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FM मिनिस्टर सीतारमण शुभारम्भ करेगी NMP जिसमें प्राइवेट कंपनियों को ‘किराये’ पर दी जाएगी सरकारी प्रॉपर्टी

सरकार एक तरफ घाटे में चल रही सरकारी कंपनियों को बंद कर या प्राइवेट कंपनियों के हाथों बेचकर पैसा जुटाने में लगी है, तो दूसरी ओर सरकारी प्रोजेक्ट को प्राइवेट कंपनियों के साथ साझा कर या किराये पर देकर आमदनी बढ़ाने की तैयारी है. सरकार ने इस दिशा में अगला कदम बढ़ा दिया है जिसे ‘नेशनल एसेट मोनेटाइजेशन’ का नाम दिया गया है. इसके लिए सरकार ने नेशनल मोनेटाइजेशन पाइपलाइन (National Monetisation Pipeline) भी शुरू कर दिया है.

इस पाइपलाइन या कार्यक्रम की एक झलक बजट भाषण में वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने दिया था. बजट के दौरान निर्मला सीतारमण ने कहा था कि सरकार इंफ्रास्ट्रक्चर सेक्टर की ऐसी पुरानी परियोजनाओं के लिए राष्ट्रीय मौद्रिकरण कार्यक्रम (National Monetisation Pipeline) शुरू करेगी जहां इसकी संभावना दिखेगी. सीतारमण ने लोकसभा में 2021-22 का बजट पेश करते हुए इसकी घोषणा की. इस योजना के तहत गैस पाइपलाइन, राजमार्ग जैसी परियोजनाओं को निजी क्षेत्र के साथ साझा करने या किराये पर चढ़ाकर (monetise national assets) आय बढ़ाने का प्रस्ताव है.

क्या है नेशनल मोनेटाइजेशन पाइपलाइन

नेशनल मोनेटाइजेशन पाइपलाइन के तहत आठ मंत्रालयों की प्रॉपर्टी प्राइवेट कंपनियों के साथ साझा की जा सकती है या किराये पर दी जा सकती है. साझा करने का अर्थ होगा कि सरकारी और प्राइवेट कंपनियां मिलकर किसी प्रोजेक्ट को आगे बढ़ाएंगी जबकि किराये पर देने का मतलब है किसी सरकारी काम को प्राइवेट हाथों में देकर उससे किराया वसूला जाएगा. जिन आठ मंत्रालयों में यह काम होना है, उनमें रेलवे, टेलीकॉम, रोड ट्रांसपोर्ट और हाइवे, बिजली, युवा मामले और खेल, नागरिक उड्डयन, पेट्रोलियम और नेचुरल गैस, शिपिंग, पोर्ट्स और वाटरवेज.

नीति आयोग की तैयारी

‘इंडियन एक्सप्रेस’ की एक रिपोर्ट के मुताबिक, नीति आयोग वित्तीय वर्ष 21-24 के लिए नेशनल मोनेटाइजेशन पाइपलाइन (कार्यक्रम) बना रहा है. नीति आयोग ने इन आठ मंत्रालयों से कहा है कि वे अपनी प्रॉपर्टी की पहचान करें और बताएं जिन्हें पाइपलाइन में शामिल किया जा सकता है. रिपोर्ट के मुताबिक, सरकार सड़क, बिजली, तेल और गैस पाइपलाइन, टेलीकॉम टावर, स्पोर्ट्स स्टेडियम और अन्य संपत्तियों को प्राइवेट कंपनियों के साथ साझा किया जा सकता है या प्राइवेट कंपनियों को किराये पर दिया जा सकता है.

नितिन गडकरी ने क्या कहा

मोनेटाइजेशन या मौद्रिकरण के बारे में केंद्रीय मंत्री नितिन गडकरी बहुत पहले इशारा दे चुके हैं. केंद्रीय सड़क परिवहन, राजमार्ग एवं एमसएमई मंत्री नितिन गडकरी ने कहा था कि भारतीय राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण (NHAI) की अगले पांच साल में टोल-ऑपरेट-ट्रांसफर (टीओटी) के जरिये राजमार्गों का मोनेटाइजेशन कर एक लाख करोड़ रुपये जुटाने की योजना है. गडकरी ने कहा था, ‘एनएचएआई अगले पांच साल में टीओटी के मार्फत राजमार्गों का मौद्रिकरण कर एक लाख करोड़ रुपये जुटाना चाह रहा है. हमें शानदार प्रतिक्रियाएं मिल रही हैं. हमें विदेश के निवेशकों के साथ ही पेंशन कोषों से भी पेशकश प्राप्त हुई हैं.’

