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जाने क्या है तालिबान , क्या है इनका मक़सद …

तालिबान का उदय कैसे हुआ
साल 1980 की दहाई में जब सोवियत संघ ने अफगानिस्तान में फौज उतारी थी, तब अमेरिका ने ही स्थानीय मुजाहिदीनों को हथियार और ट्रेनिंग देकर जंग के लिए उकसाया था. नतीजन, सोवियत संघ तो हार मानकर चला गया, लेकिन अफगानिस्तान में एक कट्टरपंथी आतंकी संगठन तालिबान का जन्म हो गया. कहा जाता है तालाबानियों ने पाकिस्तान के मदरसों में शिक्षा ली. हालांकि पाकिस्तान कहता है कि तालिबान के उदय में उसका कोई किरदार नहीं है.

क्या है तालिबान का मकसद
अफगानिस्तान में तालिबान की जड़ें इतनी मजबूत हैं कि अमेरिका के नेतृत्व में कई देशों की फौज के उतरने के बाद भी इसका खात्मा नहीं किया जा सका. तालिबान के मकसद की बात करें तो उसका एक ही मकसद है कि अफगानिस्तान में इस्लामिक अमीरात की स्थापना करना है

टाटा भी internet की दुनिया में कदम रखने को तैयार

टाटा सैटेलाइट इंटरनेट सेवा इंटरनेट की दुनिया में अपनी जगह बना रही है। जैसे-जैसे डेटा का उपयोग बढ़ा है, नई कंपनियां भी बाजार में प्रवेश कर रही हैं। जहां एलन मस्क के स्टारलिंक ने बाजार में प्रवेश किया, वहीं अब टाटा ग्रुप भी बाजार में प्रवेश कर रहा है। टाटा के इस कदम से न सिर्फ स्टारलिंक बल्कि मुकेश अंबानी की रिलायंस जियो को भी बड़ा झटका लगा है।टाटा ने हाल ही में सेमीकंडक्टर के निर्माण की घोषणा की। इस सेमीकंडक्टर का उपयोग मोबाइल और अन्य इलेक्ट्रॉनिक उपकरणों को बनाने और उपयोग करने के लिए किया जाता है। इसके अलावा कंपनी 5G लॉन्च करने पर भी काम कर रही है। ऐसी अफवाहें हैं कि टाटा समूह जल्द ही सैटेलाइट इंटरनेट सेवा पर आधारित ब्रॉडबैंड सेवा शुरू कर सकता है। संभवत: इसके लिए टाटा समूह ने टेलीसैट से संपर्क किया है। जो 2024 तक खुला रह सकता है।
फिलहाल बाजार में JIOFIBER की काफी चर्चा है। यूजर्स इसकी स्पीड और सर्विस से काफी खुश हैं। एलन मस्क की स्टारलिंक सेवा की भी हाल ही में घोषणा की गई है। जो जल्द ही भारत में लॉन्च हो सकता है। ऐसे में टाटा समूह ने भी इसमें कदम रखा है। इससे एलन मस्क और जियो दोनों के लिए मुश्किलें बढ़ सकती हैं। अनुमान है कि स्टारलिंक 2022 तक 150 एमबीपीएस तक की गति प्रदान करने में सक्षम होगा। इन मुद्दों के आधार पर कहा जा सकता है कि टाटा समूह की इंटरनेट सेवा शुरू होने के बाद यूजर्स को कई लाभकारी प्लान मिल सकते हैं।

24 घंटे में 203 किलोमीटर दौड़े इंदौरी कार्तिक

7 अगस्त शाम 6 से, 8 अगस्त शाम 6 बजे, कुल 24 घंटे 400 मीटर के 507 लेप्स करीब 203 किलोमीटर की सतत दौड़4600 किलोमीटर इंदौर से बेंगलुरु यशवंतपुर (कर्नाटक) की थका देने वाली लम्बी यात्रा । निढ़ाल कर देने वाली गर्मी, पल पल दौड़ में बाधा बन रही थी कई नामचीन धावक गर्मी के सामने हार मान दौड़ से बहार हो चुके थे । उस बीच हल्की सी बारिश ने आग में घी का काम किया स्पर्धा चरम सीमा में थी मजे हुवे धावक हार मानने को तैयार नही थे सिर और बदन पर पानी डाल सतत दोड़ रहे थे कुछ फिजियो की मदद से शरीर की टूट फुट को मरहमपट्टी करवा रहे थे,तो कुछ डायट प्लान चेंज कर गर्मी से निजात पाने की नाकाम कोशिश कर रहे थे । ऐसे में सदी हुई गति नमक का उपयोग कर अपने को क्रैम्प से बचाते हुवे 200 किलोमीटर का टारगेट सेट कर घड़ी से बात करते हुवे । अपनी गाड़ी को दूसरे गैर में ही चलाना उंचीत समझा ओर सतत दौड़ जारी थी । परंतु जूते में कैद पैर मोम की तरह पिघल रहे थे । तलवे छील से गए नाखून काले पड़ गए छाले फुट कर घाव बन गए यहाँ हिम्मत हारना मतलब दौड़ से बहार डिस्टेंस 220 का था पर पैर में असहयनी दर्द के बावजूद अंततः 24 घंटे का सफर तय कर ही लिया हम इंदौरी कहा रुकने,थमने वाले विजय बिगुल बजते ही ये कदम थमे ओर सूर्य देव को प्रणाम कर अगले मिसन इस से भी ज्यादा गर्मी में एक रेकार्ड खंडित करने के प्लान को लिए इंदौर की ओर कुच कर गए ,ये कदम जल्द ही मुलाकात होगी एक खतरनाक मिसन पर विजय पाने की वैसे 24 घंटे स्टेडियम रन का यह मेरा पहला अनुभव था 12 घंटे स्टेडियम रन में तो बहुत झंडे गाड़े है । ऐसी जानकारी भी लगी कि 24 घंटे में 200 किलोमीटर करने वाले अब तक इंडिया में शायद 10 से 15 ही है अपुन अपने पहले अनुभव और सब से कम उम्र में 24 घंटे में 203 करने वाले सब से युवा धावक भी बने तो भैया जी आशीष बनाए रखना आप का यही आशीष हर दौड़ में मेरा रक्षा कवच बन काम करता है

