Category Archives: Technical News

Nokia PureBook X14 लैपटॉप भारत में लॉन्च

Nokia PureBook X14 लैपटॉप को भारत में लॉन्च कर दिया गया है और इसकी बिक्री फ्लिपकार्ट के जरिए की जाएगी. ये नोकिया का पहला लैपटॉप है. इसमें Intel 10th-जेनरेशन प्रोसेसर दिया गया है और Windows 10 प्री-इंस्टॉल्ड है.

इसे मॉडल नंबर NKi510UL85S के साथ सिंगल कॉन्फिगरेशन में उतारा गया है. इसे मैट ब्लैक फिनिशिंग के साथ पेश किया गया है. इसकी स्क्रीन में साइड्स में स्लिम बेजल्स हैं और इसमें बड़ा टच पैड मौजूद है.

Nokia PureBook X14 की कीमत 59,990 रुपये रखी गई है और 18 दिसंबर से फ्लिपकार्ट से इसके लिए प्री-बुकिंग की जा सकेगी. फिलहाल कंपनी ने इसके लिए सेल डेट की घोषणा नहीं की है.

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टेक की दुनिया में लगा मेला ‘कंज्‍यूमर इलेक्‍ट्रॉनिक शो 2016’

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वार्षिक तौर पर आयोजित हुआ टेक शो-‘कंज्‍यूमर इलेक्‍ट्रॉनिक शो 2016(CES)’ लास वेगास में 9 जनवरी तक चला । इसमें 3,600 एग्‍जीबिटर्स अपने लेटेस्‍ट प्रोडक्‍ट्स के साथ आए हैं। CES 2016 के सैंड्स एक्‍सपो व कंवेंशन सेंटर में Ninebot Segway पर्सनल ट्रांसपोर्टेशन रोबोट डिस्‍प्‍ले किया जा रहा है। CES दुनिया का सबसे बड़ा ट्रेड शो रहा जो 9 जनवरी तक चला |
दुनिया का पहला रिमोट कंट्रोल गेम शू – स्‍केचर्स गेम Kicks 2 को भी इस शो में डिस्‍प्‍ले किया गया। 65 अमेरिकी डॉलर की कीमत वाला यह शू बैटरी से लैस है। बच्‍चे जूतों में लाइट को पुश कर सकते हैं या खेलने के लिए रिमोट का उपयोग कर सकते हैं।
लास वेगास में CES 2016 के दौरान यूविजिट बूथ पर डेविड एडर्ली सैमसंग गियर VR का उपयोग कर रहे हैं। यूविजिट का उद्देश्‍य है कि हर कोई वर्चुअल रियलिटी को एक्‍सेस कर सके और कंपनी के एप के साथ और VR एसेसरी के साथ यूजर्स विडियो कंटेंट को देख सकते हैं और अपना कंटेंट अपलोड कर सकते हैं जिसे सोशल मीडिया प्‍लेटफार्म के जरिए शेयर किया जा सकता है।
Yuneec Typhoon H ड्रोन को देखा जा सकता है।1,799 डॉलर की कीमत वाला यह ड्रोन 6 रोटर्स, 360 डिग्री के गिंबल कैमरे से लैस है।
iLuv mySight 2K Full HD WiFi वीडियो कैमरे में नाइट विजन, बिना रेजयोलूशन के नुकसान के स्‍मार्ट जूम, टू वे ऑडियो कमयुनिकेशन, अलर्ट्स लगा है। इसे CES 2016 में डिस्‍प्‍ले किया गया है।Sony MDR-XB650BT हेडफोंस को CES 2016 में डिस्‍प्‍ले किया गया है।

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एक डिवाइस ऐसा जो डबल कर देगा गाढ़ी का माइलेज

