यंगस्टर्स अपना रहे हैं न्यू मेडिटेशन टेक्नीक्स

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इंदौर. शहर में अब यंगस्टर्स के बीच रिलेक्सेशन के तरीके बदल रहे हैं। अब वे नेचरल लाइट और म्यूज़िक के बैलेंस कॉम्बीनेशन के साथ मेडिटेशन कर रहे हैं। इसके लिए सनलाइट का सबसे ज्यादा यूज़ किया जाता है क्योंकि सुबह इससे पॉजीटिव एनर्जी जनरेट होती है। इसके अलावा वे कैंडल लाइट या कोई भी आर्टिफिशियल लाइट का इस्तेमाल कर मेडिटेशन कर रहे हैं। इसके साथ म्यूज़िक भी इस्तेमाल किया जा रहा है। इससे उनकी लाइफ की क्वालिटी और वर्क एफिशिएंसी भी बढ़ रही है।
शहर के मेडिटेशन सेंटर्स इस तरह की रिलेक्सेशन टेिक्नक सिखा रहे हैं। ओशो मेडिटेशन सेंटर की संचालिका प्रेम गरिमा बताती हैं ध्यान एकाग्रता ही नहीं है, खुद से और सराउंडिंग्स के प्रति अवेयर करना है। खुद को बेहतर तरीके से जानना है। प्रेम गरिमा कहती हैं कि मेडिटेशन के लिए लाइट सोर्स सनलाइट भी हो सकता है और आर्टिफिशियल भी। कैंडल, बल्ब या कोई भी लाइट ऑब्जेक्ट्स पर फोकस किया जाता है। पॉजीटिव एनर्जी फ्लो के साथ एकरूपता आती है। कभी-कभी खुशी या दु:ख के पलों में आंसू आ जाते हैं। इससे मन हल्का होता है और संवेदनाएं जाग्रत होती हैं। मेडिटेशन से माइंड, बॉडी एंड सोल पर पॉजिटिव इफेक्ट्स होते हैं। जिस प्रकार हवा चलने, नदी या झरनों की आवाज सुकून देती है वैसे ही मेडिटेशन में भी म्यूजिक से अच्छा फील आता है। म्यूजिक के साथ डांस का कॉम्बिनेशन भी जरूरी है। संस्था सुर सागर म्यूजिक थैरेपी रिसर्च सेंटर के डायरेक्टर ज्ञानप्रकाश यादव ने बताया कि म्यूजिक से डीप मेडिटेशन और कंसन्ट्रेट करने में आसानी होती है। इससे बीपी और डायबिटीज को कंट्रोल किया जा सकता है।

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