‘अंडमान निकोबार’हज़ार द्वीपों का द्वीपसमूह

प्राचीन भारतीय मान्यता यह थी कि देश से दूर समुद्र पार करते हुए कोई भी व्यक्ति ‘पवित्र गंगा’ से अलग होने के कारण अपनी जाति से वंचित हो जाएगा और समाज से कट जाएगा. ‘काला पानी’ उपमहाद्वीप में आम तौर पर दूर-दराज़ की जगह के लिए बोला जाता है. मुहावरे में लंबी दूरी के लिए ‘काले कोस’ जैसे शब्द अर्सें से प्रचलित हैं. राजनीतिक अर्थों में काला पानी से तात्पर्य हिंद महासागर में वो द्वीप है,जहां अंग्रेज़ शासक क़ैदियों को देशनिकाला देते थे.

इतिहासकार और शोधकर्ता वसीम अहमद सईद अपने शोध ‘काला पानीः 1857 के गुमनाम स्वतंत्रता सेनानी’ में लिखते हैं, ”अंग्रेज़ों ने यहां अपना परचम लहराने के अलावा क़ैदियों की बस्ती और उपनिवेश बनाने के लिए सन 1789 में पहली कोशिश की जो विफल हो गयी. बाद में सन 1857 का हंगामा बरपा तो फांसियों, गोलियों और तोप से क्रांतिकारियों की जानें ली गयीं. ” ” उम्र कै़द भी दी गयी मगर किसी दूर-दराज़ जगह पर सज़ा देने की बस्ती या क़ैदियों की कॉलोनी की ज़रूरत महसूस की गयी ताकि अंग्रेज़ों से ‘बाग़ी’ हुए लोग फिर से बग़ावत या विरोध न कर सकें. उनकी निगाह अंडमान द्वीप समूह पर ही गयी.” ये द्वीप कीचड़ से भरे थे. यहां मच्छर, ख़तरनाक सांप, बिच्छुओं और जोंकों और अनगिनत प्रकार के ज़हरीले कीड़ों की भरमार थी.

1858 में पहुंचा था पहला जत्था

फ़ौजी डॉक्टर और आगरा जेल के वार्डन जे. पी. वॉकर और जेलर डेविड बेरी की निगरानी में ‘बाग़ियों’ को लेकर पहला जत्था 10 मार्च सन 1858 को एक छोटे युद्ध पोत में वहां पहुंचा.

खरल के साथी संभावित तौर पर उसी जहाज़ में ले जाए गये होंगे. फिर कराची से और 733 क़ैदी लाए गए और फिर यह सिलसिला जारी रहा.

सईद लिखते हैं ”काला पानी एक ऐसा क़ैदख़ाना था जिसके दर-ओ-दीवार का भी वजूद न था. अगर चारदीवारी या चौहद्दी की बात कीजिए तो समुद्री किनारा था और परिसर की बात कीजिए तो उफान मारता हुआ अदम्य समुद्र ही था.

क़ैदी क़ैद होने के बावजूद आज़ाद थे लेकिन फरार होने के सारे रास्ते बंद थे और हवाएं जहरीली थीं.

”जब क़ैदियों का पहला जत्था वहां पहुंचा तो स्वागत के लिए सिर्फ़ पथरीली और बेजान ज़मीन, घने और गगनचुंबी पेड़ों वाले ऐसे जंगल थे, जिनसे सूरज की किरणें छन कर भी धरती के गले नहीं लग सकती थीं. खुला नीला आसमन, प्रतिकूल और विषैली जलवायु, गंभीर जल संकट और शत्रुतापूर्ण जनजातियां.”

दिल्ली के इस शोधकर्ता के अनुसार अंडमान ही को भारत की आज़ादी की जंग की क़ुर्बानगाह क़रार दिया जाना चाहिए.

फिरंगियों, उनके पदाधिकारी, कर्मचारी और अमले के दूसरे लोगों के लिए तो तंबू गाड़ दिये गये लेकिन क़ैदियों को झुग्गी, झोंपड़ियां और अस्तबल जैसी जगह भी बहुत बाद नसीब हो सकी. वहां न कोई फ़र्श था, न रहने के लिए बुनियादी ज़रूरतों का कोई सामान.

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क्या है I2U2 गठबंधन, आईटूयूटू में भारत की क्या अहमियत होगी?

चार देशों अमेरिका भारत, यूएई और इसराइल के इस नए गठजोड़ का नाम I2U2 (आईटूयूटू) होगा. इस समूह में ‘आई 2’ इंडिया और इसराइल के लिए हैं. वहीं ‘यू 2’ यूएस और यूएई के लिए. अमेरिकी विदेश विभाग के प्रवक्ता नेड प्राइस ने कहा, “भारत एक बड़ा बाज़ार है. भारत एक बहुत बड़ा उपभोक्ता बाज़ार है. वो हाई-टेक और सबसे ज़्यादा मांग वाले उत्पादों का भी बड़ा उत्पादक है. ऐसे बहुत से क्षेत्र हैं, जहाँ ये देश मिलकर काम कर सकते हैं, फिर वो तकनीक, कारोबार, पर्यावरण, कोविड-19 और सुरक्षा ही क्यों न हो.”नेड प्राइस से जब पूछा गया कि इस समूह का उद्देश्य क्या है तो उन्होंने कहा कि उन गठबंधनों और साझेदारों को फिर एक साथ लाना है, जिनका अस्तित्व पहले नहीं था या फिर था भी तो उसका भरपूर इस्तेमाल नहीं किया गया.

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नुपुर शर्मा के टिप्पड़ी पर इतना विवाद और हिन्दू देवताओ पर चुप्पी …?

अंग्रेज़ी अख़बार द हिंदू में छपी एक रिपोर्ट के मुताबिक़, नूपुर शर्मा और नवीन जिंदल के बयान के बाद कानपुर में हिंसा हुई लेकिन खाड़ी देशों में इस बयान पर आई तीखी प्रतिक्रिया के बाद पार्टी ने अपने नेताओं के खिलाफ़ ये एक्शन लिया.

खासकर क़तर में भारतीय राजदूत दीपक मित्तल को समन किया गया वो भी तब जब भारत के उपराष्ट्रपति वैंकेया नायडू क़तर के तीन-दिवसीय औपचारिक दौरे पर हैं.

अख़बार लिखता है कि अपने बयान में मित्तल ने सत्तारूढ़ बीजेपी पार्टी के अपने प्रवक्ताओं को ही फ़्रिंज करार दिया है.

विदेश मंत्रालय के आधिकारिक बयान में कहा गया है, “भारत के राजदूत दीपक मित्तल ने क़तर सरकार को बताया है कि ये ट्वीट किसी भी तरह से भारत सरकार के विचार को प्रदर्शित नहीं करते, ये फ़्रिंज लोगों के विचार है. इस तरह के विवादित बयान देने वालों पर कार्रवाई की जा चुकी है.”

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कोरियन ड्रामा की दुनिया में बढ़ती लत :स्क्विड गेम

स्क्विड गेम का मशहूर होना, पश्चिमी देशों में हाल के सालों में आई ‘कोरियन सभ्यता की सूनामी’ का एक हिस्सा है. के-पॉप के आर्टिस्ट बीटीएस और ब्लैकपिन्क म्यूज़िक जगत में बड़ा नाम बन गए हैं. फ़िल्मों की बात करें तो पैरासाइट और मिनारी को हॉलीवुड की फ़िल्मों जैसी पहचान के साथ ऑस्कर सम्मान भी मिले. स्क्विड गेम इसी ट्रेंड की अगली कड़ी है.

ऐसा लगता है कि इस के-ड्रामा को रातों-रात सफलता मिल गई है, लेकिन ऐसा नहीं है. दुनियाभर के दर्शकों पर इनका जादू अभी चला है, लेकिन के-ड्रामा एशिया में दशकों के प्रचलित रहे हैं.

90 के दशक में बाज़ार के खुलने के साथ ही इंटरटेनमेंट इंडस्ट्री में बहुत पैसे आने शुरू हुए. जापान गिरती अर्थव्यवस्था से लड़ने लगा तो चीन की अर्थव्यवस्था बढ़ने लगी. दक्षिण कोरिया की सभ्यता को भी पहचान मिलनी शुरू हुई. अमेरिकी प्रोग्राम की तुलना में दर्शक के-ड्रामा से अधिक जुड़ा हुआ महसूस करने लगे, ये चीनी संस्कृति और सभ्यता के भी अधिक क़रीब थे.

अगले एक दशक में इन्होंने जापानी वर्चस्व को भी चुनौती दी. साल 2003 में कोरियन ड्रामा विंटर सोनाटा को जापान के 20 प्रतिशत दर्शकों ने देखा. कोरियन कल्चर एंड इंफ़ॉरमेशन सर्विस की 2011 की एक रिपोर्ट के मुताबिक, “कई एशियाई देशों में कोरियन ड्रामा वहां के रहन-सहन और ख़रीदारी पर प्रभाव डाल रहा है जो कि सभ्यता की अपील के बारे में बताता है.”

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डीजीपी सुधीर सक्सेना पहुँचे तीन दिवसीय दौरे पर

इंदौर….डीजीपी बनने के बाद पहली बार आए है इंदौर…. डीजीपी की बेटी सोनाक्षी सक्सेना (आईपीएस) को मिली है कोतवाली थाने की कमान

इंदौर – डीजीपी सुधीर सक्सेना देर रात इंदौर आ गए । डीजीपी बनने के बाद सुधीर सक्सेना का ये पहला इंदौर दौरा है । ऑफिसर मेस में पुलिस कमिश्नर हरिनारायण चारी मिश्र , मनीष कपूरिया , राजेश हिंगड़कर सहित अन्य अधिकारियों ने सुधीर सक्सेना का स्वागत किया । इंदौर और भोपाल में पुलिस कमिश्नरी लागू है । ऐसे में दोनो जगह सभी की विशेष नजर है । इंदौर में पिछले दिनों बढे क्राइम रेट पर भी प्रदेश के जिम्मेदारो की नजर है । मंगलवार को डीजीपी पुलिस अधिकारियों की मीटिंग के साथ पुलिस की कार्यप्रणाली देखेंगे । उम्मीद है कि इस दौरान वो किसी पुलिस थाने का निरीक्षण भी कर सकते है जिसके चलते सभी थानों पर विशेष तैयारियां भी गई है ।

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देवरानी-जेठानी ने एक साथ पास की UPPSC परीक्षा, एक को मिला DSP का पद दूसरी बनीं प्रिंसिपल

UPPSC की परीक्षा देश के सबसे कठिन परीक्षाओं में गिनी जाती है। वही बात इसमें चयनित होने वाले नामों की करें तो यह परीक्षा पास करने वाले लोग अक्सर इतिहास रचते हैं। आज हम बात कर रहे हैं बलिया जिले में रहने वाली एक देवरानी-जेठानी की जोड़ी की, जिन्होंने उत्तर प्रदेश लोक सेवा आयोग 2018 की परीक्षा पास की थी|

जेठानी शालिनी श्रीवास्तव ने इस परीक्षा को पास कर के प्रधानाचार्य का पद हासिल किया था, तो वहीं उनकी देवरानी नमिता शरण इस परीक्षा को पास कर पुलिस उपाधीक्षक के पद पर चयनित हुई थी।वर्तमान में शालिनी वाराणसी के रामनगर क्षेत्र राधा किशोरी राजकीय बाल विद्यालय इंटर कॉलेज में सहायक अध्यापिका के पद पर तैनात है। इसके पहले बलिया के सहतवार क्षेत्र के प्राथमिक विद्यालय रजौली में अध्यापक के पद पर कार्यरत थी। मालूम हो कि शालिनी और नमिता बलिया के सिकंदरपुर क्षेत्र के बनहरा निवासी डॉ ओम प्रकाश सिन्हा की बहूएं है।

बता दें ओमप्रकाश के बड़े बेटे डॉ सौरभ कुमार उदयपुर विश्वविद्यालय में प्रोफ़ेसर है। सौरभ की शादी शालिनी से साल 2011 में हुई थी। उस समय शालिनी प्राथमिक विद्यालय में शिक्षक पद पर कार्यरत थी। शादी के बाद भी उन्होंने अपनी पढ़ाई जारी की और यूपीएससी की परीक्षा पास कर यह मुकाम हासिल किया।

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आइडेंटिफ़िकेशन बिल-2022 का क्यों हो रहा है विरोध?