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जलंधर। ‘पावर एम्पलीफायर’ नाम का डिवाइस पंजाब के इंजीनियरिंग स्टूडेंट्स अलोक मलिक और उदय रंजन ने बनाया है | इस डिवाइस की मैकेनिकल एफीशिएंसी 150 फीसदी से भी ज्यादा है। मतलब यह डिवाइस गाड़ी का माइलेज डबल कर देगा। साथी इलैक्ट्रॉनिक प्रोडक्ट्स जैसे टीवी, फ्रिज एसी का बिजली बिल भी आधा कर देगा। जेसे एक एसी 24 घंटे में करीब 40 से 50 यूनिट बिजली कंज्यूम करता है। यह डिवाइस लगाने के बाद एसी की जो इलैक्ट्रिकल मोटर मान लीजिए पहले 1000 वॉट की थी, वो 500 वॉट की लगेगी। दोनों स्टूडेंट्स का दावा है दुनिया में ऐसा कोई डिवाइस नहीं है जिसकी पावर एफीशिएंसी 100 फीसदी से ज्यादा हो। लेकिन एफीशिएंसी बढ़ने से होगा क्या? इस पर अलोक कहते हैं कि डिवाइस जहां एक तरफ कार में फ्यूल एफीशिएंसी दोगुना कर देगा। कैसे? इस पर अलोक कहते हैं, यह दुनिया का पहला पावर ट्रांसमीटिंग डिवाइस है। इसका काम पावर को प्रोड्यूस करना नहीं, ट्रांसमिट कर पावर बढ़ाना है।
गाड़ी चलने, गियर बदलने के दौरान अंदर ही लॉस होने वाली पावर को यह बचाएगा। कैसे? इस पर दोनों का कहना है कि दूसरे चरण में पेटेंट मिलने तक वह इसे खुद तक सीमित रखना चाहते हैं। हालांकि अलोक और उदय इसका प्रोटोटाइप तैयार कर चुके हैं। अंबाला कैंट की एक कंपनी से एमडी शक्ति पासी ने इस रिसर्च के लिए फाइनेंशियल मदद की है। अलोक ने तकनीकी भाषा में इसे कुछ यूं बताया कि थर्मोडायनमिक लॉ 1 कहता है कि कोई भी ऐसा डिवाइस नहीं है जो 100 परसेंट से ज्यादा पावर एफाीशिएंसी दे। क्योंकि उसके अंदर कई तरह के लॉस होते हैं। हमने जो बनाया है, उसमें पावर ट्रांसमिट होने के दौरान पावर बढ़ जाता है। पावर बढ़ने से लॉसेस कम होते हैं और जो होते वह कंपनसेट हो जाते हैं।

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उज्जैन के इंजीनियरिंग छात्र केएल सुनहरे ने सिंहस्थ 2016 के लिए लोगों को डूबने व घाटों पर दुर्घटना से बचाने के लिए वॉटर ड्रोन बनाया

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उज्जैन के रहने वाले इंजीनियरिंग के छात्र केएल सुनहरे ने सिंहस्थ 2016 के लिए लोगों को डूबने व घाटों पर दुर्घटना से बचाने के लिए वॉटर ड्रोन बनाया है। ड्रोन में लगे कैमरे बिना ईंधन के 2 किमी. की रेंज में रिमोट से चलेंगे।

सुनहरे नौकरी के साथ इंजीनियरिंग कॉलेज से बीई की पढ़ाई रहे हैं। ड्रोन बनाने में इंजीनियरिंग में डिप्लोमा कर रहे सुनहरे के बेटे मयंक व बेटी मयूरी ने भी सहयोग किया। ड्रोन का शिप्रा नदी में सफल परीक्षण कर अफसरों को दिखाया है। प्रशासन डेमो देखकर सिंहस्थ में नदी में उपयोग कर सकता है।

ऐसे काम करेगा ड्रोन-इसकी खासियत
छोटी नाव जैसे ड्रोन में वायरलेस कैमरे हैं। जो कंट्रोल रूम से रिमोट से ऑपरेट होंगे। कैमरों को 180 डिग्री व ड्रोन को 360 डिग्री तक घुमा सकेंगे। दिन में ये सौर ऊर्जा व रात में बैटरी से चलेगा। ऑडियो-वीडियो से घाट की आवाज व लाइव चित्र कंट्रोल रूम पहुंचाएगा। नाइट विजन कैमरे रात में भी काम करेंगे। अंधेरा होते ही इसकी लाइटें चालू होंगी व बारिश होने पर अपने आप कैमरे कवर्ड होंगे। 10 फीट दूर से नदी में कोई वस्तु के आने पर ये दिशा बदल लेगा। इसके निर्माण में 10 हजार रुपए खर्च आया है।

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परमाणु बम की परिकल्पना सबसे पहले अंग्रेज़ी भाषा के साहित्यकार एचजी वेल्स ने की

यही सच है. साल 1914 में एचजी वेल्स की किताब ‘द वर्ल्ड सेट फ़्री’ प्रकाशित हुई. इसमें उन्होंने यूरेनियम से बनने वाले एक ऐसे बम की परिकल्पना की थी जो अनंत काल तक फटता ही रहेगा. कल्पना की गई थी कि इस बम की ताक़त भी असीमित होगी.

