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कठिन डगर है १०% का आरंक्षण सवर्णों के लिए, बीजेपी का चुनावी स्टंट मुश्किल भरा हो सकता है ..

पूर्व प्रधानमंत्री विश्वनाथ प्रताप सिंह ने जब साल 1990 में अन्य पिछड़ा वर्ग (ओबीसी) के लिए आरक्षण की नीति लागू की थी जिसे हम सभी मंडल आयोग के तौर पर जानते हैं तब उनके इस क़दम को मास्टरस्ट्रोक कहा गया था. क्योंकि कोई भी राजनीतिक दल उनके इस क़दम का खुलकर विरोध नहीं कर पाया था.

मौजूदा दौर में जब बीजेपी ने जनरल कैटगरी में आर्थिक रूप से कमज़ोर तबक़े के लिए 10 प्रतिशत आरक्षण लागू करने की बात कही है तो इसे भी 2019 के लोक सभा चुनाव से पहले मोदी सरकार का एक बड़ा मास्टर स्ट्रोक बताया जा रहा है.

वीपी सिंह के नेतृत्व वाली सरकार हालांकि अपने इस महत्वपूर्ण क़दम के बाद महज़ एक साल ही सरकार में टिक पाई थी, उन्हें इस क़दम का कोई बहुत अधिक लाभ नहीं मिल पाया था, लेकिन मंडल आयोग लागू करने का असर उत्तर भारत सहित पूरे देश की राजनीति पर पड़ा.

बीजेपी के इस क़दम को भी मास्टर स्ट्रोक इसीलिए कहा जा रहा है क्योंकि कोई भी दल इसका विरोध करने की हिम्मत नहीं जुटा पा रहा.

जैसे कि मंडल आयोग को उसकी घोषणा होने के कुछ सालों बाद ही लागू किया जा सका था. उसी तरह आरक्षण से जुड़े इस नए बिल को लागू करने में भी कुछ वक़्त तो ज़रूर लगेगा.

संविधान संशोधन के पीछे चाल
मोदी सरकार को उम्मीद है कि सुप्रीम कोर्ट इस पर रोक नहीं लगाएगी. सरकार ने न्यायिक हस्तक्षेप की संभावना के मद्देनज़र ही संविधान संशोधन करने का फैसला किया है. सरकार को उम्मीद है कि संविधान में प्रावधान होने की वजह से अदालत इस पर रोक नहीं लगाएगी.

तीन दिन पहले बना नोट
आर्थिक आधार पर आरक्षण का कैबिनेट नोट तीन दिन पहले तैयार किया गया था. कैबिनेट नोट की खबर लीक न हो, इसके लिए सरकार ने इसे कैबिनेट के एजेंडे में सबसे आखिर में जोड़ा था. सोमवार को इस फैसले के लिए खास तौर पर कैबिनेट की बैठक बुलाई गई. नोट तैयार करते हुए यूपीए के वक्त बनी सिन्हो कमेटी की रिपोर्ट को ध्यान में रखा गया. मोदी सरकार ने आर्थिक आधार पर आरक्षण के बारे में पिछले साल जुलाई महीने में सोचा था. 

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गरीब सवर्णों को १०% आरंक्षण ,धारा 15 व् 16 में बदलाव करेंगे, देश में राजनीतिक दिशा बदलाव की ओर..

मोदी कैबिनेट का गरीब सवर्णों को १० प्रतिशत आरंक्षण देना का प्रस्ताव कैबिनेट में मंजूर , इसके लिए उसे धारा 15 एवं 16 में संवेधानिक बदलाव लाना होगा l सामान्य श्रेणी में आर्थिक रूप से पिछड़ों के लिए कोटा मौजूदा 50 प्रतिशत आरक्षण से ऊपर और अधिक होगा। सरकार आर्थिक रूप से कमजोर वर्गों के लिए कोटा पर संविधान संशोधन विधेयक कल संसद में ला सकती है। ऐसे में आरक्षण का कोटा 50% से बढ़कर 60% हो सकता है।

सुप्रीम कोर्ट के फैसले के अनुसार 50% से अधिक आरक्षण नहीं किया जा सकता। अभी तक 22.5% अनुसूचित जाति (दलित) और अनुसूचित जनजाति (आदिवासी) के छात्रों के लिए आरक्षित हैं (अनुसूचित जातियों के लिए 15%, अनुसूचित जनजातियों के लिए 7.5%), ओबीसी के लिए अतिरिक्त 27% आरक्षण को शामिल करके आरक्षण का यह प्रतिशत 49.5% है।

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परिंदे आबाद हो गए ,निर्णय एक्ट 370 का होना था , और निर्णय एक्ट 377 का हो गया, न जाने किसका दबाव था ,

ये देश एक हास्य के दौर से गुजर रहा है, जनता क्या आस लगा कर बैठी रहती है( सरकार से) ,और अचानक उसे क्या मिल जाता है , उसे समझ ही नही आता है l हाल ही में सर्वोच्च न्यायालय द्वारा समलैंगिक लोगो को संव्वेधानिक दर्जा मिलने पर देश का पूरा मीडिया उसे ऐसा दिखा रहा था जैसे सभी लोग  विगत 70 वर्षो से बेड़ियों में जकडे हुए है l,

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