रेलवे में होगा बड़ा काम

ऐसे ही एक प्रयास के तहत सरकार ने 150 पैसेंजर ट्रेन को प्राइवेट कंपनियों को देने की तैयारी की है. एयरपोर्ट्स अथॉरिटी ऑफ इंडिया (Airports Authority of India) के कुछ काम प्राइवेट कंपनियों को दिए जाएंगे ताकि दिल्ली, मुंबई, बेंगलुरु और हैदराबाद एयरपोर्ट को ऑपरेट किया जा सके. रिपोर्ट के मुताबिक, दिल्ली स्थित जवाहरलाल नेहरू स्टेडियम को किसी प्राइवेट कंपनी को लीज या किराये पर दिया जा सकता है.

रिपोर्ट की मानें तो रेल मंत्रालय ने वित्त वर्ष 2021-22 के दौरान किराये से 90 हजार करोड़ रुपये कमाने की योजना बनाई है. इसके लिए मंत्रालय 150 पैसेंजर ट्रेन को प्राइवेट कंपनियों को दे सकता है. अंत मार्च तक देश के 50 रेलवे स्टेशनों को दुबारा विकसित करने के लिए आरएफपी (रिक्वेस्ट फॉर प्रोपोजल) और आरएफक्यू (रिक्वेस्ट फॉर क्वालिफिकेशन) जारी किया जा सकता है.

BSNL, MTNL का क्या होगा

सरकार एमटीएनएल, बीएसएनएल और भारतनेट का मोनेटाइजेशन करना चाहती है. इसी तरह खेल मंत्रालय देश के स्पोर्ट्स स्टेडियम का मोनेटाइजेशन करना चाहता है. खेल मंत्रालय ने इसके लिए 20 हजार करोड़ रुपये का लक्ष्य रखा है. स्पोर्ट्स स्टेडियम प्राइवेट कंपनियों को लीज पर दिए जाएंगे और स्टेडियम का ऑपरेशन और मेंटीनेंस कॉन्ट्रेक्ट पर दिया जा सकता है. कोरोना महामारी के दौरान जब अर्थव्यवस्था ढीली पड़ रही है, सरकारी खर्च बढ़ रहा है और आय लगातार घट रही है, तो सरकार मोनेटाइजेशन का काम तेजी से बढ़ाने पर विचार कर रही है.

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जाने मालवा के नाम के पीछे की कहानी

मालव जनजाति का उल्लेख सर्वप्रथम ई. पू. चौथी सदी में मिलता है, जब यह जाति सिकंदर से युद्ध में पराजित हुई थी। ये मालव प्रारंभ में पंजाब तथा राजपूताना क्षेत्रों के निवासी थी, लेकिन सिकंदर से पराजित होकर वे अवन्ति (वर्तमान उज्जैन) व उसके आस-पास के क्षेत्रों में बस गये । उन्होंने आकर (दशार्ण) तथा अवन्ति को अपनी राजनीतिक गतिविधियों का केंद्र बनाया। दशार्ण की राजधानी विदिशा थी तथा अवन्ति की राजधानी उज्जयिनी थी। कालांतर में यही दोनों प्रदेश मिलकर मालवा कहलाये। इस प्रकार एक भौगोलिक घटक के रूप में ‘मालवा’ का नाम लगभग प्रथम ईस्वी सदी में मिलता है। मालवा पर करिब 547 वर्षो तक भील राजाओ का शासन रहा,जिनमें राजा धन्ना भील प्रमुख रहे ।[1]। राजा धन्ना भील के ही एक उत्तराधिकारी ने 730 ईसा पूर्व में दिल्ली के सम्राट को चुनौती दी थी , इस प्रकार मालवा उस समय एक शक्तिशाली साम्राज्य था [2]