सोमवार को लोकसभा में क्रिमिनल प्रोसीजर (आइडेंटिफ़िकेशन) बिल, 2022 रखा गया. बिल को केंद्रीय गृह राज्य मंत्रीअजय मिश्र  ने पेश किया. बिल के समर्थन में अजय मिश्रा ने कई बातें रखीं. उन्होंने कहा कि अपराधियों पर नकेल कसने, दोष सिद्ध करने और जांच एजेंसियों के हाथ मज़बूत करने के लिए ये बिल लाया जा रहा है.

इस बिल को बर्बर कहते हुए विपक्ष ने इसका ज़ोरदार विरोध किया. कांग्रेस नेता मनीष तिवारी ने कहा कि ये बिल नागरिकों के मौलिक अधिकारों का हनन करता है.

क्रिमिनल प्रोसीजर (आइडेंटिफ़िकेशन) बिल का विरोध ना सिर्फ़ राजनीतिक पार्टियां कर रही हैं बल्कि इस पर समाज के अलग-अलग वर्गों से सवाल उठाए जा रहे हैं. ऐसा इस बिल में क्या है जिसे लेकर इतनी चर्चा हो रही है?

इस वक्त देश में अपराधियों की पहचान ‘बंदी शिनाख़्त अधिनियम 1920’ के तहत होती है. इस क़ानून में दोषी ठहराए गए अपराधियों के शरीर की सीमित माप की अनुमति दी गई है. इस क़ानून के तहत एक साल या उससे अधिक कारावास होने पर ही अपराधी के फ़िंगरप्रिंट और फ़ुट प्रिंट लिए जाते हैं. उदाहरण के लिए अगर किसी व्यक्ति को दो साल की सज़ा होती है तो इसी क़ानून के तहत उसके फ़िंगरप्रिंट और फ़ुट प्रिंट लिए जाएंगे.

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परीक्षा हमारी ज़िंदगी का छोटा-सा हिस्सा है, इससे डरने की जरूरत नहीं है -पीएम नरेन्द्र मोदी

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने आज स्कूल के विद्यार्थियों के साथ ‘परीक्षा पर चर्चा’ की. इस दौरान उन्होंने नौवीं से 12वीं कक्षा के छात्रों और अभिभावकों से बात की.ये कार्यक्रम दिल्ली के तालकटोरा स्टेडियम में हुआ. विद्यार्थियों और अभिभावकों ने वीडियो के ज़रिए भी सवाल पूछे.

पीएम मोदी ने विद्यार्थियों को परीक्षा से ना डरने की सलाह दी. उन्होंने कहा कि परीक्षा हमारी ज़िंदगी का छोटा-सा हिस्सा है, जिससे हम पहले भी गुज़र चुके हैं. ये नया नहीं है.उन्होंने माता-पिता की आकांक्षाओं और उसके बच्चों पर दबाव, ऑनलाइन पढ़ाई और नई शिक्षा नीति पर भी चर्चा की.यहाँ कोई भी ऐसा विद्यार्थी नहीं बैठा है जो पहली बार परीक्षा देगा. आपके पास परीक्षा का छोटा अनुभव नहीं है. हम समय-समय पर परीक्षा देते-देते एग्ज़ाम प्रूफ (परीक्षा से सुरक्षित) हो गए है. परीक्षा हमारी ज़िंदगी में आगे बढ़ने का आधार हैं.जितनी सहज दिनचर्या सामान्य दिनों में होती है उतनी ही परीक्षा में रखें. बहुत अधिक जोड़ना-घटाना आपको परेशान करेगा. ये ना सोचें कि दोस्त कोई काम कर रहा है, तो आप भी वो कर लें.- मैं चाहता हूँ कि बच्चे परीक्षा के दौरान घबराहट भरे माहौल से दूर रहें. आपको अपने दोस्तों की नकल करने की ज़रूरत नहीं है. आप जो करना चाहते हैं, उसे पूरे आत्मविश्वास के साथ करें और मुझे भरोसा है कि आप त्योहार की तरह परीक्षा दे पाएँगे.

– पीएम मोदी ने इस दौरान ऑनलाइन पढ़ाई पर भी बात की. उनसे ऑनलाइन क्लास के दौरान सोशल मीडिया पर भटकाव को लेकर सवाल पूछा गया था. उन्होंने कहा कि ऑनलाइन ही नहीं ऑफ़लाइन क्लास में भी ध्यान भटक जाता है. इसलिए समस्या माध्यम नहीं बल्कि मन है.

– हमें ऑनलाइन पढ़ाई को रिवॉर्ड की तरह लेना चाहिए. ऑनलाइन पाने के लिए है और ऑफ़लाइन पनपने के लिए है. ऑनलाइन को अपना आधार मज़बूत करने के लिए उपयोग करें. अगर ऑनलाइन में दिमाग़ भटकता है तो उसके लिए भी टूल मौजूद हैं.

– उन्होंने राष्ट्रीय शिक्षा नीति पर भी चर्चा की. पीएम मोदी ने बताया कि देशभर से आए क़रीब 20 लाख इनपुट पर विचार करके पूरी सूझबूझ से यह नीति तैयार की गई है. इस नीति को सरकार ने नहीं, देश के नागरिकों, विद्यार्थियों, शिक्षकों ने मिलकर देश के भविष्य के लिए बनाया है.

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सरकार उत्तराखंड में यूनिफॉर्म सिविल कोड लागू करेगी-मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी

उत्तराखंड के मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने गुरुवार को ऐलान किया कि उनकी सरकार उत्तराखंड में यूनिफॉर्म सिविल कोड लागू करेगी। उन्होंने कहा कि हमने फरवरी में ही जनता से वादा किया था कि यदि दोबारा हमारी सरकार बनी तो हम राज्य में यूसीसी लेकर आएंगे। धामी ने कहा कि हम अन्य राज्यों से भी अपेक्षा करेंगे कि वे भी अपने यहां यूसीसी लागू करें। बता दें कि उत्तराखंड विधानसभा चुनावों में बीजेपी को प्रचंड जीत दिलवाने वाले धामी खुद अपना चुनाव हार गए थे, फिर भी पार्टी नेतृत्व ने उनके ऊपर भरोसा जताया और राज्य की कमान एक बार फिर उनके हाथ में दी।

धामी ने ऐलान किया कि उनकी सरकार उत्तराखंड में यूनिफॉर्म सिविल कोड लागू करेगी।

आज मंत्रिमंडल में सर्वसम्मति से प्रस्ताव पारित कर दिया है: पुष्कर सिंह धामी

धामी ने कहा कि अन्य राज्यों से भी हम अपेक्षा करेंगे कि वहां पर भी इसे लागू किया जाए।

देहरादून: उत्तराखंड के मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने गुरुवार को ऐलान किया कि उनकी सरकार उत्तराखंड में यूनिफॉर्म सिविल कोड लागू करेगी। उन्होंने कहा कि हमने फरवरी में ही जनता से वादा किया था कि यदि दोबारा हमारी सरकार बनी तो हम राज्य में यूसीसी लेकर आएंगे। धामी ने कहा कि हम अन्य राज्यों से भी अपेक्षा करेंगे कि वे भी अपने यहां यूसीसी लागू करें। बता दें कि उत्तराखंड विधानसभा चुनावों में बीजेपी को प्रचंड जीत दिलवाने वाले धामी खुद अपना चुनाव हार गए थे, फिर भी पार्टी नेतृत्व ने उनके ऊपर भरोसा जताया और राज्य की कमान एक बार फिर उनके हाथ में दी।

धामी ने देहरादून में कहा, ‘आज नई सरकार का गठन होने के बाद मंत्रिमंडल की पहली बैठक हुई। 12 फरवरी 2022 को हमने जनता के समक्ष संकल्प लिया था कि हमारी सरकार का गठन होने पर हम यूनिफॉर्म सिविल कोड लेकर आएंगे। आज हमने तय किया है कि हम इसे जल्द ही लागू करेंगे। हम एक उच्च स्तरीय कमेटी बनाएंगे और वह कमेटी इस कानून का एक ड्राफ्ट तैयार करेगी और हमारी सरकार उसे लागू करेगी। आज मंत्रिमंडल में सर्वसम्मति से प्रस्ताव पारित कर दिया है। अन्य राज्यों से भी हम अपेक्षा करेंगे कि वहां पर भी इसे लागू किया जाए।

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हम्पी भारत के सात आश्चर्य में क्यों है जाने !

हम्पी, दक्षिणी भारत के एक पुराने शहर विजयनगर में स्थित एक छोटा सा गांव है. संस्कृत में, विजयनगर का मतलब “जीत का नगर” होता है. 1336 से 1565 तक, यह शहर विजयनगर साम्राज्य की राजधानी था. … इसके बाद, 1986 में इस प्राचीन शहर को यूनेस्को विश्व विरासत स्थल घोषित कर दिया गया.

