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जाने प्रिंसेस डायना एक्सीडेंट की एक पहेली ..!!

31 अगस्त 1997. ये वही दिन था जब पूरी दुनिया प्रिंसेस डायना की मौत की खबर सुनकर सन्न रह गई थी. 36 साल की प्रिंसेस डायना की एक कार दुर्घटना में मौत हो गई. कार एक्सीडेंट इतना जबरदस्त था कि हादसे में तीन लोगों की मौत हो गई. यह एक्सीडेंट कितना खतरनाक रहा होगा, इस बात का अंदाजा हादसे के बाद कार को देखकर लगाया जा सकता था. एक्सीडेंट में कार पूरी तरह से नष्ट हो गई थी. पीछे की सीट पर खून से सनी हुई थी.

21 साल पहले जिस वक्त ये हादसा हुआ, उस वक्त ये पूरी घटना वहां लगे सीसीटीवी कैमरे में कैद हो गई. हाल ही में Behind the story नाम के एक फेसबुक पेज ने इस घटना का वीडियो जारी किया है. इस वीडियो में साफ तौर पर देखा जा सकता है कि प्रिंसेस डायना की कार का एक्सीडेंट कैसे हुआ. वीडियो में ये भी बताया गया है कि एक्सीडेंट के बाद क्या हुआ और कैसे प्रिंसेस डायना की मौत हुई. इस वीडियो में फ्रांस के उस बचावकर्मी का इंटरव्यू भी है जिसने एक्सीडेंट के बाद मौके पर पहुंच कर डायना को बचाने की पूरी कोशिश की.

हादसे की पूरी कहानी

वीडियो के मुताबिक कार तेज रफ्तार से एक टनल के अंदर घुसी. उसने पहले एक कार को ओवरटेक किया फिर अचानक फुटपाथ पर चढ़ गई और एक दीवार से टकराकर पूरी तरह घूम गई. इसके बाद जब कार रुकी तो सब खत्म हो चुका था.

फ्रांस का बचावकर्मी ज़ावियर ग्रीमलन वो पहला शखस् था जो एक्सीडेंट के बाद मौके पर पहुंचा. ये एक्सीडेंट पॉन्ट द लामा टनल में हुआ था. ये टनल उस जगह के बहुत करीब थी जहां बचावकर्मी ज़ावियर ग्रीमलन ड्यूटी ऑफिसर नियुक्त था. पहले ग्रीमलन को इस एक्सीडेंट के बारे में ज्यादा कुछ नहीं पता था, और न ही ये पता था कि कार मौजूद लोग कौन-कौन है. ऐसे में उन्होंने इस एक्सीडेंट  को किसी भी आम एक्सीडेंट की तरह देखा और फिर उसी तरह काम किया.

एक्सीडेंट के बाद भी जिंदा थी डायना

ग्रीमलन ने प्रिंसेस डायना से कहा कि वो वहां उनकी मदद करने के लिए आया है. ग्रीमलन ने इसके बाद उन्हें ऑक्सीजन दिया और कार से बाहर निकाला. लेकिन उसके तुरंत बाद प्रिंसेस ने सांस लेना बंद कर दिया. ग्रीमलन को अहसास हुआ कि उन्हें हार्ट अटैक हुआ है. इसके तुरंत बाह उन्होंने प्रिंसेस की छाती को पंप करना शुरू किया. थोड़ी देर बाद वो दोबारा सांस लेने लगी. उस वक्त सभी को लगा कि प्रिंसेस डायना अब बच जाएंगी. इसके बाद उन्हें एमबुलेंस में रखा गया. इसी दौरान एक डॉक्टर ने उनको पहचान लिया और तभी ग्रीमलन को समझ में आया कि वो महिला और कोई नहीं बल्कि प्रिंसेस डायना थी. हालांकि इसके बाद 31 अगस्त को खबर आई की डायना की अस्पताल में मौत हो घई है. डॉक्टरों ने बताया कि उनको काफी अंदरूनी चोटें आई थी जिसकी वजह से उनकी मौत हुई.

उस समय उनकी मौत का सबसे बड़ा झटका ग्रीमलन को लगा क्योंकि उन्हें लगा था कि प्रिंसेस डायना बच जाएंगी. ग्रीमलन इस हादसे को कभी नहीं भूला सकें और न ही कोई और भूला सका.