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हवाई जहाज़ से बमबारी की कल्पना
इतना ही नहीं. वेल्स ने तो यहां तक सोच लिया था कि इसे हवाई जहाज़ से ज़मीन पर गिराया जाएगा.
पर वेल्स ने शायद यह नहीं सोचा था कि उनके एक दोस्त विंस्टन चर्चिल और भौतिक शास्त्र के एक वैज्ञानिक लियो स्ज़िलर्ड उनकी परिकल्पना को सच्चाई में बदल देंगे.
उस समय यह माना जाता था कि ठोस पदार्थ बहुत ही छोटे छोटे कणों से बना होता है. साइंस म्यूज़ियम के क्यूरेटर एंड्र्यू नैहम का कहना है, “जब यह साफ़ हो गया कि रदरफ़ोर्ड के परमाणु में सघन न्यूक्लीयस है, तो यह समझा गया कि वह एक स्प्रिंग की तरह है.”
एचजी वेल्स नई नई खोजों से काफ़ी प्रभावित थे. यह भी देखा गया कि वे आने वाले आविष्कारों के बारे में पहले से ही अनुमान लगा लेते थे, जो कई बार सही साबित होते थे.
वेल्स-चर्चिल मुलाक़ात
ब्रिटिश राजनेता चर्चिल ने एचजी वेल्स के नोट्स पढ़े और बहुत ही प्रभावित हुए. वे ख़ुद भी साहित्यकार थे. उन्होंने वेल्स से मुलाक़ात भी की थी.
नारंगी के आकार के परमाणु बम के बारे में सबसे पहले सोचने का श्रेय ग्राहम फार्मलो को है. लेकिन यह एचजी वेल्स की किताब से सीधे तौर पर जुड़ा हुआ था.
ब्रितानी वैज्ञानिकों ने 1932 में परमाणु को विखंडित करने में कामयाबी हासिल कर ली, हालांकि उस समय भी ज़्यादातर लोग यह मानते थे कि इससे बहुत बड़े पैमाने पर ऊर्जा नहीं निकल सकती है.
उसी साल हंगरी के वैज्ञानिक लियो स्ज़िलर्ड ने वेल्स की किताब ‘द वर्ल्ड सेट फ़्री’ पढ़ी थी. उन्होंने इस पर यक़ीन किया कि परमाणु के विखंडन से बहुत बड़े पैमाने पर ऊर्जा निकल सकती है. उन्होंने इस पर एक लेख भी लिखा, जो वेल्स के विचारों के बहुत ही नज़दीक था.

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सीन आया तो दर्शकों पर भी गिरेगी बौछारें

15 cimenaउज्जैन। नानाखेड़ा पर जल्द 7-डी थिएटर खुलने वाला है। मात्र 16 लोगों की क्षमता वाले इस अत्याधुनिक टॉकीज के लिए फिल्म भी विशेष तकनीक से बनाई गई है, जिससे फिल्म के सीन को दर्शक प्रत्यक्ष में महसूस कर सकेंगे। यानि पानी का सीन आने पर दर्शक हकीकत में भीग जाएंगे। यहां प्रतिदिन करीब 25 शो दिखाए जा सकेंगे। यह प्रयोग इंदौर के मल्हार मेगा माॅल में जारी है। उज्जैन में आगामी दो माह में शुरू होने की संभावना है। थिएटर मस्ती 7 डी कंपनी बना रही है इसके डायरेक्टर महावीर जैन व घनश्याम गोयल ने बताया कि 7 डी थिएटर नानाखेड़ा पर नए शापिंग माल में बनाने की तैयारी कर रहे है। उम्मीद है दो माह थिएटर तैयार कर शुरू कर देंगे। इस थिएटर में दिखाने के लिए 50 फिल्में बनी हैं, जो मात्र 10-10 मिनट की है। इसलिए रोज 25 शो दिखाए जा सकेंगे। फिल्म की तकनीक और थिएटर में लगे अत्याधुनिक संसाधनों के कारण दर्शक खुद को फिल्म का हिस्सा महसूस करेंगे। जैन ने बताया कि फिल्म में अगर डायनोसोर आग उगलेगा तो उसका धुआं दर्शक के चेहरों तक भी आएगा, सांप आया तो दर्शक खुद को उसके पास खड़ा पाएंगे। वहीं बर्फबारी का सीन आने पर थिएटर में भी हकीकत में बर्फ गिरते दिखेगी। 9 डी भी हुआ लांच : मूक, ब्लैक एंड व्हाइट और रंगीन फिल्मों के बाद करीब दो दशक पहले थ्री डी फिल्में बनने लगी थी। इसी के चलते 7 डी फिल्म की तकनीक शुरू हो गई है और जल्द ही 9 डी फिल्म भी शुरू होने वाली है। ये फिल्में वीडियोगेम की तरह होगी, जिसमें दर्शक रिमोट कंट्रोल से जानवरों को कंट्रोल करेंगे और युद्ध के सीन में फायरिंग भी कर सकेंगे।