हम्पी ऐतिहासिक स्थल कर्णाटक में http://www.campus-live.in/

हम्पी मध्यकालीन हिंदू राज्य विजयनगर साम्राज्य की राजधानी थी। तुंगभद्रा नदी के तट पर स्थित यह नगर अब हम्पी (पम्पा से निकला हुआ) नाम से जाना जाता है और अब केवल खंडहरों के रूप में ही अवशेष है। इन्हें देखने से प्रतीत होता है कि किसी समय में यहाँ एक समृद्धशाली सभ्यता निवास करती होगी। भारत के कर्नाटक राज्य में स्थित यह नगर यूनेस्को के विश्व के विरासत स्थलों में शामिल किया गया है।[1] हर साल यहाँ हज़ारों की संख्या में पर्यटक और तीर्थयात्री आते हैं। हम्पी का विशाल फैलाव गोल चट्टानों के टीलों में विस्तृत है। घाटियों और टीलों के बीच पाँच सौ से भी अधिक स्मारक चिह्न हैं। इनमें मंदिर, महल, तहख़ाने, जल-खंडहर, पुराने बाज़ार, शाही मंडप, गढ़, चबूतरे, राजकोष…. आदि असंख्य इमारतें हैं।

हम्पी में विठाला मंदिर परिसर निःसंदेह सबसे शानदार स्मारकों में से एक है। इसके मुख्य हॉल में लगे ५६ स्तंभों को थपथपाने पर उनमें से संगीत लहरियाँ निकलती हैं। हॉल के पूर्वी हिस्से में प्रसिद्ध शिला-रथ है जो वास्तव में पत्थर के पहियों से चलता था। हम्पी में ऐसे अनेक आश्चर्य हैं, जैसे यहाँ के राजाओं को अनाज, सोने और रुपयों से तौला जाता था और उसे गरीब लोगों में बाँट दिया जाता था। रानियों के लिए बने स्नानागार मेहराबदार गलियारों, झरोखेदार छज्जों और कमल के आकार के फव्वारों से सुसज्जित होते थे। इसके अलावा कमल महल और जनानखाना भी ऐसे आश्चयों में शामिल हैं। एक सुंदर दो-मंजिला स्थान जिसके मार्ग ज्यामितीय ढँग से बने हैं और धूप और हवा लेने के लिए किसी फूल की पत्तियों की तरह बने हैं। यहाँ हाथी-खाने के प्रवेश-द्वार और गुंबद मेहराबदार बने हुए हैं और शहर के शाही प्रवेश-द्वार पर हजारा राम मंदिर बना है

साम्राज्य की राजधानी बनने से कई सालों पहले भी विजयनगर एक पवित्र और ज़रूरी शहर माना जाता था. तुंगभद्रा नदी के किनारे कई मंदिर हुआ करते थे. इस शहर को पवित्र इसलिए भी माना जाता था क्योंकि कुदरत ने इसे अनोखी और असाधारण खूबसूरती से नवाज़ा था.

हम्पी के आसपास मौजूद ग्रेनाइट पहाड़ियों की गिनती दुनिया के सबसे पुराने पत्थरों में की जाती है. करोड़ों सालों में ग्रेनाइट के बड़े-बड़े पत्थरों ने घिस-घिस कर छोटी पहाड़ियों का रूप ले लिया है. इनमें से कई पहाड़ियां, एक के ऊपर एक पड़े पत्थरों से बनी हैं. इस मंदिर के अवशेष हेमकूट पहाड़ी की चोटी पर पाए जाते हैं.

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ये जगह है भारत के सात आश्चर्य

श्रवणबेलगोला (Shravanabelagola) भारत के कर्नाटक राज्य के हासन ज़िले में स्थित एक नगर है। यह एक प्रसिद्ध जैन तीर्थ है। कन्नड़ में ‘वेल’ का अर्थ होता है श्वेत, ‘गोल’ का अर्थ होता है सरोवर। शहर के मध्य में एक सुंदर श्वेत सरोवर के कारण यहां का नाम बेलगोला और फ़िर श्रवणबेलगोला पड़ा .

श्रवणबेलगोला दो पहाड़ियों – विंध्यगिरि और चंद्रगिरि – के मध्य स्थित है। विंध्यगिरि पर 7 तथा चंद्रगिरि पर 14 जैन मंदिर हैं। एक श्री बाहुबली स्वामी का मंदिर है। यह banglore से १५८ कि॰मी॰ दूर स्थित है।मौर्य चन्द्र गुप्त  के विस्तृत राज्य की जानकारी तमिल ग्रंथ अहनानूर तथा मुरनानूर से प्राप्त होती है। जैन ग्रंथों के अनुसार अपने जीवन के अंतिम समय में चंद्रगुप्त मौर्य ने जैन परंपरा के अनुसार श्रवणबेलगोला में अपने शरीर का त्याग कर दिया।

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मध्य प्रदेश सरकार का बड़ा फैसला, अब निजी वाहनों को नहीं देना होगा टोल टैक्स!

मध्य प्रदेश सरकार  (MP Government) ने टोल टैक्स (Toll Tax Free) को लेकर बड़ा फैसला लिया है।  सरकार ने निजी वाहनमालिकों को बड़ी राहत दी है। इसके तहत अब नई सड़कों पर निजी वाहनों से टोल टैक्स (Private Vehicles is Toll Tax Free ) नहींवसूला जाएगा। इसके लिए मध्य प्रदेश सरकार ने टोल टैक्स संबंधी नीति में बदलाव किए है।आगामी चुनाव से पहले यह सरकार काबड़ा फैसला माना जा रहा है। दरअसल, मप्र प्रदेश सरकार ने निजी वाहन मालिकों को बड़ी राहत देते हुए टोल टैक्स संबंधी नीति (Toll Tax Policy) में नए प्रावधान किए है, जिसके तहत अब छोटे वाहनों से टोल टैक्स नहीं लिया जाएगा। खास बात ये है कि यह सुविधाराज्य सड़क विकास निगम द्वारा बिल्ड आपरेट एंड ट्रांसफर की बनाई जाने वाली नई सड़कों पर सुविधा मिलेगी।

नई नीति के तहत तय किया गया है कि बिल्ड आपरेट एंड ट्रांसफर BOT (एजेंसी सड़क बनाकर टोल लेती है और निश्चित अवधि केबाद मप्र सरकार को देती है) की सड़क हो या फिर एन्यूटी पद्धति (एजेंसी द्वारा सड़क निर्माण करने के बाद उसे समान किस्तों में लागतराशि दी जाती है) पर बनने वाली सड़क हो, दोनों शर्तों में निजी वाहनों से टोल टैक्स नहीं वसूला जाएगा।

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नए केंद्रीय बजट में मध्यमवर्गीय फिर मायूस ,खोदा पहाड़ निकली चुहिया

केन्द्रीय बजट 2022*एक नज़र में……..
१) आयकर की स्लेब/ दर पूर्णतः अपरिवर्तित , नया कोई कर भार नहीं ।

२) आयकर विवरणी कीं ग़लतियों को दो साल तक सुधार कर विवादों से बचा जा सकता है ।
३) क्रिप्टो करेंसी की आय पर ३०% टैक्स, १ प्रतिशत टीडीएस भी
४) डिजीटल करेंसी शुरू होगी, ३० प्रतिशत कर होगा आय पर
५)दिव्यांग के माता पिता को कर में छुट के प्रावधान
६)सहकारी समितियों पर कर अभिलाभ में राहत
७) छापे में प्राप्त नक़द राशि पुरी तरह से ज़ब्त होगी ।
७) स्टार्टअप को प्रोत्साहन
८) कर्मचारियों को पैशन पर टैक्स में राहत
९) समान तय क़ानूनी पांईट पर विभागीय सेकंड अपील न करने की बात स्वीकार ।
१०) पूँजी लाभ अभिभार में कुछ राहत ।
११) आगामी २५ वर्षों की दुरदर्शिता से जुड़ा बजट
१२)चमड़ा,कपड़ा, खेती सामान, हीरे के गहने , जुते चप्पल, इलेक्ट्रॉनिक सामान सस्ते, विदेशी छाते मंहगे ।
१३) विकास की कई योजनाओं का घ्यान बजट में
१४) रोज़गार उन्मुख्त बजट
१५) ६० लाख नई नौकरी का घ्यान
१६) निजी निवेश को बढ़ावा
१७) विकास की दुरदृष्टी का बजट, २५ हज़ार कि मी के हाय वे बनेंगे, १० गतिशक्ति टर्मिनल,
६० कि मी के ८ रोप वे, ३ वर्ष में ४०० वन्दे भारत ट्रेन
१८) १३० लाख का अतिरिक्त क़र्ज़ एम एस ई सेक्टर को
१९) राष्ट्रीय विकास को समर्पित बजट, लोभ लुभावन व रेवड़ी बाटने वाला बजट नहीं
२०) अधोसंरचना, पूँजी विकास का बजट
२१) ७५० नई ई लैब्स
२२) शिक्षा को बढ़ावा, डिजीटल यूनिवर्सिटी, १-१२ कक्षा तक क्षेत्रीय भाषा में पढ़ाई
….,,,,.. विकासशील बजट… स्वागत योग्य
🙏🙏

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सत्यन गुरुजी को मध्य प्रदेश शासन का महा कवि प्रदीप सम्मान

इन्दौर। मध्यप्रदेश सरकार के संस्कृति मंत्रालय व साहित्य अकादमी द्वारा दिया जाने वाला मंचीय कविता का सर्वोच्च सम्मान ‘महाकवि प्रदीप सम्मान’ हिन्दी कवि सम्मेलन के शिखर कलश सत्यनारायण सत्तन को प्रदान करने की घोषणा की गई है। यह अलंकरण 25 जनवरी की संध्या 6 बजे रविन्द्र भवन, भोपाल में प्रदान किया जाएगा।

श्री सत्तन लगभग 6 दशकों से भी अधिक समय से हिन्दी कवि सम्मेलन के मंचों पर कविता पढ़ रहे हैं। यह सम्मान हिन्दी कविता का सम्मान है। मातृभाषा उन्नयन संस्थान द्वारा मंत्रालय व चयन समिति का आभार व्यक्त किया गया एवं गुरुजी को बधाई दी गई।

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टाटा ने हाइड्रोजन से चलने वाली बस बनाई

टाटा मोटर्स और इंडियन ऑयल ने मिलकर हाइड्रोजन से चलने वाली बस बनाई है। इस बस को ट्रायल के तौर पर चलाया जाएगा। यह हाइड्रोजन से चलने वाली भारत की पहली बस है। इंडियन ऑयल का रिसर्च एंड डिवेलपमेंट डिपार्टमेंट अपनी 57वां फाउंडेशन डे मना रहा है। टाटा मोटर्स और इंडियन ऑयल लंबे समय तक नए और स्वच्छ गतिशीलता समाधान की कुशलता और स्थायित्व को बेहतर ढंग से समझने के लिए हाइड्रोजन ईंधन सेल बस का लंबे समय तक परीक्षण करेंगे। ऐसी परियोजनाएं भारत सरकार की ‘मेक इन इंडिया’ पहल पर रिफलेक्ट करती हैं। टाटा मोर्टस पब्लिक ट्रांसपोर्ट के लिए क्लीन फ्यूल से चलने वाली बस लाकर इस मामले में आगे आ गया है।हाइड्रोजन फ्यूल सेल टेक्नॉलोजी पारंपरिक इंजन से लगभग तीन गुना ज्यादा बेहतर है। हाइड्रोजन फ्यूल सेल एक बैटरी की तरह काम करता है लेकिन इसे बैटरी की तरह चार्ज नहीं करना पड़ता है। फ्यूल सेल तब तक बिजली और पानी जेनरेट करता है जब तक उसे हाइड्रोजन और ऑक्सीजन सप्लाई की जाती है।

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हनुवंतिया में हेलीकॉप्टर यात्रा शुरू……