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वैदिक काल में हिंदू नाम का कोई धर्म नहीं था बल्कि सनातन धर्म हुआ करता था. -मोहन भागवत

मोहन भागवत ने ‘भविष्य का भारत’ विषय पर बोलते हुए कहा वैदिक काल में हिंदू नाम का कोई धर्म नहीं था बल्कि सनातन धर्म हुआ करता था. उनका कहना था कि आज जो कुछ हो रहा है वो धर्म नहीं है. “जिस दिन हम कहेंगे कि हमें मुसलमान नहीं चाहिए उस दिन हिंदुत्व नहीं रहेगा.”

उन्होंने शिक्षाविद्द सर सय्यद अहमद ख़ान का उद्धरण देते हुए कहा कि जब उन्होंने यानी ख़ान ने बैरिस्टर की पढ़ाई पूरी की तो लाहौर में आर्य समाज ने उनका अभिनंदन किया. आर्य समाज ने इसलिए अभिनन्दन किया था क्योंकि सर सय्यद अहमद ख़ान मुस्लिम समुदाय के पहले छात्र थे जिन्होंने बैरिस्टर बनने की पढ़ाई की थी.

भागवत बताते हैं, “उस समारोह में सर सय्यद अहमद ख़ान ने कहा कि मुझे दुःख है कि आप लोगों ने मुझे अपनों में शुमार नहीं किया.”

व्याख्यान माला के दूसरे दिन भी संघ के आमंत्रण पर कई हस्तियां शामिल हुईं. इनमें जनता दल (यूनाइटेड) के नेता के सी त्यागी सहित कई केंद्रीय मंत्री भी शामिल थे.

इनके अलावा जया जेटली, सोनल मानसिंह और कुमारी शैलजा भी मोहन भागवत को सुनने विज्ञान भवन पहुंचे.

राजनीति पर चर्चा करते हुए भागवत का दावा था कि संघ सम्पूर्ण समाज को जोड़ना चाहता है. राजनीति में मतभेद होते हैं. जब राजनीतिक दल बनते हैं तो विरोध भी खड़ा होता है. इसीलिए राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ राजनीति से दूर है. उनका यह भी दावा था कि मौजूदा सरकार की नीतियों पर संघ का कोई दख़ल नहीं है.

भागवत कहते हैं, “हमने कभी किसी स्वयंसेवक को किसी दल विशेष के लिए काम करने को नहीं कहा. कौन राज करेगा ये जनता तय करेगी. हम राजनीति से ज़्यादा राष्ट्रनीति के बारे में सोचते हैं. नीति किसी की भी हो सकती है. हमें किसी से बैर भी नहीं है और न ही किसी से अधिक दोस्ती है.”

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कर्नाटक में नींबू राजनीति का तूफ़ान ..!!

कर्नाटक विधान सभा चुनाव किसी भी लहर से ग्रसित न होकर शुद्ध राजनीतिक चौरस की लड़ाई बन चुकी हैl हर पार्टी  अपने को जनता का सच्चा  हितेषी बताने में लगा है , हर पार्टी को अपना किया हुआ वादा सिद्ध करना है, फिर चाहे वो बीजेपी हो ,कांग्रेस हो या जदयू l मुख्यमंत्री सिद्धरमैया को जहा अपने पांच साल का हिसाब देना है, वही प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदीको अच्छे दिन को सिद्ध करना है, जदयू को जनता में अपनी विश्वनीयता कायम करनी है

कर्नाटक बीजेपी ने एक ट्वीट कर कहा, ‘हाथ में नींबू लेकर प्रचार करना और दूसरी ओर हिन्दू परंपराओं का अनादर करने और उन्हें आपराधिक बनाने के लिए अंधविश्वास विरोधी कानून लाना. सिद्दरमैया आपका नाम पाखंड है.’ बीजेपी ने एक फोटो भी पोस्ट किया है, जिसमें वह हाथ में नींबू लेकर प्रचार कर रहे हैं.

मैसूर के चामुंडेश्वरी में चुनाव प्रचार के वक्त मुख्यमंत्री सिद्दरामैया के हाथ में नीबू क्या दिखा बीजपी ने हमला करने में देर नहीं लगाई. बीजेपी प्रवक्ता एस प्रकाश ने कहा कि जिस आदमी ने अंधविश्वास निरोधक कानून बनाया वो ही अगर नींबू लेकर अंधविश्वास फैलाएगा तो मज़ाक तो बनेगा ही. l

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