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बाक्सिंग रिंग में हुआ रोबोट्स का संग्राम

इंदौर. आपने बाक्सिंग रिंग में दो मुक्केबाजों को भिड़ते हुए तो कई बार देखा होगा, मगर क्या कभी रिंग में दो रोबोट्स को भिड़ते हुए देखा है? इंदौर के एक इंजीनियरिंग कॉलेज में ऐसा ही नज़ारा दिखाई दिया। चमेली देवी ग्रुप ऑफ इंस्टिट्यूट में आयोजित रोबोटिक्स प्रतियोगिता में देशभर के लगभग 100 काॅलेजों के छात्र अपने बनाए रोबोट्स लेकर पहुंचे। छात्रों के बनाए रोबोट्स और माॅडल्स ने बाक्सिंग रिंग के अलावा बिलियर्ड्स की टेबल, रेसिंग कार्ट और आसमान में भी अपने जौहर दिखाए। बाक्सिंग रिंग में हुआ जमकर मुकाबला : काॅलेज के वार्षिक समारोह के तहत आयोजित रोबोटिक्स में रोबोट्स से जुड़ी 8 तरह की प्रतियोगिताएं रखी गई थीं। इसमें रोबो वार, रोबो रेस, रोबो स्विम, रोबो सुमो, रोबो केट आदि शामिल थी। इनमें से किसी इवेंट में रोबो को मुश्किलों से भरा रास्ता पार करना था, तो कहीं गहरे पानी में तैरकर किनारे पहुंचना था। कहीं उन्हें बिलियर्ड्स की टेबल पर अपना हुनर दिखाना था, तो कहीं उनके बनाए ड्रोन को आसमान में नज़र आना था। स्टूडेंट्स को सबसे ज़्यादा मज़ा रोबो वार में आया। रिंग में एक दूसरे पर प्रहार करते हुए रोबोट्स को देखना स्टूडेंट्स के लिए एक अलग ही अनुभव था। काॅलेज के प्रोफ़ेसर सी.ए पाटिल के अनुसार रोबो वार सहित हर प्रतियोगिता के लिए कुछ तकनीकी मापदंड रखे गए थे। रोबो के आकार और करंट के वोल्टेज की अधिकतम सीमा तय कर दी थी। इस सीमा के भीतर प्रतियोगियों को अपने रिमोट से रोबोट को इस तरह से चलाना था कि वो सामने वाले रोबोट पर प्रहार भी करें और उससे अपना बचाव भी करें। इसमें तकनीक के साथ साथ संचालन की कुशलता भी देखी गई।

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नया दिल: धड़कता नहीं, पर काम करता है

मेलबर्न। यह एक ऐसा दिल है, जो धड़कता नहीं। पर दिल के सारे काम करता है। शरीर में खून का प्रवाह भी। वो भी बिना किसी रुकावट के। यह धड़कने वाला दुनिया का पहला बायोनिक दिल है। इसके मानव परीक्षण में तीन से पांच साल लगेंगे। उसके सालभर बाद यह ट्रांसप्लांटेशन के लिए तैयार होगा। ऑस्ट्रेलियाई वैज्ञानिकों ने इसे विकसित किया है। फिलहाल इस कृत्रिम दिल का सफल ट्रांसप्लांट एक भेड़ में किया गया है। ब्रिस्बेन के इंजीनियर डॉ. डेनियल टिम्स ने इस पर 2001 में काम शुरू किया था। डॉ. टिम्स ने बताया कि प्रत्यारोपण के लिए ऐसी भेड़ का चयन किया, जिसका सीना किसी महिला या बच्चे जितना हो। प्रत्यारोपण जनवरी में किया गया था और भेड़ अब तक स्वस्थ है। यह कृत्रिम दिल 10 साल से ज्यादा समय तक काम करेगा। यह पंप नहीं करता। इसमें पहले बनाए गए कृत्रिम दिलों की तरह गुब्बारे की थैलियां नहीं हैं। इसलिए इसके फटने का खतरा भी नहीं है। इसमें डिस्क लगी है, जो प्रति मिनट 2000 चक्कर लगाती है। इसी से यह काम करता है। इसका नाम बाइवेकॉर रखा गया है। हार्ट ट्रांसप्लांट का खर्च घटकर आधा होने की उम्मीद जताई जा रही है। तैयार करने में 14 साल लगे। इस पर 2001 से काम हो रहा है। 50 साल से ज्यादा उम्र के लोगों के लिए भी बराबर उपयोगी होगा। इसका आकार इतना छोटा है कि बच्चों में भी लगाया जा सकता है। इसके लगाने के बाद एथलेटिक एक्सरसाइज भी की जा सकती है। अभी आर्टिफिशयल दिल नहीं लगते। पेसमेकर, लूप या वॉल्व ही लगाए जाते हैं। या किसी इंसान का दिल ही ट्रांसप्लांट किया जाता है। इनका सक्सेस रेट बहुत कम है।