मध्यप्रदेश के खंडवा में इंदिरा सागर बैकवाटर पर बने हनुवंतिया टापू में छठवां जल महोत्सव चल रहा है। इस बार पर्यटकों को लुभाने गुरुवार से हेलीकॉप्टर की व्यवस्था शुरू की, लेकिन पहले पर्यटकों को निराशा ही हाथ लगी। शुभारंभ के निर्धारित समय से पौने दो घंटे देरी से हेलीकॉप्टर लैंड हुआ, शाम करीब 5.30 बजे के आसपास सूर्यास्त होने की वजह से पर्यटक प्राकृतिक सौंदर्य व पानी को निहार नहीं सके।

पर्यटन विकास निगम व शाश्वत एविएशन सर्विस प्राइवेट लिमिटेड के संयुक्त तत्वावधान में हनुवंतिया में हेलीकॉप्टर यात्रा शुरू कर दी गई है। प्राइवेट कंपनी द्वारा यात्रियों को 7 मिनट में 15 किलोमीटर की यात्रा जाने की प्रक्रिया शुरू कर दी है। इस 7 मिनट में सिंगाजी ताप विद्युत परियोजना, सिंगाजी धाम मंदिर, इंदिरा सागर जलाशय और बोरियामाल टापू जैसे अन्य कई स्थान पर्यटकों को दिखाए जाएंगे। हनुवंतिया में जल महोत्सव के दौरान हेलीकॉप्टर की सुविधा पहली बार शुरू की गई है। पहली बार 1 महीने तक हेलीकॉप्टर यात्रा की सुविधा रहेगी।

निर्धारित तय समय अनुसार हेलीकॉप्टर 16 दिसंबर को सुबह 10 बजे हनुवंतिया पहुंचना था लेकिन शाम 4.45 बजे आया, क्योंकि शाश्वत एविएशन सर्विस प्राइवेट लिमिटेड का ये हेलीकॉप्टर अकाेला से देरी से आया। इस वजह से लेटतलीफी रही। उधर, हेलीकॉप्टर का औपचारिक शुभारंभ भी लगभग शाम 5.30 बजे हुआ, क्योंकि पर्यटन मंत्री उषा ठाकुर, पर्यटन विभाग के प्रमुख सचिव शिवशेखर शुक्ला, शिल्पा गुप्ता ने देरी से वीडियो कांफ्रेंसिंग ज्वाइन किया। इन्हीं सभी कारणों की वजह से हेलीकॉप्टर यात्रा के शुभारंभ का पहला दिन औपचारिक ही बनकर रह गया।

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अब ऑफलाइन ही होंगी कॉलेज परिक्षाएं, जल्द तय होगा फॉर्मूला -मोहन यादव उच्च शिक्षामंत्री मध्यप्रदेश

Campuslivenews@…इंदौर। उच्च शिक्षा मंत्री डॉ. मोहन यादव ने कॉलेज एग्जाम को लेकर बड़ा बयान दिया है। उन्होंने कहा कि, कॉलेज के एक्जाम ऑनलाइन नहीं, ऑफलाइन होंगे। इसका फॉर्मूला जल्दी तय किया जाएगा। परीक्षा को लेकर प्रदेश के सभी विश्वविद्यालयों के कुलपति की बैठक जल्द बुलाई जाएगी।कोरोना के कारण लगाए गए प्रतिबंध और नियमों में बदलाव कर अब सभी कॉलेजों में ऑफलाइन एग्जाम कराने की तैयारी है। कोरोना के बाद लगाए गए सभी प्रतिबंध शासन ने हटा लिए हैं। गत वर्ष कोरोना संक्रमण के कारण कुछ विश्वविद्यालयों ने ऑनलाइन तो कुछ ने ओपन बुक पद्धति से परीक्षाएं कराई थीं। मंत्री ने कहा कि कोरोना संक्रमण कम होने के बाद अब सेमेस्टर और एनुअल एग्जाम ऑफलाइन ही होंगे। यानी छात्र-छात्राओं को परीक्षा केंद्रों पर जाना होगा। पूरे प्रदेश के विश्वविद्यालयों और उससे जुड़े कॉलेजों में एक रूप में एग्जाम होंगे।

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खूबसूरत चेहरे के साथ कॉफी से बना ये फेसपैक आपके लिए परफेक्ट

बेदाग और निखरी त्वचा भला किसकी चाहत नहीं होती। लेकिन बिना मेहनत किए आपको खूबसूरत बेदाग स्किन मिलना काफी मुश्किल है। खूबसूरत और बेदाग स्किन के लिए न सिर्फ हेल्दी लाइफस्टाइल और हेल्दी खानपान की जरूरत है बल्कि स्किन की सही देखभाल भी बहुत ही जरूरी है। हालांकि मार्केट में कई तरह के प्रोडक्ट्स मिल जाते हैं जो स्किन को चमकदार बनाने के साथ-साथ दाग-धब्बों से छुटकारा दिलाते हैं लेकिन इनके अंदर के कैमिकम आगे जाकर नुकसानदेय होते हैं।

अगर आप नैचुरल तरीके से खूबसूरत चेहरे के साथ स्किन संबंधी हर समस्या से छुटकारा पाना चाहते हैं तो कॉफी से बना ये फेसपैक आपके लिए परफेक्ट है। जानिए इसे घर में कैसे बनाकर आप खूबसूरत चेहरा पा सकते हैं।  

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ग़ुलाम हैदर: जिन्होंने लता, नूरजहां और शमशाद बेगम जैसी आवाज़ें फ़िल्मी दुनिया को दीं

फ़िल्म संगीत में मास्टर ग़ुलाम हैदर का वही स्थान है, जो फिज़िक्स में अल्बर्ट आइंस्टाइन और सर आइज़ैक न्यूटन का है. उन्होंने 90 साल पहले फ़िल्म संगीत के डीएनए का आविष्कार किया था. लगभग एक सदी बाद आज भी, रचना के मामले में फ़िल्म का प्लेबैक म्यूज़िक उसी अंदाज़ का है.

मास्टर जी को ये सम्मान हासिल है कि उन्होंने उपमहाद्वीप के संगीत को मलिका-ए-तरन्नुम नूरजहां और लता मंगेशकर जैसी सुरीली आवाज़ों का तोहफ़ा दिया. इतना ही नहीं बल्कि मास्टर ग़ुलाम हैदर ने ही 12 साल की उम्र में लोगों से शमशाद बेगम का परिचय कराया, जो बाद में अविभाजित भारत की पहली प्रसिद्ध फ़िल्म गायिका बनीं.

चूंकि शमशाद बेगम इस क्षेत्र की पहली प्लेबैक सिंगर थीं, इसलिए ही नूरजहां और लता मंगेशकर सहित उनके बाद आने वाली गायिकाओं ने शमशाद बेगम की शैली का उपयोग करते हुए गायकी के अपने अनोखे अंदाज़ की बुनियाद रखी.

मास्टर ग़ुलाम हैदर ने ही 74 साल पहले लता मंगेशकर की क्षमताओं को पहचाना था, जब वो कमर्शियल बाजार में एक ‘कोरस गर्ल’ थीं. बीबीसी उर्दू से बात करते हुए लता मंगेशकर को ये बातें बिलकुल ऐसे याद थी, जैसे कल की ही बात हो.

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सर्दियों में जरूर खाएं अरबी, मोटापा कंट्रोल करने समेत कई हैं फायदे

जड़ वाली सब्जियों में अरबी को सबसे स्वादिष्ट और सेहतमंद माना जाता है. भारत और एशिया में इसे सबसे ज्यादा खाया जाता है. इसकी दो किस्में होती हैं एक काली अरबी एक ऐसी सब्जी है जो सर्दियों के मौसम में बड़े चाव से खाई जाती है. जड़ वाली सब्जियों में अरबी को सबसे स्वादिष्ट और सेहतमंद माना जाता है. भारत और एशिया में इसे सबसे ज्यादा खाया जाता है. इसकी दो किस्में होती हैं एक काली जबकि दूसरी हरे तने वाली होती है.

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विजया दशमी में शस्त्र पूजन का महत्व

शस्त्र निष्क्रिय होते हुए भी सक्रिय होता है… मतलब अगर वो कहीं किसी आलमारी में पड़ा पड़ा जंग खा रहा हो तो भी अपना काम करता रहता है उसकी मौजूदगी ही शत्रुओं के बुरे और कुत्सित विचारों को नष्ट करने के लिए काफी होती है ।

-दुनिया में अशांति इसलिए है क्योंकि सज्जनों ने शस्त्रों का त्याग कर दिया है और दुर्जन सदैव की तरह शस्त्रों से लैस हैं यही वजह है कि दुर्जन हावी हैं और धरती पर अनाचार फैलता जा रहा है

-दुनिया को दो हिस्सों में बांटा जा सकता है एक जिनके पास शस्त्र होता है और दूसरा जिनके पास शस्त्र नहीं होता है… जिनके पास शस्त्र होता है वो सदैव निडर और वीर बने रहते हैं और जिनके पास शस्त्र नहीं होते हैं और वो सदैव भयभीत होते हैं और कायर पुरुष बने रहते हैं

-जिस घर में अस्त्र शस्त्र होते हैं उस घर की स्त्रियों पर कभी किसी की कुदृष्टि डालने की हिम्मत भी नहीं होती है और जिनके घर में अस्त्र शस्त्र नहीं होते हैं उनकी स्त्रियों के साथ राह चलते छेड़खानी होती है लव जिहाद जैसी घटनाएं होती हैं और वो सदैव थाने के चक्कर ही लगाते रह जाते हैं… उन्हें बदनामी के सिवाय कभी कुछ हासिल नहीं होता है।

-सत्यमेव जयते… यानी सत्य की ही विजय होती है इस तरह की सूक्तियों के भरोसे बैठने से कोई फायदा नहीं है… सत्य तो हिंदुओं के साथ ही है फिर उनका पलायन क्यों हो रहा है ? सत्य तो युद्धिष्ठिर के साथ था लेकिन फिर भी वन वन भटकते रहे… जब युद्धिष्ठिर ने शस्त्र उठाया तभी सत्यमेव जयते हुआ । इसीलिए अब कहावतें बदल गई हैं… ये कलियुग है और कलियुग में सदैव शस्त्र मेव जयते होता है… यानी जिसके पास शस्त्र होगा उसी की विजय होगी । इसलिए शस्त्र की खरीद करो… अपने पास सदैव शस्त्र रखो ।

-ज्योतिष के हिसाब से भी ध्यान दें… शस्त्र का मतलब है… मंगल ग्रह… अगर आपके पास शस्त्र है तो आपका मंगल मजबूत है और अगर आपका मंगल मजबूत है तो आप शत्रुओं पर सदैव विजय प्राप्त करते रहेंगे… इसलिए अपनी भुजाओं को शस्त्रों से मजबूत करें ।