मौर्य शासक चंद्रगुप्त मौर्य के समय के शासक राजा गरिमध्वज भील थे , वे अपनी बहादुरी और शौर्य के लिए जाने जाते थे , चन्द्रगुप्त मौर्य के मालवा आक्रमण के दौरान उनका सामना भील राजा से हुआ , लेकिन चाणक्य की नीति के फलस्वरूप दोनों राजाओं में मित्रता हो गई [3]

source :- विक्कीपेडिया

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Pure hydrogen fuel can be produced by using alluminium with water at room tempreture

Using the aluminum-water reaction to generate hydrogen doesn’t produce any greenhouse gas emissions, and it promises to solve the transportation problem for any location with available water. Simply move the aluminum and then react it with water on-site. “Fundamentally, the aluminum becomes a mechanism for storing hydrogen — and a very effective one,” says Douglas P. Hart, professor of mechanical engineering at MIT. “Using aluminum as our source, we can ‘store’ hydrogen at a density that’s 10 times greater than if we just store it as a compressed gas.”

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जाने क्या है तालिबान , क्या है इनका मक़सद …

तालिबान का उदय कैसे हुआ
साल 1980 की दहाई में जब सोवियत संघ ने अफगानिस्तान में फौज उतारी थी, तब अमेरिका ने ही स्थानीय मुजाहिदीनों को हथियार और ट्रेनिंग देकर जंग के लिए उकसाया था. नतीजन, सोवियत संघ तो हार मानकर चला गया, लेकिन अफगानिस्तान में एक कट्टरपंथी आतंकी संगठन तालिबान का जन्म हो गया. कहा जाता है तालाबानियों ने पाकिस्तान के मदरसों में शिक्षा ली. हालांकि पाकिस्तान कहता है कि तालिबान के उदय में उसका कोई किरदार नहीं है.

क्या है तालिबान का मकसद
अफगानिस्तान में तालिबान की जड़ें इतनी मजबूत हैं कि अमेरिका के नेतृत्व में कई देशों की फौज के उतरने के बाद भी इसका खात्मा नहीं किया जा सका. तालिबान के मकसद की बात करें तो उसका एक ही मकसद है कि अफगानिस्तान में इस्लामिक अमीरात की स्थापना करना है

टाटा भी internet की दुनिया में कदम रखने को तैयार

टाटा सैटेलाइट इंटरनेट सेवा इंटरनेट की दुनिया में अपनी जगह बना रही है। जैसे-जैसे डेटा का उपयोग बढ़ा है, नई कंपनियां भी बाजार में प्रवेश कर रही हैं। जहां एलन मस्क के स्टारलिंक ने बाजार में प्रवेश किया, वहीं अब टाटा ग्रुप भी बाजार में प्रवेश कर रहा है। टाटा के इस कदम से न सिर्फ स्टारलिंक बल्कि मुकेश अंबानी की रिलायंस जियो को भी बड़ा झटका लगा है।टाटा ने हाल ही में सेमीकंडक्टर के निर्माण की घोषणा की। इस सेमीकंडक्टर का उपयोग मोबाइल और अन्य इलेक्ट्रॉनिक उपकरणों को बनाने और उपयोग करने के लिए किया जाता है। इसके अलावा कंपनी 5G लॉन्च करने पर भी काम कर रही है। ऐसी अफवाहें हैं कि टाटा समूह जल्द ही सैटेलाइट इंटरनेट सेवा पर आधारित ब्रॉडबैंड सेवा शुरू कर सकता है। संभवत: इसके लिए टाटा समूह ने टेलीसैट से संपर्क किया है। जो 2024 तक खुला रह सकता है।
फिलहाल बाजार में JIOFIBER की काफी चर्चा है। यूजर्स इसकी स्पीड और सर्विस से काफी खुश हैं। एलन मस्क की स्टारलिंक सेवा की भी हाल ही में घोषणा की गई है। जो जल्द ही भारत में लॉन्च हो सकता है। ऐसे में टाटा समूह ने भी इसमें कदम रखा है। इससे एलन मस्क और जियो दोनों के लिए मुश्किलें बढ़ सकती हैं। अनुमान है कि स्टारलिंक 2022 तक 150 एमबीपीएस तक की गति प्रदान करने में सक्षम होगा। इन मुद्दों के आधार पर कहा जा सकता है कि टाटा समूह की इंटरनेट सेवा शुरू होने के बाद यूजर्स को कई लाभकारी प्लान मिल सकते हैं।

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