आखिरी लाइन आपके हिम्मत का आखिरी पड़ाव हो सकती है. लेकिन मौत से पहले की आपकी हिम्मत को किसी ड्रिंक या गाने की दरकार नहीं.

 

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