  • एक बार अपने हाथ में शस्त्र लेकर देखो… तब आपको ये महसूस होगा कि देशद्रोही शत्रु चींटियों के समान हैं। शस्त्र का होना ही आत्मविश्वास वर्धक महान मानसिक औषधि है इसका नित्य सेवन करते रहो ।
  • राष्ट्र के शत्रुओं की संख्या गिनकर चिंता में मत पड़ो… चिंता सदैव इस बात की करो कि तुम्हारे पास कितने अस्त्र शस्त्र है… सदैव सुनिश्चित करो कि तुम्हारे अस्त्र शस्त्रों की संख्या तुम्हारे शत्रुओं की संख्या से ज्यादा हो
  • जैसा को तैसा जवाब देना सीखो… शिकायत मत करो… शिकायत लेकर किसके पास जा रहे हो… ये संविधान… कानून… प्रशासन और व्यवस्था सिर्फ उनके लिए है जो शक्तिशाली हैं । कायर लोगों का साथ तो भगवान भी नहीं देता.. कायर लोग सिर्फ शिकायत करते रह जाते हैं… इतने दिनों में आपको ये अवश्य महसूस हुआ होगा कि प्रशासन भी सदैव अत्याचार करने वाले शक्तिशालियों का साथ ही देता है
  • अपनी सुरक्षा की ज़िम्मेदारी खुद लो… कोई सेना… कोई सरकार तुमको बचाने नहीं आएगी… जब तुम पर संकट आएगा तो उस वक्त तुम और सिर्फ तुमको ही उसका सामना करना होगा… तुम्हारे सिवाय कोई तुम्हारी प्राण रक्षा नहीं कर सकेगा ।
  • इसीलिए नियमानुसार शस्त्रों का संचय करो… सदैव पराक्रमी बनो… सज्जन बनो लेकिन कायर नहीं… शस्त्र धारण करके सज्जन बनो तभी तुम्हारी सज्जनता सुशोभित होगी ।
  • इस सूक्ति का नित्य पठन करते रहें “कोई सिंह को, वन के राजा के रूप में अभिषेक या संस्कार नहीं करता है अपने पराक्रम के बल पर सिंह स्वयं जंगल का राजा बन जाता है”

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त्रिपुरा की उंनकोटि एक रहस्यमय देवस्थल

त्रिपुरा के उनाकोटि पहाड़ में मौजूद हैं असंख्य हिन्दू देवी-देवताओं की मूर्तियां :

संकीर्ण पगडंडियां, दूर-दूर तक फैले जंगल और कोलाहल मचाते नदी स्रोतों के मध्य स्थित है त्रिपुरा की ‘उनाकोटि’। जिसे पूर्वोत्तर भारत के सबसे बड़े रहस्यों में भी गिना जाता है।यहाँ पर जगंलों की बीच शैलचित्रों और मूर्तियों का अद्भुत भंडार है।

इस स्थल का इतिहास पौराणिक काल से माना जाता है। उनाकोटि की सबसे खास बात यहां मौजूद असंख्य हिन्दू देवी-देवताओं की मूर्तियां हैं।जो इस स्थान को सबसे अलग बनाती हैं। उनाकोटि एक पहाड़ी इलाका है जो दूर-दूर तक घने जंगलों से भरा है। उनाकोटि लंबे समय से शोध का बड़ा विषय बना हुआ है, क्योंकि इस तरह जंगल की बीच जहां आसपास कोई बसावट नहीं एक साथ इतनी मूर्तियों का निर्माण कैसे संभव हो पाया।

उनाकोटि में दो तरह की मूर्तियों मिलती हैं, एक पत्थरों को काट कर बनाई गईं मूर्तियां और दूसरी पत्थरों पर उकेरी गईं मूर्तियां। यहां ज्यादातर हिन्दू धर्म से जुड़ी प्रतिमाएं हैं, जिनमें भगवान शिव, देवी दुर्गा, भगवान विष्णु, और गणेश भगवान आदि की मूर्तियां स्थित है। इस स्थान के मध्य में भगवान शिव की एक विशाल प्रतिमा मौजूद है, जिन्हें उनाकोटेश्वर के नाम से जाना जाता है।

भगवान शिव की यह मूर्ति लगभग 30 फीट ऊंची बनी हुई है। इसके अलावा भगवान शिव की विशाल प्रतिमा के साथ दो अन्य मूर्तियां भी मौजूद हैं, जिनमें से एक मां दुर्गा की मूर्ति है। साथ ही यहां तीन नंदी मूर्तियां भी दिखीं हैं। इसके अलावा यहां और भी ढेर सारी मूर्तियां बनी हुई हैं।

इस स्थान के मुख्य आकर्षणों में भगवान गणेश की अद्भुत मूर्तियां भी हैं। जिसमें गणेश की चार भुजाएं और बाहर की तरफ निकले तीन दांत को दर्शाया गया है। इसके अलावा यहां भगवान गणेश की चार दांत और आठ भुजाओं वाली दो और मूर्तियां भी हैं। इन अद्भुत मुर्तियों के कारण यह स्थान काफी काफी रोमांच पैदा करता है। यहां की अद्भुत मूर्तियों को देखने के लिए अब देश-विदेश के लोग आते हैं।

पौराणिक कथा के अनुसार इन मूर्तियों का निर्माण कालू नाम के शिल्पकार ने किया था। कथा के अनुसार यह कालू शिल्पकार भगवान शिव और माता पार्वती के साथ कैलाश पर्वत जाना जाता था, लेकिन यह मुमकिन नहीं था। शिल्पकार की जाने की जिद्द के कारण यह शर्त रखी गई कि अगर वो एक रात में एक करोड़ (एक कोटि) मूर्तियों का निर्माण कर देगा तो वो भगवान शिव और पार्वती के साथ कैलाश जा पाएगा। यह बात सुनते ही शिल्पकार काम में जुट गया, उसने पूरी रात मूर्तियां का निर्माण किया। लेकिन सुबह जब गिनती हुई तो पता चला उसमें एक मूर्ति कम है। इस तरह वो शिल्पकार धरती पर ही रह गया। स्थानीय भाषा में एक करोड़ में एक कम संख्या को उनाकोटि कहते हैं। इसलिए इस जगह का नाम उनाकोटि पड़ा।

आसपास के लोग यहां आकर इन मूर्तियों की पूजा भी करते हैं। यहां हर साल अप्रैल महीने के दौरान अशोकाष्टमी मेले का आयोजन किया जाता है। जिसमें शामिल होने के लिए दूर-दूर से हजारों श्रद्धालु यहां आते हैं। इसके अलाव यहां जनवरी के महीने में एक और छोटे त्योहार का आयोजन किया जाता है।

उनाकोटि त्रिपुरा के राजधानी शहर अगरतला से लगभग 125 किमी की दूरी पर स्थित है। आप उनाकोटि सड़क मार्ग के द्वारा पहुंच सकते हैं। त्रिपुरा के बड़े शहरों से यहां तक के लिए बस सेवा उपलब्ध है। यहां का नजदीकी हवाई अड्डा अगरतला है। रेल मार्ग से कुमारघाट तक जा सकते हैं। वहाँ से सड़क मार्ग से उनाकोटि पहुँच सकते हैं।

मुझे भी इस अद्भुत संसार को देखने का अवसर 31 अगस्त, 2019 को त्रिपुरा प्रवास के दौरान मिला।

हम कश्मीर के मामले में हस्तक्षेप नहीं करेंगे-तालिबानी नेता अनस हक्कानी

नई दिल्ली: तालिबान (Taliban) ने अमेरिकी सैनिकों की वापसी के बाद अफगानिस्तान पर अब पूरी तरह कब्जा कर लिया है. इस बीच पाकिस्तान तालिबान को भारत के खिलाफ उकसाने में लगा है और वह कश्मीर को लेकर साजिश रचने की कोशिश कर रहा है, लेकिन तालिबान ने पाकिस्तान की नापाक उम्मीदों को बड़ा झटका दिया है और साफ किया है कि वह कश्मीर मुद्दे पर किसी तरह का दखल नहीं देगा.

तालिबान ने कश्मीर को बताया आंतरिक मुद्दा

सीएनएन-न्यूज18 के बात करते हुए तालिबानी नेता अनस हक्कानी (Anas Haqqani) ने कश्मीर मुद्दे को भारत और पाकिस्तान का आंतरिक मामला बताया और कहा कि हम कश्मीर के मामले में हस्तक्षेप नहीं करेंगे. बता दें कि अनस हक्कानी, हक्कानी नेटवर्क के संस्थापक जलालुद्दीन हक्कानी के सबसे छोटे बेटे हैं.

कश्मीर अधिकार क्षेत्र का हिस्सा नहीं: हक्कानी

अनस हक्कानी से पूछा गया कि पाकिस्तान हक्कानी नेटवर्क के बेहद करीब है और वह कश्मीर में लगातार दखल दे रहा है. क्या आप भी पाकिस्तान को समर्थन देने के लिए कश्मीर में दखल देंगे? इस पर उन्होंने कहा, ‘कश्मीर हमारे अधिकार क्षेत्र का हिस्सा नहीं है और हस्तक्षेप नीति के खिलाफ है. हम अपनी नीति के खिलाफ कैसे जा सकते हैं? इसलिए यह स्पष्ट है कि हम कश्मीर में हस्तक्षेप नहीं करेंगे.’

अब गूगल की सहायता से आँखे करेंगी दिल की बिमारियों की स्कैनिंग

गूगल और उसके स्वास्थ्य-तकनीकी में सहयोगी Verily के वैज्ञानिक ने इंसानों में हार्ट की बीमारी का पता लगाने का एक तरीका ढूंढ़ निकाला है। कंपनी ऑर्टिफिशियल इंटेलीजेंस से मरीज की ऑख के रेटिना को स्कैन करेगी और हार्ट के बीमारी का पता लगाएगी। कंपनी का सॉफ्टवेयर किसी की वास्तविक उम्र और ब्लड प्रेशर के अलावा यह भी बताने में सक्षम है कि व्यक्ति स्मोकिंग करता है या नहीं।

गूगल का यह सॉफ्टवेयर ऑख की रेटिना को स्कैन हार्ट की बीमारी के कारण के बारे में भी बता सकता है। इस एल्गोरिदम से डॉक्टरों को हार्ट से संबंधित बीमारी का इलाज करने में आसानी होगी और समय की भी बचत होगी। इस सॉफ्टवेयर से स्कैन कराने के बाद आपको ब्लड टेस्ट कराने की जरूरत नहीं पड़ेगी। लेकिन इसे क्लिनिकल मेथड के तौर पर अपनाने से पहले इसका कई बार टेस्ट जरूरी है।  

गूगल और Verily के वैज्ञानिक ने इस एल्गोरिदम से करीब 3 लाख मरीजों का मेडिकल डाटासेट तैयार किया और उसका विश्लेषण किया। इसमें ऑख के स्कैन के साथ ही जनरल मेडिकल डाटा भी है। वैज्ञानिकों ने आंखों का स्कैन करने के बाद उसका विश्लेषण किया।  

गूगल एल्गोरिदम के सामने दो इंसान की रेटिना इमेज प्रस्तुत की गई। एक इंसान पिछले 5 साल से हृदय की बीमारी से पीड़ित था, जबकि दूसरा स्वस्थ था। गूगल एल्गोरिदम ने दोनों को बारे में सटीक जानकारी दी। गूगल एल्गोरिदम ने हृदय की बीमारी से पीड़ित के बारे में बताया कि इसमें 70 फीसदी हार्ट अटैक का खतरा है। जबकि ब्लड टेस्च कराने पर पता चला कि इस व्यक्ति में 72 फीसदी हार्ट अटैक का खतरा है।

FM मिनिस्टर सीतारमण शुभारम्भ करेगी NMP जिसमें प्राइवेट कंपनियों को ‘किराये’ पर दी जाएगी सरकारी प्रॉपर्टी

सरकार एक तरफ घाटे में चल रही सरकारी कंपनियों को बंद कर या प्राइवेट कंपनियों के हाथों बेचकर पैसा जुटाने में लगी है, तो दूसरी ओर सरकारी प्रोजेक्ट को प्राइवेट कंपनियों के साथ साझा कर या किराये पर देकर आमदनी बढ़ाने की तैयारी है. सरकार ने इस दिशा में अगला कदम बढ़ा दिया है जिसे ‘नेशनल एसेट मोनेटाइजेशन’ का नाम दिया गया है. इसके लिए सरकार ने नेशनल मोनेटाइजेशन पाइपलाइन (National Monetisation Pipeline) भी शुरू कर दिया है.