जाने इंदौर के आसपास की वादियों में घूमने का मनोरम द्रश्य

तिन्छा फॉल

इंदौर से करीब 25 किलोमीटर दूर सिमरोल के पास बेहद खूबसूरत झरना है।तिन्छा फॉल   यानि  खंडवा रोड स्थित इस झरने को देखने के लिए स्वयं के वाहन से पहुंचा जा सकता है अकल्पनीय प्राकृतिक  सौन्दर्य के दर्शन  होंगे आपको यंहा पर

जोगी भड़क

इंदौर से 55 किलोमीटर और मानपुर से 10 किमी आगे काफी ऊंचाई से यह झरना गिरता है। ट्रैकिंग करने वालों से लिए यह पसंदीदा ट्रैकों में से एक है। रास्ता अपनेआप में मंज़िल जैसा ही ही लगता है। ऐसा ही है जोगी भड़क का रास्ता। यह ऐसा झरना है जो अंग्रेज़ी अक्षर “एस’ के आकार के वैली में गिरता है। वैली बहुत  गहरी भी है और खूबसूरत भी।

यंहा पर आप  कार या बाइक से जा सकते हैं। इंदौर से ए बी रोड होते हुए मानपुर तक जाते हैं। घाट क्रॉस करते  ही  ढाल गांव आ जायेगा फिर  यहां से पश्चिम में एक कच्चा रास्ता जाता है। कार जा सकती है लेकिन बाइक से नदी तक चली जाएगी। एक किलोमीटर चलने के बाद कार को साइड में पार्क कर दें ट्रैकिंग करते हुए एक किलोमीटर दूर नदी के पास पहुंच कर झरने का  लुफ़्त्त उठायें

हत्यारी खोह

इंदौर से करीब 30 किलोमीटर दूर हत्यारी खोह नाम का ट्रैकिंग स्पॉट है। यहां ऊंचाई से गिरने वाला झरना और प्राकृतिक नजारे दिलों को बहुत ही अंदर तक   छू जाते हैं। यहां पहुंचने के लिए कंपेल से हुए तेलीया खेड़ी में वाहन खड़ा करके करीब दो किलोमीटर ऊबड़-खाबड़ रास्तों पर पैदल चलना होता है। कृपया इसके नाम पर न  जाएँ  । बहुत ही मनोरम जगह है

गिदिया खोह

इंदौर से करीबन 45 किलोमीटर दूर स्थित गिदिया खोह तक डबल चौकी से सिवनी होते हुए पहुंचा जा सकता है। यहां भी काफी ऊंचाई से बहुत ही सुंदर दिखने वाला झरना गिरता है। साथ ही आसपास के प्राकृतिक नजारे भी मन मोह लेने वाले हैं। ट्रैकिंग की पसंदीदा लिस्ट में गिदिया खोह भी एक अहम ट्रैक है।

मुहाड़ी वाटर फॉल

इंदौर से २६ किलोमीटर दुरी पर स्थित ये वाटर फॉल अपनी अनुपम सुंदरता के लिए प्रसिद्ध है ।ये झरना  तिल्लोर बुजुर्ग के समीप है ।एक बात का ध्यान रखे की यंहा पर मोबाइल का नेटवर्क नहीं मिलता है । बारिश के समय ये पुरे यौवन पर रहता है ।

तो  दोस्तों  उपरोक्त सभी वाटर फॉल तथा पिकनिक स्पॉट  इंदौर  के नजदीक ही है ।  आप अपने पुरे परिवार या मित्रो के साथ जा कर इन सभी  वाटर फॉल तथा पिकनिक स्पॉट का भरपूर  आनंद ले सकते है । हमारी आप लोगो से गुजारिश है की थोड़ी सी सावधानी अवश्य रखे । अरे , एक बात और  हमारा इंदौर पुरे भारत में स्वछता में नम्बर एक है  तो  यदि आप इंदौरियंस है तो कृपया इन सभी जगहों पर भी  स्वछता बनायें रखें । आप अगर इंदौरियंस नहीं भी है तो इन  सभी  वाटर फॉल तथा पिकनिक स्पॉट पर कृपया स्वछता बनायें रखें  । मालवा की इस धरती पर सभी का स्वागत है   

inDefth :-force-based interaction with objects beyond a physical barrier

 inDepth, a novel system that enables force-based interaction with objects beyond a physical barrier by using scalable force sensor modules. inDepth transforms a physical barrier (eg. glass showcase or 3D display) to a tangible input interface that enables users to interact with objects out of reach, by applying finger pressure on the barrier’s surface. To achieve this interaction, our system tracks the applied force as a directional vector by using three force sensors installed underneath the barrier. Meanwhile, our force-to-depth conversion algorithm translates force intensity into a spatial position along its direction beyond the barrier. Finally, the system executes various operations on objects in that position based on the type of application. In this paper, we introduce inDepth concept and its design space. We also demonstrate example applications, including selecting items in showcases and manipulating 3D rendered models