शहर के 87 फीसदी स्कूली बच्चे हैं एक खास लत के शिकार

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देश में स्कूली छात्रों की बात की जाए तो संचार के नए-नए साधनों के प्रति जितना उत्साह मेट्रो सिटीज में है उससे कहीं अधिक मिनी मेट्रो में देखने को मिल रहा है। मोबाइल फोन रखने और उसके उपयोग के मामले में मिनी मेट्रो के बच्चों ने मेट्रो के बच्चों को पछाड़ दिया है। ताजा मामला टीसीएस के 2013 में जुलाई से दिसंबर के बीच इंदौर के 60 स्कूलों के एक हजार से अधिक स्टूडेंट पर किए गए सर्वे से जुड़ा है। सर्वे की मानें तो शहर के 87 प्रतिशत स्कूली बच्चे इंटरनेट एडिक्ट हैं, जो चैटिंग और गेमिंग के लिए मोबाइल का उपयोग करते हैं। ​बेंगलुरु में देश के पहले इंटरनेट डी-एडिक्शन क्लीनिक में आठ महीनों के दौरान 33 मरीज आ चुके हैं। इसमें से 29 तो 14 से 25 साल के बीच हैं। टेक-एडिक्ट कहे जा रहे इन लोगों को सोशल मीडिया, कम्प्यूटर गेम्स की लत है, जबकि ट्विटर के फाउंडर जेक डोर्से खुद कह चुके हैं कि रोज 15-20 मिनट से ज्यादा इंटरनेट पर समय नहीं देना चाहिए। हालांकि, टैबलेट के उपयोग में मेट्रो के बच्चे आगे हैं। सोशल नेटवर्किंग साइट्स पर मिनी मेट्रो के बच्चों की उपस्थिति और सक्रियता मेट्रो से अधिक है। कम्युनिकेशन के लिए भी वे इन साइट्स का उपयोग अधिक करते हैं। चैट थोड़ी कम करते हैं। इंदौर के आंकड़े भी इसकी पुष्टि करते हैं।

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