इस पाइपलाइन या कार्यक्रम की एक झलक बजट भाषण में वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने दिया था. बजट के दौरान निर्मला सीतारमण ने कहा था कि सरकार इंफ्रास्ट्रक्चर सेक्टर की ऐसी पुरानी परियोजनाओं के लिए राष्ट्रीय मौद्रिकरण कार्यक्रम (National Monetisation Pipeline) शुरू करेगी जहां इसकी संभावना दिखेगी. सीतारमण ने लोकसभा में 2021-22 का बजट पेश करते हुए इसकी घोषणा की. इस योजना के तहत गैस पाइपलाइन, राजमार्ग जैसी परियोजनाओं को निजी क्षेत्र के साथ साझा करने या किराये पर चढ़ाकर (monetise national assets) आय बढ़ाने का प्रस्ताव है.

क्या है नेशनल मोनेटाइजेशन पाइपलाइन

नेशनल मोनेटाइजेशन पाइपलाइन के तहत आठ मंत्रालयों की प्रॉपर्टी प्राइवेट कंपनियों के साथ साझा की जा सकती है या किराये पर दी जा सकती है. साझा करने का अर्थ होगा कि सरकारी और प्राइवेट कंपनियां मिलकर किसी प्रोजेक्ट को आगे बढ़ाएंगी जबकि किराये पर देने का मतलब है किसी सरकारी काम को प्राइवेट हाथों में देकर उससे किराया वसूला जाएगा. जिन आठ मंत्रालयों में यह काम होना है, उनमें रेलवे, टेलीकॉम, रोड ट्रांसपोर्ट और हाइवे, बिजली, युवा मामले और खेल, नागरिक उड्डयन, पेट्रोलियम और नेचुरल गैस, शिपिंग, पोर्ट्स और वाटरवेज.

नीति आयोग की तैयारी

‘इंडियन एक्सप्रेस’ की एक रिपोर्ट के मुताबिक, नीति आयोग वित्तीय वर्ष 21-24 के लिए नेशनल मोनेटाइजेशन पाइपलाइन (कार्यक्रम) बना रहा है. नीति आयोग ने इन आठ मंत्रालयों से कहा है कि वे अपनी प्रॉपर्टी की पहचान करें और बताएं जिन्हें पाइपलाइन में शामिल किया जा सकता है. रिपोर्ट के मुताबिक, सरकार सड़क, बिजली, तेल और गैस पाइपलाइन, टेलीकॉम टावर, स्पोर्ट्स स्टेडियम और अन्य संपत्तियों को प्राइवेट कंपनियों के साथ साझा किया जा सकता है या प्राइवेट कंपनियों को किराये पर दिया जा सकता है.

नितिन गडकरी ने क्या कहा

मोनेटाइजेशन या मौद्रिकरण के बारे में केंद्रीय मंत्री नितिन गडकरी बहुत पहले इशारा दे चुके हैं. केंद्रीय सड़क परिवहन, राजमार्ग एवं एमसएमई मंत्री नितिन गडकरी ने कहा था कि भारतीय राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण (NHAI) की अगले पांच साल में टोल-ऑपरेट-ट्रांसफर (टीओटी) के जरिये राजमार्गों का मोनेटाइजेशन कर एक लाख करोड़ रुपये जुटाने की योजना है. गडकरी ने कहा था, ‘एनएचएआई अगले पांच साल में टीओटी के मार्फत राजमार्गों का मौद्रिकरण कर एक लाख करोड़ रुपये जुटाना चाह रहा है. हमें शानदार प्रतिक्रियाएं मिल रही हैं. हमें विदेश के निवेशकों के साथ ही पेंशन कोषों से भी पेशकश प्राप्त हुई हैं.’

रेलवे में होगा बड़ा काम

ऐसे ही एक प्रयास के तहत सरकार ने 150 पैसेंजर ट्रेन को प्राइवेट कंपनियों को देने की तैयारी की है. एयरपोर्ट्स अथॉरिटी ऑफ इंडिया (Airports Authority of India) के कुछ काम प्राइवेट कंपनियों को दिए जाएंगे ताकि दिल्ली, मुंबई, बेंगलुरु और हैदराबाद एयरपोर्ट को ऑपरेट किया जा सके. रिपोर्ट के मुताबिक, दिल्ली स्थित जवाहरलाल नेहरू स्टेडियम को किसी प्राइवेट कंपनी को लीज या किराये पर दिया जा सकता है.

रिपोर्ट की मानें तो रेल मंत्रालय ने वित्त वर्ष 2021-22 के दौरान किराये से 90 हजार करोड़ रुपये कमाने की योजना बनाई है. इसके लिए मंत्रालय 150 पैसेंजर ट्रेन को प्राइवेट कंपनियों को दे सकता है. अंत मार्च तक देश के 50 रेलवे स्टेशनों को दुबारा विकसित करने के लिए आरएफपी (रिक्वेस्ट फॉर प्रोपोजल) और आरएफक्यू (रिक्वेस्ट फॉर क्वालिफिकेशन) जारी किया जा सकता है.

BSNL, MTNL का क्या होगा

सरकार एमटीएनएल, बीएसएनएल और भारतनेट का मोनेटाइजेशन करना चाहती है. इसी तरह खेल मंत्रालय देश के स्पोर्ट्स स्टेडियम का मोनेटाइजेशन करना चाहता है. खेल मंत्रालय ने इसके लिए 20 हजार करोड़ रुपये का लक्ष्य रखा है. स्पोर्ट्स स्टेडियम प्राइवेट कंपनियों को लीज पर दिए जाएंगे और स्टेडियम का ऑपरेशन और मेंटीनेंस कॉन्ट्रेक्ट पर दिया जा सकता है. कोरोना महामारी के दौरान जब अर्थव्यवस्था ढीली पड़ रही है, सरकारी खर्च बढ़ रहा है और आय लगातार घट रही है, तो सरकार मोनेटाइजेशन का काम तेजी से बढ़ाने पर विचार कर रही है.

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जाने मालवा के नाम के पीछे की कहानी

मालव जनजाति का उल्लेख सर्वप्रथम ई. पू. चौथी सदी में मिलता है, जब यह जाति सिकंदर से युद्ध में पराजित हुई थी। ये मालव प्रारंभ में पंजाब तथा राजपूताना क्षेत्रों के निवासी थी, लेकिन सिकंदर से पराजित होकर वे अवन्ति (वर्तमान उज्जैन) व उसके आस-पास के क्षेत्रों में बस गये । उन्होंने आकर (दशार्ण) तथा अवन्ति को अपनी राजनीतिक गतिविधियों का केंद्र बनाया। दशार्ण की राजधानी विदिशा थी तथा अवन्ति की राजधानी उज्जयिनी थी। कालांतर में यही दोनों प्रदेश मिलकर मालवा कहलाये। इस प्रकार एक भौगोलिक घटक के रूप में ‘मालवा’ का नाम लगभग प्रथम ईस्वी सदी में मिलता है। मालवा पर करिब 547 वर्षो तक भील राजाओ का शासन रहा,जिनमें राजा धन्ना भील प्रमुख रहे ।[1]। राजा धन्ना भील के ही एक उत्तराधिकारी ने 730 ईसा पूर्व में दिल्ली के सम्राट को चुनौती दी थी , इस प्रकार मालवा उस समय एक शक्तिशाली साम्राज्य था [2]

मौर्य शासक चंद्रगुप्त मौर्य के समय के शासक राजा गरिमध्वज भील थे , वे अपनी बहादुरी और शौर्य के लिए जाने जाते थे , चन्द्रगुप्त मौर्य के मालवा आक्रमण के दौरान उनका सामना भील राजा से हुआ , लेकिन चाणक्य की नीति के फलस्वरूप दोनों राजाओं में मित्रता हो गई [3]

source :- विक्कीपेडिया

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नींद ना आने से हैं परेशान? 10-3-2-1 की ट्रिक तुरंत करेगी काम

बहुत कम लोगों के साथ ऐसा होता है कि वो बिस्तर पर जाते ही तुरंत सो जाएं. जल्दी नींद ना आने की समस्या आम है. कई लोग जल्दी सोना तो चाहते हैं पर लगातार करवट बदलते रहने के बाद भी वो आसानी से सो नहीं पाते हैं. ऐसे ही लोगों के लिए लंदन के प्रसिद्ध डॉक्टर राज करण ने एक अनोखी ट्रिक बताई है. डॉक्टर राज ने टिकटॉक पर जल्दी सोने के लिए जो ट्रिक बताई है उसे 10-3-2-1 मेथड का नाम दिया है. डॉक्टर का कहना है कि इस मेथड को अपनाने से आपका शरीर अपने आप नींद के लिए खुद को तैयार करने लगता है.’ देखें क्या है 10-3-2-1 ट्रिक.

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Pure hydrogen fuel can be produced by using alluminium with water at room tempreture

Using the aluminum-water reaction to generate hydrogen doesn’t produce any greenhouse gas emissions, and it promises to solve the transportation problem for any location with available water. Simply move the aluminum and then react it with water on-site. “Fundamentally, the aluminum becomes a mechanism for storing hydrogen — and a very effective one,” says Douglas P. Hart, professor of mechanical engineering at MIT. “Using aluminum as our source, we can ‘store’ hydrogen at a density that’s 10 times greater than if we just store it as a compressed gas.”