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पानी से चलेगी गाड़ी, इंजीनियरिंग के छात्र ने निकाली तरकीब

सर छोटू राम इंजीनियरिंग कॉलेज के एक छात्र ने ऐसा प्रोजेक्ट तैयार किया है, जिसमें पानी से गाड़ी चलेगी। उसने पानी की तीन बोतलों से बनाए प्रोजेक्ट से करंट पैदा किया और उससे अपनी मॉडल गाड़ी को चला दिया। उसका कहना है कि इससे तैयार करंट से गाड़ी तो चलेगी ही, यदि चाहें तो घर में इन्वर्टर के माध्यम से बल्ब जलाकर रोशनी भी की जा सकती है। सर छोटूराम इंजीनियिरंग कॉलेज में इलेक्ट्रॉनिक्स एंड कम्युनिकेशन (ईसी) थर्ड ईयर के छात्र संजीत सिंह ने यह प्रोजेक्ट तैयार किया है। मूल रूप से वह चंदौली का रहने वाला है। उसने जो मॉडल तैयार किया है वह भविष्य में बिजली तैयार करने का बड़ा जरिया बन सकता है।पांच सौ रुपए में तैयार हुआ प्रोजेक्ट संजीत के अनुसार, उसका यह प्रोजेक्ट केवल पांच सौ रुपए से तैयार हुआ है। इसे बनाने में उसने वेस्ट चीजों का प्रयोग भी किया है। प्रोजेक्ट को संजीत ने लकड़ी के फ्रेम पर बनाया है। इस पर उसने दो छोटे 12 वोल्ट डीसी के मोटर, तीन पानी की बोतल लगाई। इसमें गरारी फिट की है। इसके अलावा एक छोटा ट्रांसफॉर्मर, कैपिस्टर और वायरिंग आदि फिट की गई है। पानी की तीनों बोतलों को एक-दूसरे से अटैच कर एक बोतल में पखुंडी और मोटर (टरबाइन बनाकर) जोड़ा, ऊपर से दूसरी बोतल को मोटर वाली बोतल पर इस प्रकार रखा, जो लगातार पानी का फ्लो मोटर पर बनाए रखे।

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अफसरों ने देखा मेट्रो चलाने में कहां क्या बाधा, बैठक संपन्न

इंदौर। शहर में लाइट मेट्रो ट्रेन चलाने में आने वाली बाधाओं को लेकर शुक्रवार को बैठक हुई। नगरीय प्रशासन विभाग के ओएसडी, कंसल्टेंट और स्थानीय अफसरों ने दो घंटे तक स्क्रीन पर रूट समझा। इसके बाद ट्रेन के संभावित रूट का तीन घंटे से ज्यादा समय तक दौरा किया। इसमें देखा कि कॉरिडोर पर कहां परेशानी आएगी? कहां आसानी से ट्रैक डाला जा सकेगा? ओएसडी कमल नागर के साथ कंसल्टेंट रोहित गुप्ता, निगम के सिटी इंजीनियर हरभजन सिंह, हंसकुमार जैन, सुनील थॉमस, बीएसएनएल, रिलायंस फोर-जी, बिजली कंपनी, पीडब्ल्यूडी के अफसर रूट देखने के लिए कलेक्टोरेट से बस में बैठे। टीम नौलखा, बंगाली, पलासिया, एमआर-10, सुखलिया, सुपर कॉरिडोर, रेलवे स्टेशन, सरवटे बस स्टैंड भी पहुंची और मौके की बाधाएं देखीं। अगले दो-तीन दिन तक यह प्रक्रिया चलेगी। नागर ने बताया इंदौर में करीब 95 किमी लंबा ट्रैक बिछाया जाना है। मेट्रो ट्रेन लगभग 75 फीसदी हिस्से में एलिवेटेड, 10 से 15 प्रतिशत में अंडर ग्राउंड और पांच से 10 फीसदी हिस्से में सड़क पर दौड़ेगी।

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