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टाटा भी internet की दुनिया में कदम रखने को तैयार

टाटा सैटेलाइट इंटरनेट सेवा इंटरनेट की दुनिया में अपनी जगह बना रही है। जैसे-जैसे डेटा का उपयोग बढ़ा है, नई कंपनियां भी बाजार में प्रवेश कर रही हैं। जहां एलन मस्क के स्टारलिंक ने बाजार में प्रवेश किया, वहीं अब टाटा ग्रुप भी बाजार में प्रवेश कर रहा है। टाटा के इस कदम से न सिर्फ स्टारलिंक बल्कि मुकेश अंबानी की रिलायंस जियो को भी बड़ा झटका लगा है।टाटा ने हाल ही में सेमीकंडक्टर के निर्माण की घोषणा की। इस सेमीकंडक्टर का उपयोग मोबाइल और अन्य इलेक्ट्रॉनिक उपकरणों को बनाने और उपयोग करने के लिए किया जाता है। इसके अलावा कंपनी 5G लॉन्च करने पर भी काम कर रही है। ऐसी अफवाहें हैं कि टाटा समूह जल्द ही सैटेलाइट इंटरनेट सेवा पर आधारित ब्रॉडबैंड सेवा शुरू कर सकता है। संभवत: इसके लिए टाटा समूह ने टेलीसैट से संपर्क किया है। जो 2024 तक खुला रह सकता है।
फिलहाल बाजार में JIOFIBER की काफी चर्चा है। यूजर्स इसकी स्पीड और सर्विस से काफी खुश हैं। एलन मस्क की स्टारलिंक सेवा की भी हाल ही में घोषणा की गई है। जो जल्द ही भारत में लॉन्च हो सकता है। ऐसे में टाटा समूह ने भी इसमें कदम रखा है। इससे एलन मस्क और जियो दोनों के लिए मुश्किलें बढ़ सकती हैं। अनुमान है कि स्टारलिंक 2022 तक 150 एमबीपीएस तक की गति प्रदान करने में सक्षम होगा। इन मुद्दों के आधार पर कहा जा सकता है कि टाटा समूह की इंटरनेट सेवा शुरू होने के बाद यूजर्स को कई लाभकारी प्लान मिल सकते हैं।

24 घंटे में 203 किलोमीटर दौड़े इंदौरी कार्तिक

7 अगस्त शाम 6 से, 8 अगस्त शाम 6 बजे, कुल 24 घंटे 400 मीटर के 507 लेप्स करीब 203 किलोमीटर की सतत दौड़4600 किलोमीटर इंदौर से बेंगलुरु यशवंतपुर (कर्नाटक) की थका देने वाली लम्बी यात्रा । निढ़ाल कर देने वाली गर्मी, पल पल दौड़ में बाधा बन रही थी कई नामचीन धावक गर्मी के सामने हार मान दौड़ से बहार हो चुके थे । उस बीच हल्की सी बारिश ने आग में घी का काम किया स्पर्धा चरम सीमा में थी मजे हुवे धावक हार मानने को तैयार नही थे सिर और बदन पर पानी डाल सतत दोड़ रहे थे कुछ फिजियो की मदद से शरीर की टूट फुट को मरहमपट्टी करवा रहे थे,तो कुछ डायट प्लान चेंज कर गर्मी से निजात पाने की नाकाम कोशिश कर रहे थे । ऐसे में सदी हुई गति नमक का उपयोग कर अपने को क्रैम्प से बचाते हुवे 200 किलोमीटर का टारगेट सेट कर घड़ी से बात करते हुवे । अपनी गाड़ी को दूसरे गैर में ही चलाना उंचीत समझा ओर सतत दौड़ जारी थी । परंतु जूते में कैद पैर मोम की तरह पिघल रहे थे । तलवे छील से गए नाखून काले पड़ गए छाले फुट कर घाव बन गए यहाँ हिम्मत हारना मतलब दौड़ से बहार डिस्टेंस 220 का था पर पैर में असहयनी दर्द के बावजूद अंततः 24 घंटे का सफर तय कर ही लिया हम इंदौरी कहा रुकने,थमने वाले विजय बिगुल बजते ही ये कदम थमे ओर सूर्य देव को प्रणाम कर अगले मिसन इस से भी ज्यादा गर्मी में एक रेकार्ड खंडित करने के प्लान को लिए इंदौर की ओर कुच कर गए ,ये कदम जल्द ही मुलाकात होगी एक खतरनाक मिसन पर विजय पाने की वैसे 24 घंटे स्टेडियम रन का यह मेरा पहला अनुभव था 12 घंटे स्टेडियम रन में तो बहुत झंडे गाड़े है । ऐसी जानकारी भी लगी कि 24 घंटे में 200 किलोमीटर करने वाले अब तक इंडिया में शायद 10 से 15 ही है अपुन अपने पहले अनुभव और सब से कम उम्र में 24 घंटे में 203 करने वाले सब से युवा धावक भी बने तो भैया जी आशीष बनाए रखना आप का यही आशीष हर दौड़ में मेरा रक्षा कवच बन काम करता है

जाने इंदौर के आसपास की वादियों में घूमने का मनोरम द्रश्य

तिन्छा फॉल

इंदौर से करीब 25 किलोमीटर दूर सिमरोल के पास बेहद खूबसूरत झरना है।तिन्छा फॉल   यानि  खंडवा रोड स्थित इस झरने को देखने के लिए स्वयं के वाहन से पहुंचा जा सकता है अकल्पनीय प्राकृतिक  सौन्दर्य के दर्शन  होंगे आपको यंहा पर

जोगी भड़क

इंदौर से 55 किलोमीटर और मानपुर से 10 किमी आगे काफी ऊंचाई से यह झरना गिरता है। ट्रैकिंग करने वालों से लिए यह पसंदीदा ट्रैकों में से एक है। रास्ता अपनेआप में मंज़िल जैसा ही ही लगता है। ऐसा ही है जोगी भड़क का रास्ता। यह ऐसा झरना है जो अंग्रेज़ी अक्षर “एस’ के आकार के वैली में गिरता है। वैली बहुत  गहरी भी है और खूबसूरत भी।

यंहा पर आप  कार या बाइक से जा सकते हैं। इंदौर से ए बी रोड होते हुए मानपुर तक जाते हैं। घाट क्रॉस करते  ही  ढाल गांव आ जायेगा फिर  यहां से पश्चिम में एक कच्चा रास्ता जाता है। कार जा सकती है लेकिन बाइक से नदी तक चली जाएगी। एक किलोमीटर चलने के बाद कार को साइड में पार्क कर दें ट्रैकिंग करते हुए एक किलोमीटर दूर नदी के पास पहुंच कर झरने का  लुफ़्त्त उठायें

हत्यारी खोह

इंदौर से करीब 30 किलोमीटर दूर हत्यारी खोह नाम का ट्रैकिंग स्पॉट है। यहां ऊंचाई से गिरने वाला झरना और प्राकृतिक नजारे दिलों को बहुत ही अंदर तक   छू जाते हैं। यहां पहुंचने के लिए कंपेल से हुए तेलीया खेड़ी में वाहन खड़ा करके करीब दो किलोमीटर ऊबड़-खाबड़ रास्तों पर पैदल चलना होता है। कृपया इसके नाम पर न  जाएँ  । बहुत ही मनोरम जगह है

गिदिया खोह

इंदौर से करीबन 45 किलोमीटर दूर स्थित गिदिया खोह तक डबल चौकी से सिवनी होते हुए पहुंचा जा सकता है। यहां भी काफी ऊंचाई से बहुत ही सुंदर दिखने वाला झरना गिरता है। साथ ही आसपास के प्राकृतिक नजारे भी मन मोह लेने वाले हैं। ट्रैकिंग की पसंदीदा लिस्ट में गिदिया खोह भी एक अहम ट्रैक है।

मुहाड़ी वाटर फॉल

इंदौर से २६ किलोमीटर दुरी पर स्थित ये वाटर फॉल अपनी अनुपम सुंदरता के लिए प्रसिद्ध है ।ये झरना  तिल्लोर बुजुर्ग के समीप है ।एक बात का ध्यान रखे की यंहा पर मोबाइल का नेटवर्क नहीं मिलता है । बारिश के समय ये पुरे यौवन पर रहता है ।

तो  दोस्तों  उपरोक्त सभी वाटर फॉल तथा पिकनिक स्पॉट  इंदौर  के नजदीक ही है ।  आप अपने पुरे परिवार या मित्रो के साथ जा कर इन सभी  वाटर फॉल तथा पिकनिक स्पॉट का भरपूर  आनंद ले सकते है । हमारी आप लोगो से गुजारिश है की थोड़ी सी सावधानी अवश्य रखे । अरे , एक बात और  हमारा इंदौर पुरे भारत में स्वछता में नम्बर एक है  तो  यदि आप इंदौरियंस है तो कृपया इन सभी जगहों पर भी  स्वछता बनायें रखें । आप अगर इंदौरियंस नहीं भी है तो इन  सभी  वाटर फॉल तथा पिकनिक स्पॉट पर कृपया स्वछता बनायें रखें  । मालवा की इस धरती पर सभी का स्वागत है   

inDefth :-force-based interaction with objects beyond a physical barrier

 inDepth, a novel system that enables force-based interaction with objects beyond a physical barrier by using scalable force sensor modules. inDepth transforms a physical barrier (eg. glass showcase or 3D display) to a tangible input interface that enables users to interact with objects out of reach, by applying finger pressure on the barrier’s surface. To achieve this interaction, our system tracks the applied force as a directional vector by using three force sensors installed underneath the barrier. Meanwhile, our force-to-depth conversion algorithm translates force intensity into a spatial position along its direction beyond the barrier. Finally, the system executes various operations on objects in that position based on the type of application. In this paper, we introduce inDepth concept and its design space. We also demonstrate example applications, including selecting items in showcases and manipulating 3D rendered models

जाने क्या है e-RUPI , देश में एक बड़े बदलाव का संकेत

नई दिल्ली: प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी (PM Modi) ने सोमवार को डिजिटल भुगतान समाधान ‘ई-रुपी’ (e-RUPI) लॉन्च किया है. ‘ई-रुपी’ डिजिटल भुगतान के लिए एक कैशलेस और संपर्क रहित माध्यम है. ‘ई-रुपी’ को नेशनल पेमेंट्स कॉरपोरेशन ऑफ इंडिया ने अपने यूपीआई प्लेटफॉर्म पर वित्तीय सेवा विभाग, स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय और राष्ट्रीय स्वास्थ्य प्राधिकरण के सहयोग से विकसित किया है. इसका मकसद सरकारी कल्याणकारी योजनाओं के दुरुपयोग को रोकना है. इसके जरिए यह सुनिश्चित होगा कि लाभ उस तक ही पहुंचेगा, जिस तक पहुंचना चाहिए. इसे लाभार्थियों के मोबाइल फोन पर क्यूआर कोड या एसएमएस के रूप में ट्रांसफर किया जा सकता है.

या है e-RUPI और कैसे करता है ये काम?

पीएमओ के एक बयान के मुताबिक, अब लाभार्थी अपने मोबाइल फोन पर एक क्यूआर कोड या एक एसएमएस-आधारित इलेक्ट्रॉनिक वाउचर पा सकते हैं. ई-वाउचर का लाभ उठाने के लिए उन्हें कार्ड, डिजिटल भुगतान ऐप या यहां तक ​​कि इंटरनेट बैंकिंग की जरूरत नहीं है. उदाहरण के तौर पर आपने एक प्रोडेक्ट खरीदा और खरीदारी पर वाउचर मिला. ई-आरयूपीआई में आपको वाउचर को हार्ड कॉपी लेकर जाने की जरूरत नहीं होगी. वाउचर आपके मोबाइल फोन पर क्यूआर कोड या एसएमएस के रूप में भेजा जा सकता है.

बयान में कहा गया है कि डिजिटल समाधान पूरी तरह से सुरक्षित है क्योंकि यह लेनदेन पूरा होने के बाद ही भुगतान सुनिश्चित करता है. प्री-पेड होने की वजह से बिना किसी बिचौलिए के सर्विस प्रोवाइडर को समय पर भुगतान होगा.

यह प्रणाली सरकार की कल्याणकारी सेवाओं को बिना किसी गड़बड़ी के सुनिश्चित करने में भी बहुत उपयोगी हो सकती है, जैसे कि मां और बाल कल्याण योजनाओं के तहत या टीबी उन्मूलन कार्यक्रमों के तहत दवाएं और पोषण संबंधी सहायता प्रदान करना.

जीतने के बाद जब ताई ने सिंधु को बाहों में भर लिया

पी वी सिंधु टोक्यो ओलम्पियाड में पदक लेते हुए

सिंधु दौड़कर आई, मुझे गले लगाया और मेरा चेहरा अपने हाथों में भरकर बोली- मुझे पता है कि तुम असहज हो. तुमने बहुत अच्छा खेला लेकिन आज तुम्हारा दिन नहीं था. उसने मुझे बाँहों में भर लिया और बोली कि उसे सब मालूम है कि मुझे कैसा लग रहा होगा.”

भारत की स्टार बैडमिंटन खिलाड़ी पीवी सिंधु के बारे ये अनुभव चीनी ताइपे खिलाड़ी ताई ज़ू यिंग ने साझा किया है.

वही ताई ज़ू यिंग जिन्होंने सिंधु के टोक्यो ओलंपिक के फ़ाइनल में पहुँचने का अंत किया था. ताई ने सेमी फ़ाइनल में सिंधु को हरा दिया था.

मगर फिर ताई को फ़ाइनल में चीनी खिलाड़ी चेन यू फ़ेई के हाथों हार का सामना करना पड़ा था.

ताई ने सिल्वर मेडल तो जीता लेकिन गोल्ड जीतने का मौका खोकर वो काफ़ी दुखी थीं और तब भारत की सिंधु ने उन्हें संभाला.

अब दुनिया की नंबर-1 खिलाड़ी ने ताई ने ये पूरी घटना अपने इंस्टाग्राम अकाउंट पर शेयर की है और पीवी सिंधु को शुक्रिया कहा है.

27 वर्षीय ताई ने अपनी भावुक पोस्ट में लिखा है,“सिंधु के इस सच्चे उत्साहवर्धन ने मुझे रुला दिया था. मैं सच में बहुत दुखी थी क्यों मैंने बहुत कोशिश की थी.”

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आज 2 बजे जारी होगा सीबीएसई 12वीं का रिजल्ट

नई दिल्ली: केंद्रीय माध्यमिक शिक्षा बोर्ड की 12वीं क्लास का रिजल्ट (CBSE Class 12th Result) आज (30 जुलाई) दोपहर 2 बजे जारी होगा. स्टूडेंट्स अपना रिजल्ट सीबीएसई बोर्ड की आधिकारिक वेबसाइट cbseresults.nic.in या cbse.gov.in पर चेक कर सकेंगे. इस बात की जानकारी सीबीएसई ने ट्वीट कर दी.

इस फॉर्मूला पर तैयार किया गया रिजल्ट

सीबीएसई 12वीं का रिजल्ट 30:30:40 के फॉर्मूले पर तैयार किया गया है. इसमें 10वीं और 11वीं के मार्क्स को 30-30 प्रतिशत वेटेज और 12वीं क्लास के इंटरनल एग्जाम को 40 प्रतिशत वेटेज दिया गया है. स्टूडेंट्स के 10वीं क्लास के 5 में से बेस्ट 3 पेपर्स के मार्क्स लिए गए हैं. इसी तरह 11वीं क्लास के भी बेस्ट 3 पेपर्स के नंबर लिए गए हैं. वहीं 12वीं क्लास में स्टूडेंट्स के यूनिट, टर्म और प्रैक्टिकल एग्जाम के मार्क्स लिए जाएंगे. जो छात्र रिजल्ट से संतुष्ट नहीं होंगे, उन्हें एग्जाम देने का मौका दिया जाएगा. हालांकि इसके लिए कोरोना वायरस की स्थिति सामान्य होने का इंतजार करना पड़ेगा.

इस वर्ष संपत्ति गाइड लाइन की दरो में कोई वृद्धि नहीं -सीएम शिवराज सिंह

मध्यप्रदेश शासन ने आमजनो को राहत देने के उद्देश्य से इस वर्ष संपत्ति की गाइडलाइन की दरों में वृद्धि नहीं करने का फैसला किया है। इस वर्ष मौजूदा गाइडलाइन से ही संपत्ति की खरीद और ब्रिक्री होगी। साथ ही 5,000 ऐसे स्थान जहां दरें निधारित नहीं थीं वहां दरें निर्धारित की जाएंगी:

Tourist Spot पर लोगों का जमावड़ा COVID-19 महामारी की तीसरी लहर को न्योता देगा.

कोरोना (Corona) की तीसरी लहर (Third Wave) की आशंका के बीच एक चिंताजनक खबर आई है. एक सर्वे में सामने आया है कि 28 प्रतिशत भारतीय अगस्त-सितंबर के महीने में यात्रा करने की योजना बना रहे हैं. इसी दौरान रक्षाबंधन (Rakshabandhan) जैसा प्रमुख त्‍योहार भी आएगा. लोकल सर्कल्‍स ऑनलाइन प्‍लेटफॉर्म द्वारा किए गए सर्वे में यह चिंताजनक आंकड़े उस समय सामने आए हैं, जब विशेषज्ञ बार-बार भीड़ जमा करने से बचने की चेतावनी दे रहे हैं. पर्यटन स्‍थलों (Tourist Spot) पर इस तरह लोगों का जमावड़ा COVID-19 महामारी की तीसरी लहर को न्‍योता देगा. 

311 जिलों में किया गया सर्वे 

इस ऑनलाइन प्लेटफॉर्म ने तीसरी COVID-19 लहर आने के खतरे का अंदाजा लगाने के लिए और आगामी महीनों में लोगों की यात्रा योजनाओं (Travel Plans) को समझने के लिए यह सर्वे किया था. साथ ही सर्वे में दूसरी लहर के दौरान लोगों द्वारा की गई यात्राओं की वजह जानने की भी कोशिश की गई. यह सर्वे 311 जिलों के 18 हजार से ज्‍यादा लोगों के बीच किया गया. इन लोगों में 68 फीसदी पुरुष और 32 फीसदी महिलाएं थीं. 

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कंज़र्वेटरशिप ने मेरे सपनों को मार दिया है-ब्रिटनी स्पीयर्स

साल 2008 में ब्रिटनी मानसिक स्वास्थ्य की परेशानी से जूझ रही थीं, उस दौरान कोर्ट ने कंज़र्वेटरशिप नाम की एक प्रक्रिया के तहत उनकी देखरेख के लिए कंज़र्वेटर यानी क़ानूनी अभिभावक नियुक्त किए थे.

कोर्ट ने अपने आदेश में ब्रिटनी की संपत्ति और उनकी ज़िंदगी के अहम फ़ैसले लेने का हक़ उनके पिता जेमी स्पीयर्स को दिया था. लेकिन बाद में ब्रिटनी ने अपने पिता को इस भूमिका से बाहर करने की गुज़ारिश की.

ब्रिटनी स्पीयर्स ने कहा कि जब तक उनके पिता का कंट्रोल उनते करियर पर रहेगा, वो परफॉर्म नहीं करेंगी. साल 2008 में कंज़र्वेटरशिप के तहत ब्रिटनी के पिता ये अधिकार मिला हुआ है.

ब्रिटनी ने सार्वजनिक तौर पर किए गए कई कमेंट्स में उनपर किए जा रहे कंट्रोल और अपनी आर्थिक स्थिति को बयां किया. इंस्टाग्राम पर एक पोस्ट में उन्होंने लिखा, “इस कंज़र्वेटरशिप ने मेरे सपनों को मार दिया है… अब मेरे पास कुछ बचा है तो है उम्मीद.”

ब्रिटनी ने समझौते को अपमानजनक बताया है और वो इसे ख़त्म करना चाहती हैं. बीते कई सालों से ब्रिटनी के लीगल गार्जियन (क़ानूनी तौर पर उनके अभिभावक) उनके करियर के फ़ैसले ले रहे हैं.

ब्रिटनी ने लिखा, “मैं आने वाले दिनों स्टेज पर परफॉर्म नहीं करूंगी, जब मेरे पिता ये फ़ैसला करें कि मुझे क्या पहनना है, बोलना है, करना है या सोचना है.”

“वेगस पर स्टेज पर जाने से बेहतर है मैं अपने कमरे से वीडियो शेयर करूं. मैं मेकअप लगा कर बार बार स्टेज पर कोशिश नहीं करूंगी.”

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कैसे काम करता है सॉफ्टवेयर पेगासस

ये एक सर्विलांस सॉफ्टवेयर है जिसे इसराइल की सुरक्षा कंपनी एनएसओ ग्रुप ने बनाया है. इसके जरिए किसी व्यक्ति का फोन हैक करके उसकी गतिविधियों पर नजर रखी जा सकती है.

इसे टारगेट के फोन में इंस्टॉल किया जाता है और फिर उसके फोन का रीमोट कंट्रोल ले लिया जाता है. ये रिमोट एक्सेस ट्रोजन की तरह काम करता है.

यरूशलम स्थित द इंस्टीट्यूट फ़ॉर नेशनल सिक्यूरिटी स्टडीज़ से जुड़े साइबर सुरक्षा विशेषज्ञ कर्नल गाबी सिबोनी के मुताबिक, “ये कैसे काम करता है इसके बारे में अधिक जानकारी उपलब्ध नहीं है. ये एक बेहद उन्नत सॉफ्टवेयर है जिसे एनएसओ ने डेवलप किया है.”

इसे बनाने वाली कंपनी एनएसओ का गठन 2009 में हुआ था और ये अति उन्नत निगरानी टूल बनाती है. दुनिया के कई देशों की सरकारें इसकी ग्राहक हैं.

पेगासस-जासूसी मामले में जो कथित नई लिस्ट जारी की गई है उसमें उस महिला के इस्तेमाल किये गए तीन फ़ोन नंबर भी हैं जिसने अप्रैल 2019 में भारत के तत्कालीन मुख्य न्यायाधीश रंजन गोगोई पर यौन उत्पीड़न का आरोप लगाया था.

सुप्रीम कोर्ट की एक आंतरिक समिति ने गोगोई को क्लीन-चिट दे दी थी और उनके रिटायर होने के तुरंत बाद सरकार ने उन्हें राज्यसभा के लिए नामित किया था.

द वायर के अनुसार, इस महिला के नंबरों के साथ-साथ उनके पति और उनके दो भाइयों द्वारा इस्तेमाल किए गए आठ अन्य नंबरों को निगरानी के लिए चुना गया. द वायर के अनुसार, ये वह समय था जब पूर्व सीजेआई के ख़िलाफ़ उन्होंने आरोप लगाए थे.

माइंड रीडिंग हेलमेट से इंसान के दिमाग को सीधे एक आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस से कनेक्ट कर सकते हैं